भोपाल। आखिरी वक्त में भी हबीब तनवीर ऊर्जा से लबालब थे। वे लगातार काम कर रहे थे। थियेटर, आर्ट और जनता के लिए। कभी थकान उनके इर्दगिर्द भी नहीं फटकती थी। वर्ष 1959 में हबीब तनवीर ने भोपाल में नए थिएटर की नींव रखी। जो आज भी चल रहा है। उन्हें शौहरत भोपाल के भारत भवन ने दिलाई। उनके नाटक ‘चरणदास चोर’ ने उन्हें थियेटर से लेकर बालीवुड का स्टार बना दिया। इस नाटक को लोग आज भी याद करते हैं।