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अब QR कोड बता देगा सड़क सही या खराब ? नहीं हो सकेगी लैब-कॉन्ट्रैक्टर्स की मिलीभगत

Health of roads: सड़को के निर्माण कार्यों के सैंपल में निर्माण एजेंसियों की पहचान गुप्त रखने से लैब व ठेकेदारों में मिलीभगत नहीं हो सकेगी।

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Health of roads: नगरीय निकायों में सड़कों की बिगड़ती सेहत को सुधारने विभाग अब क्यूआर कोड का सहारा लेगा। नगरीय निकायों ने शहर की सड़कों को दुरुस्त बनाने पर करोड़ों खर्च किए हैं। इसके बाद भी गुणवत्ता के अभाव में कांक्रीट निर्माण हो या डामरीकृत सड़क सभी चंद वर्षों में ही खस्ताहाल हो जाती हैं। संचालनालय ने तकनीकी मदद से प्रदेश की लैब और कॉन्ट्रैक्टर्स की मिलीभगत को रोकने का प्रयास किया है।

इस व्यवस्था में अब हर नई निर्माणाधीन सड़कों में ठेकेदारों का भुगतान लैब रिपोर्ट पर केंद्रित होगा। शासन से स्वीकृत कार्यों को स्टैंडर्ड नियम व शर्तों पर स्वीकृत किया जाता है। इसके अनुसार गुणवत्ता तय होती है। निर्माण कार्यों के सैंपल में निर्माण एजेंसियों की पहचान गुप्त रखने से लैब व ठेकेदारों में मिलीभगत नहीं हो सकेगी।

ऐसी है जांच प्रक्रिया

पहले: लैब में सैंपलों पर डिटेल लिखा होता है। सैंपल कहां गया, कर्मचारियों के पास यह सूची होती है। इससे कॉन्ट्रैटर लैब से मिलीभगत कर रिपोर्ट प्रभावित करता है।

अब: सड़क बनते समय अलग-अलग स्तर पर सैंपल लेंगे। इस पर डिटेल यूआर कोड होगा। जांच एजेंसी को नहीं पता चलेगा कि सैंपल किस सड़क का है। ठेकेदार व लैब का गठजोड़ खत्म होगा।