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जांच पर आंच: 5 महीने बाद भी स्मार्ट घोटाले की जांच नहीं पहुंची नतीजे पर

- पत्रिका के खुलासे के बाद संभाग आयुक्त और कलेक्टर ने गठित की थी कमेटियां

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भोपाल@ सूबे के आदिवासी जिले डिंडोरी में 54 हायर सेकंडरी स्कूलों में स्मार्ट क्लास बनाने के नाम पर दोगुने से ज्यादा दामों पर हुई खरीदी को घोटाला उजागर होने के 5 महीने बाद भी जांच किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है। बता दें पत्रिका स्मार्ट घोटाले को प्रमुखता के साथ उजागर किया था और बताया था कि कैसे पूरी खरीदी प्रक्रिया में गड़बड़झाला किया गया। जिसके बाद दो कमेटियां गठित की गई थी। पहली कमेटी संभागीय आयुक्त ने गठित की थी जिसकी जांच की जिम्मेदारी एडिशनल कमिश्नर अमर बहादुर सिंह को सौंपी थी। तो वहीं दूसरी कमेटी कलेक्टर ने संयुक्त अध्यक्षता की कमेटी में बनाई थी। लेकिन हैरानी की बात ये है कि द्विस्तरीय कमेटी गठित होने के बाद भी पूरा घोटाला जांच की आंच के फेर में फंसा हुआ है। पांच महीने के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकल पाया है। और अधिकारी इस पूरे मामले पर अपनी- अपनी अनभिज्ञता प्रकट कर रहे हैं।

कलेक्टर बोले- समान पूरा है, गुणवत्ता की जानकारी नहीं

इस मामले को लेकर जब डिंडोरी कलेक्टर विकास मिश्रा से सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि हमने इसको लेकर कमेटी गठित की थी कि जो सामान खरीदा गया वो असल में आया या नहीं। जिसकी जांच में हमने पाया कि सामग्री सभी उपलब्ध है। अब सामान की गुणवत्ता और खरीदी प्रक्रिया को लेकर संभाग आयुक्त ने टीम बनाई थी आप उनसे संपर्क करें।

अपर आयुक्त बोले- रिपोर्ट सौंप दी है, कार्रवाई शासन को करना है

संभाग आयुक्त की ओर से गठित कमेटी का जिम्मा एडिशनल कमिश्नर अमर बहादुर सिंह को दिया गया था। जिसकी रिपोर्ट सात दिनों में सौंपनी थी। लिहाजा बातचीत में अमर बहादुर सिंह ने कहा कि इस प्रकरण को लेकर जब जांच कमेटी का गठन किया गया था, तब नियत तिथि में सभी तथ्यों की जांच कर रिपोर्ट सौंप दी गई थी। आगे की कार्रवाई शासन की तरफ से नियमानुसार की जा रही है।