
राजधानी भोपाल की सेंट्रल जेल में 'हक हमारा भी तो है' नामक अभियान के तहत सेंट्रल जेल में बंदियों और बाल संप्रेषण गृहों में बच्चों की काउंसलिंग की गई।

कोई लंबे समय से अपने परिवार से बात करने को तरस रहा था, तो कोई अपने केस को लेकर आगे की कार्रवाई संबंधी जानकारी प्राप्त करने के लिए परेशान था। भोपाल विधिक सेवा प्राधिकरण ने 'हक हमारा भी तो है' अभियान के तहत सेंट्रल जेल और बाल संप्रेषण ग्रहों में 63 लोगों की टीम गठित कर सभी बंदियों से बातचीत की।

1 नंवबर से 10 नंवबर तक चले इस सर्वे में करीब 3412 बंदियों की काउंसलिंग की गई है। जिसमें बंदियों का दर्द उनकी आंखों से छलक आया। जिसमें जेल के बंदियों और बच्चों ने अपनी-अपनी परेशानी जाहिर की।




