
शनिवार को क्रिकेटर राहुल द्रविड़ का 52वां बर्थडे
Happy Birthday Rahul Dravid 52nd Birthday: दो दशकों तक टीम इंडिया की दीवार (The Wall) कहलाने वाले एक दिग्गज क्रिकेटर राहुल द्रविड़ आज तक अपने फैंस के दिलों पर राज करते हैं। क्रिकेट पिच पर उनके स्क्वेयर कट शॉट, आराम से खेलने का तरीका, तो क्रिकेट मैदान से बाहर उनकी सादगी के लोग दीवाने हैं। क्रिकेट के दिग्गज भी उन्हें किसी भी मायने में क्रिकेट का भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर से कम नहीं मानते। क्रिकेट के इस दिग्गज खिलाड़ी का बचपन मध्य प्रदेश की गलियों में बीत है। इसीलिए एमपी के इस शहर से राहुल द्रविड़ को खास लगाव भी है…
patrika.com पर पढ़ें क्रिकेटर राहुल द्रविड़ की लाइफ के ऐसे रोचक फैक्ट और अनसुने किस्से जिनसे बदल सकती है आपकी भी जिंदगी…
क्रिकेटर राहुल द्रविड़ का मध्य प्रदेश से खास नाता है। राहुल द्रविड़ का जन्म मध्य प्रदेश के मिनी मुंबई इंदौर में 11 जनवरी 1973 को हुआ है।
बचपन से ही राहुल को क्रिकेट खेलने का शौक था। वे अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलते थे।
राहुल द्रविड़ के पिता एक जैम फैक्ट्री में काम करते थे। इसलिए उन्हें बचपन में घर पर प्यार से जैमी कहकर पुकारते थे। करियर के शुरुआती दिनों में राहुल द्रविड़ ने किसान जैम के विज्ञापन में भी काम किया था।
राहुल द्रविड़ के बचपन में ही उनके माता-पिता इंदौर छोड़कर बैंगलुरू चले गए। लेकिन आज भी इंदौर में उनके बड़े भाई रहते हैं। जिनसे मिलने वे अक्सर इंदौर आते हैं। यहां उन्हें स्ट्रीट फूड का मजा लेते भी देखा गया। उनके ऐसे वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुए।
ऑस्ट्रेलियन क्रिकेटर स्टीव वॉ (Steve Waugh) कहते थे कि 15 मिनट में आउट करना जरूरी है। अगर 15 मिनट में राहुल द्रविड़ का विकिट नहीं लिया तो फिर इंडियन टीम के दूसरे खिलाड़ियों का विकेट गिराने पर फोकस करना होगा, क्योंकि 15 मिनट के बाद राहुल आउट नहीं होंगे। यानी टीम इंडिया को ही नहीं बल्कि दूसरी टीमों को भी राहुल द्रविड़ पर इतना विश्वास था कि ये है तो टीम हारेगी नहीं। वहीं राहुल द्रविड़ के कलात्मक खेल के कारण ही एक न्यूज पेपर की हेडिंग में राहुल को हाइलाइट करते हुए लिखा था 'दी वॉल।' इस पर प्रतिक्रिया देते हुए भी राहुल द्रविड़ ने मुस्कराते हुए कहा था कि ऐसा इसलिए लिखा गया है कि जब भी मैं आउट ऑफ फॉर्म हो जाऊं तो ये लिखा जा सके, 'गिर गई दीवार।' तब से दो दशक तक राहुल द्रविड़ इंडियन क्रिकेट टीम की दीवार कहलाते रहे।
राहुल द्रविड़ को मिस्टर डिपेंडेबल के नाम से भी पुकारा जाता था। उनको मिलने वाले इस नाम के पीछे भी एक बड़ा ही रोचक किस्सा है। यहां पढ़ें पूरा किस्सा
इसका उदाहरण है कोलकाता के ईडन गार्डन्स में 2001 में खेला गया मैच। यहां इंडिया और ऑस्ट्रेलिया के बीच मैच होना था। उस समय ऑस्ट्रेलिया ऐसी मजबूत टीम थी जिसे कोई भी हरा नहीं सका था। इस मैच की शुरुआत चाहे जैसी थी, लेकिन 5 विकेट गिरने के बाद जब 6ठवें खिलाड़ी के रूप में राहुल द्रविड़ की एंट्री हुई तो मैच का रुख एक दम से पलट गया। वीवीएस लक्ष्मण के साथ पार्टनरशिप में राहुल द्रविड़ ने 180 रन बनाकर यहां भारत की ऐतिहासिक जीत दर्ज कराई थी। ये ऐसे पल थे जब राहुल द्रविड़ के लिए कहा गया कि वो टीम को जिताने की जिम्मेदारी अकेले अपने कंधे पर उठा लेते हैं।
राहुल द्रविड़ को एक विनम्र और अच्छे इंसान के रूप में जाना जाता है। उनके व्यक्तित्व की इस खासियत के कैनेडा टीम के वॉइस कैप्टन मिराज पटेल भी बड़े फैन हो गए थे। 2016 का ये किस्सा सिखाता है विनम्रता आपको महान बनाती है। अंडर 19 वर्ल्ड कप का वॉर्मअप मैच था। उसके कोच राहुल द्रविड़ ही थे।
इस मैच में भारत ने केनेडा को 372 रन से भारी शिकस्त दी थी। कहा जाता है कि इस मैच के बाद कैनेडा टीम इतनी हताश हुई कि खिलाड़ियों को लगने लगा कि वो क्रिकेट के लिए नहीं बने हैं। उनकी आंखों में आंसू थे। वे सभी ड्रेसिंग रूम में थे और निराशा के भाव में क्रिकेट छोड़ने के बारे में सोच रहे थे।
अचानक उनके ड्रेसिंग रूम का दरवाजा बजा। दरवाजा मिराज पटेल ने खोला था। पूरी टीम राहुल द्रविड़ को दरवाजे पर खड़ा देख शॉक्ड रह गई थी। तब जीत का घमंड करने और खुशी का जश्न मनाने के बजाय कैनेडा टीम के पास पहुंचे राहुल द्रविड़ ने खिलाड़ियों से कहा हमने हार्ड वर्क किया है, खूब प्रेक्टिस की है, हार्ड प्रेक्टिस की है। उन्होंने पूरी टीम को मोटिवेट करते हुए कहा कि तुम भी मेहनत करो। हार्ड वर्क, हार्ड ट्रेनिंग करो।
तब केनेडा टीम के वॉइस कप्तान का कहना था कि राहुल द्रविड़ का इस तरह हारी हुई टीम के पास आना हमारे लिए किसी सपने के सच होने जैसा था। ये उनकी विनम्रता ही थी कि उन्होंने हारी हुई टीम को मोटिवेट किया।
राहुल द्रविड़ के मैच देखकर हर किसी को आपने ये कहते हुए सुना होगा कि वे बड़े आराम से खेलने वाले खिलाड़ी हैं। यह सच भी है। दरअसल राहुल द्रविड़ का खेल बड़ा ही कलात्मक होता था। राहुल द्रविड़ अपनी इनिंग्स के लिए बॉल बाय बॉल प्लानिंग करते थे और आगे बढ़ते जाते थे। जिसे लेकर कहा जाता था कि वे हारने वालों में से नहीं हैं। खेल मैदान के साथ ही उनकी लाइफ में भी ऐसा ही पेशेंस देखने को मिलता था। राहुल द्रविड़ ऐसे शख्स हैं जिनके नाम सबसे ज्यादा बॉल खेलने का रिकॉर्ड भी दर्ज है।
राहुल द्रविड़ के लिए कहा जाता है कि वे स्किलफुल नहीं थे। लेकिन हार्डवर्किंग थे। राहुल द्रविड़ मानते हैं कि अगर आप में टैलेंट नहीं है, तो कोई बात नहीं, मेहनत करते रहिए, एक दिन आप में टैलेंट आ जाएगा। उनके की इंटरव्यूज में जब भी उनसे ये सवाल पूछा गया कि वे नई बॉल का सामना करते थे तो कभी डरे या प्रेशर में आए… तो उनका एक ही जवाब होता था कि उन्हें कभी प्रेशर फील नहीं होता, वे बल्कि वे इसे एक शानदार ऑपर्च्युनिटी की तरह मानते हैं। राहुल द्रविड़ का ये अंदाज सिखाता है कि हार्ड वर्क करना मेहनत करना आपकी जिंदगी आसानी से बदल सकता है।
राहुल द्रविड़ ने नागपुर की डॉक्टर विजेता पेंधारकर से महाराष्ट्रियन रीति रिवाज से शादी की है
राहुल द्रविड़ के बेटे का नाम समित द्रविड़ है
राहुल द्रविड़ को बॉल टेम्परिंग के मामले में जुर्माना भी भरना पड़ा था।
राहुल द्रविड़ ने विराट कोहली को बल्लेबाजी की टेक्नीक और बारीकियां सिखाई थीं
राहुल द्रविड़ ने भारत के लिए 164 टेस्ट मैच खेले हैं
राहुल द्रविड़ ने साल 2003 में स्कॉटलैंड की टीम के लिए भी 12 मैच खेले थे
राहुल द्रविड़ ने अपने टी20 वर्ल्ड कप बोनस में मिले 2.5 करोड़ रुपए का हिस्सा साथियों के लिए दान कर दिया था
Updated on:
11 Jan 2025 04:10 pm
Published on:
10 Jan 2025 04:21 pm
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