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एमपी में आंधी-बारिश के साथ ओलों का तांडव, बर्फ की चादर से ढंके कई जिले

Weather Alert : तेज गर्मी के बीच अचानक से एक्टिव हुए सिस्टम ने राज्य में आंधी, बारिश के साथ ओलावृष्टि का दौर शुरु कर दिया है। आज भी प्रदेश के 16 जिलो में तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
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भोपाल

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Mohammad Faiz Mubarak

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Updated: 31 Mar 2026, 1:21 PM IST

Weather Alert

16 जिलो में तेज हवा और गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट (Photo Source- Patrika)

Weather Alert : मार्च के आखिरी दिनों में मध्य प्रदेश के अधिकतर इलाकों का मौसम पूरी तरह से बदल चुका है। तेज गर्मी के बीच अचानक से एक्टिव हुए सिस्टम ने राज्य में आंधी, बारिश के साथ ओलावृष्टि का दौर शुरु कर दिया है। एक तरफ जहां कई जिलों में बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि से बर्फ की चादर के समान दिखने वाली ओलों की तस्वीरें सामने आ रही हैं तो वहीं, आज फिर मौसम विभाग ने प्रदेश के 16 जिलो में तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट जारी कर दिया है।

मौसम विभाग के ताजा अनुमान के मुताबिक, मंगलवार यानी आज प्रदेश के ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, बैतूल, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट में मौसम अचानक करवट ले सकता है। इनमें से कई इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने और बिजली गिरने की भी आशंका जताई जा रही है।

क्यों बिगड़ा मौसम?

मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में एक साथ दो सिस्टम एक्टिव हैं। ट्रफ लाइन और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के साथ अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी ने प्रदेश में हालात और बिगाड़ दिए हैं। यही कारण है कि, प्रदेश में एक साथ गर्मी, बारिश और ओले जैसे हालात बन रहे हैं। प्रदेश में ऐसी स्थिति 3 अप्रैल तक बनी रहने की संभावना जताई जा रही है।

सोमवार को इन जिलों में गिरे ओले

बीते दिन उज्जैन, नीमच, मंदसौर, बैतूल, धार और सीहोर में ओले गिरे, जबकि भोपाल समेत 20 से ज्यादा जिलों में आंधी और बारिश का असर देखने को मिला। कई जगहों पर तेज हवाओं के साथ बादल छाए रहे, जिससे मौसम पूरी तरह बदला हुआ नजर आया।

2 अप्रैल से फिर एक्टिव होगा नया सिस्टम

मौसम विभाग के अनुसार, आगामी 2 अप्रैल से एक और वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव हो रहा है, जिसका प्रभाव उत्तर-पश्चिम भारत के साथ मध्य प्रदेश पर भी दिखाई देगा। इससे बारिश और आंधी का दौर और तेज हो सकता है। इस बार मार्च में मौसम ने बार-बार रंग बदले हैं। पहले तेज गर्मी, फिर लगातार बारिश, ओलावृष्टि और आंधी के कई दौर आ चुके हैं। 45 से ज्यादा जिलों में इसका असर नजर आ रहा है। कई इलाकों में फसलें भी प्रभावित हुई हैं। अप्रैल-मई में झुलसाने वाली गर्मी का अनुमान अप्रैल और मई में प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार जाने की संभावना जताई जा रही है। विशेषकर ग्वालियर-चंबल, बुंदेलखंड और महाकौशल क्षेत्र में भीषण गर्मी की संभावना है।

तेज हवा के साथ बारिश, ओलावृष्टि से प्याज की फसल को नुकसान!

कालापीपल क्षेत्र में सोमवार शाम से तेज हवा के साथ बारिश शुरू हुई है। इससे किसानों की प्याज की फसल को नुकसान होने की आशंका है। अरनियाकलां में तेज हवा के साथ बारिश और ओलावृष्टि भी हुई। बारिश होने से मौसम में ठंडक घुल गई और लोगों को गर्मी से राहत जरूर मिली। बारिश से किसानों को अपनी प्याज की फसल की चिंता सताने लगी है। फसल को नुकसान होने से किसानों को आर्थिक नुकसान हो सकता है। कुछ जगह गेहूं की फसल भी खड़ी है ऐसे में ओलावृष्टि से नुकसान होगा। वैसे तो ज्यादातर किसानों ने गेहूं की फसल को समेट लिया है, जहां कटाई से लेकर थ्रेसर से निकलने का भी काम पूर्ण हो चुका है। लेकिन अब भी कई किसान फसल निकालने में व्यस्त हैं। कई जगह पर गेहूं की फसल खड़ी हुई है तो कई जगहों पर कटाई के बाद खेत में है। ऐसे में बारिश से गेहूं के बंधे पुले गीले हो गए हैं। अब किसानों को धूप निकलने पर इन्हें सुखाना पड़ेगा।

आगर-नलखेड़ा में हुई बारिश

आगर जिला मुख्यालय समेत नलखेड़ा में भी शाम बारिश हुई है। इससे किसानों के खेतों में कटी-खड़ी फसलों को नुकसान होने की आशंका है। हालांकि, अधिकांश जगह पर फसल खलिहानों में पहुंच गई है।

करीब 10 मिनट लगातार नीबू के आकार ते ओले गिरे, जनजीवन प्रभावित

नीमच में सुबह से मौसम खुला था। लोगों सामान्य दिनों की तरह ही अपने काम में व्यस्त थे। दोपहर में अचानक मौसम ने करवट ली। काली घटाएं छा गई और कुछ ही मिनटों में जोरदार बारिश होने लगी। जिला मुख्यालय पर भी देशी चने के आकार के ओले गिरे। ओलावृष्टि से सबसे बुरे हालात डीकेन में देखने को मिले। वहां करीब 10 से 12 मिनट ओलावृष्टि हुई। इससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया।

बताया गया कि डीकेन में दोपहर में तेज धूप के बीच आसमान पर अचानक बदल छाने लग। देखते ही देखते मौसम परिवर्तन हो गया। जोरदार बारिश ने तेज गर्मी की तपन से परेशान हो रहे लोगों को राहत प्रदान की। मौसम में ठंडक घुल गई। अचानक आसमान से ओलों के रूप में आफत बरसने लगी। लगातार हुई ओलावृष्टि ने पूरे इलाके को सफेद बर्फ की चादर से ढक दिया। नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की मुख्य सडक़ों से लेकर गली मोहल्ले, मकानों की छतों पर नींबू के आकार के ओलों के ढेर लग गए। दुकानों के सामने धूप से बचने के लिए लोगों ने हरे रंग की त्रिपाल लगाई थी। उसपर ओले जमा होने लगे। बड़ी मात्रा में ओले जमा होने से कई दुकानों पर लगे त्रिपाल फट गए और ओले जमीन पर बिखर गए।