
Harda cracker factory blast: हरदा पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट में अपनों को खो चुके पीड़ित परिवार न्याय की मांग को लेकर मंगलवार को भोपाल पहुंचे, लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलने की उनकी उम्मीदें अधूरी रह गईं। मिसरोद क्षेत्र में पुलिस ने उन्हें रोक लिया और आगे बढ़ने नहीं दिया। पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें जबरन बस में बैठाकर वापस भेज दिया गया, साथ ही कुछ पर पुलिस द्वारा धक्का-मुक्की और मारपीट किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
हरदा जिले से आए ये पीड़ित परिवार 150 किलोमीटर की न्याय यात्रा करते हुए भोपाल पहुंचे थे। उनका उद्देश्य था मुख्यमंत्री से मिलकर 6 फरवरी 2024 को हुए विनाशकारी विस्फोट में मारे गए अपनों के लिए न्याय और उचित मुआवजा प्राप्त करना। इस हादसे में 13 लोगों की मौत हुई थी, और कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। पीड़ितों का आरोप है कि न तो उन्हें पर्याप्त मुआवजा मिला और न ही सरकार की तरफ से कोई संवेदनशीलता दिखाई गई।
भोपाल शहर की सीमा पर स्थित मिसरोद में जैसे ही पीड़ितों का समूह पहुंचा, पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। चश्मदीदों के अनुसार, करीब 30 बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे शामिल थे, जिन्हें पुलिस ने जबरन बस में बैठाकर हरदा के लिए रवाना कर दिया। इस कार्रवाई के दौरान पीड़ितों और पुलिस के बीच झूमाझटकी भी हुई। कुछ महिलाओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें धक्का दिया और जबरन बस में ठूंसा।
मामले में मिसरोद पुलिस ने सफाई देते हुए कहा कि किसी के साथ मारपीट या लाठीचार्ज नहीं किया गया है। पुलिस का कहना है कि स्थिति को शांतिपूर्वक नियंत्रित करने के लिए पीड़ितों को सुरक्षित तरीके से वापस भेजा गया। अधिकारियों ने यह भी बताया कि उन्हें उच्चाधिकारियों से निर्देश मिला था कि मुख्यमंत्री से मुलाकात बिना पूर्व अनुमति के नहीं हो सकती।
पीड़ितों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे पिछले एक साल से लगातार सरकार और प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला है। “हम अपनों को खो चुके हैं, अब हमें सिर्फ सम्मान और न्याय चाहिए। पर सरकार हमारी सुन ही नहीं रही,” एक पीड़ित महिला ने कहा। कई लोगों ने आरोप लगाया कि हादसे के जिम्मेदार फैक्ट्री मालिक के खिलाफ अब तक सख्त कार्रवाई नहीं की गई है।
इस घटना को लेकर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने सरकार की आलोचना की है। उनका कहना है कि यदि पीड़ितों को मुख्यमंत्री से मिलने तक नहीं दिया जा रहा है, तो यह लोकतंत्र के खिलाफ है। कई संगठनों ने आगामी दिनों में भोपाल में विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।
Published on:
09 Apr 2025 08:17 am
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