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कैंसर नहीं… कैंसर का डर जानलेवा! एमपी में बढ़े ‘हाइपोकॉन्ड्रिय’ के मामले, जानें लक्षण

Health Alert: कैंसर होने का डर एक गंभीर मानसिक समस्या के रूप में उभर रहा, एम्स भोपाल, जयप्रकाश जिला अस्पताल और हमीदिया अस्पताल में बढ़े मरीज, कैंसर नहीं, कैंसर का डर हो सकता है जानलेवा... पढ़ें पूरी खबर क्या है ये हाइपोकॉन्ड्रिय

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Cases of hypochondria rise

Cases of hypochondria rise in Madhya Pradesh(photo: AI)

Health Alert: कैंसर नाम सुनते ही अच्छे- अच्छों के पसीने छूट जाते हैं। इस बीमारी से पीडि़तों की संख्या के मुकाबले इससे डरने वालों की संख्या काफी अधिक है। खासकर राजधानी में अब यह डर एक गंभीर मानसिक समस्या के रूप में सामने आ रहा है। हाल ही में एम्स भोपाल, जयप्रकाश जिला अस्पताल और हमीदिया अस्पताल में ऐसे कई मरीज सामने आए हैं, जिन्होंने कैंसर का शिकार होने के भ्रम में दर्जनों महंगी जांचें करवा लीं। बाद में पता चला कि यह उनका भ्रम था।

केस 1: 71 जांच, लेकिन बीमारी शून्य

अवधपुरी निवासी 45 वर्षीय राधेश्याम श्रीवास्तव (परिवर्तित नाम) को यह यकीन हो गया था कि उन्हें जानलेवा कैंसर है। इसी शक में उन्होंने 50 से अधिक सोनोग्राफी और 21 बार एंडोस्कोपी कराई। पेट दर्द, गैस और जलन को कैंसर का संकेत मान लिया। हर रिपोर्ट सामान्य आई, लेकिन डर खत्म नहीं हुआ। अंत में मनोचिकित्सक ने बताया कि कैंसर नहीं, बल्कि यह उसकी मानसिक परेशानी है।

केस 2: जांचें पूरी, भरोसा अधूरा

साकेत नगर की 38 वर्षीय मालिनी तिवारी को गले और फेफड़ों में गंभीर रोग होने का शक था। उन्होंने ईएनटी, मेडिसिन और हमीदिया अस्पताल के श्वास रोग विशेषज्ञों से परामर्श लिया। स्पाइरोमेट्री, सीटी स्कैन, ब्रोंकोस्कोपी, बायोह्रश्वसी सबकुछ हुआ। नतीजा हर बार सामान्य। डॉक्टरों ने मनोचिकित्सक से मिलने की सलाह दी, लेकिन वह आज भी इसे मानसिक नहीं, शारीरिक बीमारी मानती हैं।

इन बीमारियों में होती है समस्या

हाइपो कॉन्ड्रिय: व्यक्ति को लगता है कि वह बीमार है और डॉक्टर उसको बीमारी समझने में नाकाम हैं।

सोमैटो फार्म डिसऑर्डर: व्यक्ति को कई सारी बीमारियों के लक्षण आते है. लेकिन वो बीमारी उसे होती नहीं है।

एंजाइटी डिसऑर्डर: अनजानी बीमारी के डर से मन में भय, चिंता, घबराहट बढ़ जाती है और मरीज परेशान रहता है।

तेजी से बढ़ रहे ऐसे मामलें

एम्स के मनोचिकित्सक डॉ. तन्मय जोशी बताते है कि जब इन लोगों को एक डॉक्टर से संतुष्टि नहीं मिलती, तो वे दूसरे के पास जाते हैं। कई बार यह संख्या 10 या 15 भी हो जाती है। जेपी अस्मताल के मनोचिकित्सक डॉ. राहुल शर्मा बताते है कि हेल्थ और फिटनेस ट्रैकर एक तरह का एडिक्शन बन गए हैं।

डॉक्टर क्या कहते हैं

मनोचिकित्सक डॉ. आरएन साहु बताते हैं कि इसे इलनेस एंग्जायटी डिसऑर्डर कहा जाता है। मरीज को लगता है कि डॉक्टर उसकी बीमारी समझ नहीं पा रहे।