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दादी के पास बंगाल रियासत का एक बांट देखा तो जमा करने का शैक चढ़ गया। एक बांट बड़े तालाब में भी मिला, जो भोपाल नवाब के समय लगभग 1904 का था। आज इनके पास बड़ी संख्या में बांटों का संग्रह है। इस संग्रह में छोटे बांट से लेकर बड़े-बड़े बांट भी हैं।
मंदसौर में अफीम तौलने के लिए जिस बांट का उपयोग होता था, उसे खरबूजा बांट कहा जाता था। यह 100 ग्राम से लेकर 450 ग्राम तक का है। इंदौर रियासत के बांट का सेट भी है।
बांट पर लिखा पढ़ने ब्राह्मी लिपि सीखी
रंजीत को एक बांट ऐसा मिला, जिस पर ब्राह्मी लिपि में लिखा था। इसे पढ़ने उन्होंने ब्राह्मी सीखी। उस पर काक्षी जनपद लिखा है। 5 किलो का यह बांट 3000 साल पुराना है। सम्राट अशोक के समय का बांट 2500 साल पुराना है। इनके पास भोपाल, ग्वालियर, मेवाड़, आगरा रियासतों का भी बांट है। रंजीत के पास माशा, तोला, छटाक और सेर के बांट भी हैं। सबसे छोटा बांट रत्ती (7 ग्राम) से लेकर एक मन (40 किलो) का है।
अब जनजातीय बांट एकत्रित कर रहे
ग्वालियर रिसायत का सर्प लोगो वाला ढाई सेर का बांट है। इस पर संवत लिखा है तो मेवाड़ रिसायत का दो तलवार के बीच सूर्य के लोगो वाला पांच सेर से एक छटाक तक का बांट है। अब वे जनजातीय क्षेत्रों में प्रयोग होने वाले बांट एकत्रित कर रहे हैं।
Published on:
03 Sept 2023 12:38 pm
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