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ट्विशा केस में 3 आवेदनों पर सुनवाई पूरी, कल कोर्ट सुनाएगा फैसला

Twisha Case : दोनों पक्षों ने कोर्ट में नए साक्ष्यों को जांच में शामिल करने की मांग की। गिरिबाला की तरफ से दायर आवेदनों में ट्विशा और उसके परिजन के नंबरों की जांच की मांग की तो वहीं, ट्विशा के परिजन ने भी गिरिबाला की कॉल डिटेल और एम्स भोपाल के सीसीटीवी जांचने की मांग की है।
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Twisha Case

Twisha Case (ट्विशा केस में सोमवार को कोर्ट सुनाएगा फैसला Photo Source- Patrika)

Bhopal News :मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कटारा हिल्स क्षेत्र में बीती 12 मई को हुई हाईप्रोफाइल ट्विशा मौत मामले में शनिवार को जिला अदालत में तीन अलग - अलग आवेदनों पर सुनवाई की है। इनमें दो आवेदन गिरिबाला की ओर से लगाए गए थे, जबकि एक आवेदन ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा की ओर से उनके अधिवक्ता अंकुर पाण्डेय ने पेश किया गया था।

अधिवक्ता अंकुर पाण्डेय ने बताया कि, गिरिबाला की ओर से दायर दोनों आवेदनों में मांग की गई है कि, ट्विशा के परिजन के मोबाइल नंबरों की जांच कराई जाए। साथ ही, ट्विशा का मोबाइल, उसके भोजन से जुड़े साक्ष्य और अन्य तकनीकी सबूतों को भी जांच का हिस्सा बनाया जाए।

कॉल डिटेल भी जांच में शामिल करने की मांग

नवनिधि शर्मा की ओर से दायर आवेदन में मांग की गई है, गिरिबाला से बात करने वाले मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल और एम्स भोपाल के सीसीटीवी फुटेज को भी जांच में शामिल किया जाए। उनका कहना है कि, कई अहम पहलुओं पर स्पष्टता आ सकती है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जिला जज सोभना भलावे ने तीनों आवेदनों पर आदेश सुरक्षित रख लिया है। अब इस मामले में अदालत सोमवार को फैसला सुनाएगी।

क्या है मामला ?

-33 वर्षीय ट्विशा शर्मा का शव 12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स स्थित उनके ससुराल में फांसी के फंदे पर लटका मिला था।

-ट्विशा शर्मा मूल रूप से नोएडा की रहने वाली थीं और उनकी शादी दिसंबर 2025 में भोपाल के वकील समर्थ सिंह से हुई थी।

-ट्विशा के परिवार ने पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह पर दहेज प्रताड़ना, मानसिक उत्पीड़न और सबूतों से छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

-मृतका के परिवार वालों का आरोप है कि, शादी के बाद से ही ट्विशा को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था, जिससे तंग आकर उसने ये कदम उठाया है।

-मामले की शुरुआती जांच भोपाल पुलिस ने की थी। बाद में एक विशेष जांच दल का गठन किया गया।

-इसके बाद मध्य प्रदेश सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला किया और सीबीआई ने अपनी एफ़आईआर दर्ज कर जांच शुरू की है।