
ध्वनि प्रदूषण का असर
भोपाल. यदि आप जिम, जुंबा व क्लब में लगातार जाते हैं तो सावधान हो जाइए. यहां तेज आवाज में बज रहे गाने आपको बिना अहसास के बहरा बना रहे हैं। रोज तेज आवाज में गाने सुनने से कान की नसें कमजोर हो रही हैं। जब अहसास होता है तब तक कोई इलाज भी नहीं बचता। वाहनों के बढ़ते उपयोग से भी ध्वनि प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। यह कानों पर गहरा असर डाल रहा है। वायु प्रदूषण से बार-बार एलर्जी होती है। इससे कान के पर्दे सिकुडऩे के केस बढ़ रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि अधिकांश मरीज 20-40 साल के बीच के हैं। नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञ इसे चिंताजनक मान रहे हैं।
बता दें, प्रदूषण शरीर पर चौतरफा वार कर रहा है। बढ़ते प्रदूषण से सांस व हृदय के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। राजधानी के हमीदिया, जेपी समेत सरकारी और निजी अस्पतालों में रोज नाखून रोग के भी मरीज पहुंच रहे हैं। इस रोग में मरीज की आंखों में धूल के कण पहली परत में पहुंच जाते हैं। इससे काफी परेशानी होती है।
प्रदूषण से दिखते हैं ये लक्षण
कान में भारीपन, सुनने की क्षमता कमजोर होना
सुस्ती, मतली, उल्टी, सिरदर्द व तनाव
सांस लेने में दिक्कत
मुंह, गले और आंखों में जलन या खुजली
नाक बहना और खून आना
खांसी व गले में खराश
पेट में दर्द, डायबिटीज
इसलिए ये समस्याएं
पीएम कण से सांस, हृदय व कैंसर से जुड़ी बीमारियां
कार्बन मोनोऑक्साइड से जल्दी थक जाना, सुस्ती
कार्बन डाइऑक्साइड से भूलने की बीमारी
ओजोन से आंखों में खुजली, सांस व फेफड़ों की समस्याएं
नाइट्रोजन डाइऑक्साइड से गले-फेफड़ों में संक्रमण, अस्थमा
हमीदिया अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. यशवीर जेके बताते हैं कि मानक से ज्यादा ध्वनि प्रदूषण कानों को प्रभावित करता है। वायु प्रदूषण से साइनोसाइटिस, जुकाम, एलर्जी होती है। यह बाद में कानों को ज्यादा प्रभावित करती हैं। जिम व जुंबा के दौरान तेज आवाज में रहने से कान की नसों पर प्रभाव पड़ता है। जो बिना एहसास के लोगों को बहरा बना रहा है।
Published on:
02 Dec 2022 03:00 pm
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