
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में सहेज कर रखी गई है यह रामायण।
बरकतउल्ला इकलौता विश्वविद्यालय है, जहां वाल्मीकि रामायण की हस्तलिखित प्रति मौजूद है। 300 साल पुरानी रामायण अब नाजुक अवस्था में है। इसे संरक्षित करने को पुरातत्व विभाग से संपर्क किया गया है।
विशेषज्ञों की सलाह के बाद अब जापानी टिश्यू पेपर से संरक्षित करने की तैयारी की जा रही है। यह प्रयोग सफल होता है तो 500 साल के लिए इसे संरक्षित किया जा सकेगी। इसका डिजिटलाइजेशन भी करने की योजना है। फिलहाल इसे एक विशेष कपड़े में लपेटकर लाइब्रेरी के अलग कक्ष में रखा है। डॉ. उदेश्वर शर्मा ने बताया कि पूर्व प्रशासनिक अधिकारी ईशनारायण जोशी ने इसे विश्वविद्यालय को भेंट किया था।
पुरातत्व विभाग से किया संपर्क
करीब 300 साल पुरानी इस रामायण को संरक्षित करने के लिए पुरातत्व विभाग दिल्ली एवं लखनऊ से संपर्क किया गया है। उन्होंने रामायण को नहीं छूने की सलाह दी है, ताकि कागज को किसी तरह का नुकसान न हो। टीम जल्द ही निरीक्षण कर इसे सुरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू करेगी।
तो हो सकता है नुकसान
रामायण को वाल्मीकि ने लिखा था। इसके बाद उनके शिष्यों से इसकी कई हस्तलिखित प्रतियां तैयार कीं। इन्हीं में से एक प्रति बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में मौजूद है। अगर इसे हॉट लैमिनेटिंग मशीन से लैमिनेट किया जाए तो ये अमूल्य धरोहर हमेशा के लिए खराब हो सकती है। लैमिनेशन को अच्छी तरह से संभाला न जाए तो मशीन की हीट कागज को जला भी सकती है। इसलिए नई तकनीक पर विचार किया गया है।
Updated on:
15 Dec 2023 12:37 pm
Published on:
15 Dec 2023 12:35 pm
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