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भोपाल। महाशिवरात्रि के बाद शहर में होली पर्व की तैयारियां शुरू हो गई है। इस बार होलिका दहन का पर्व 7 मार्च को मनाया जाएगा इसी प्रकार धुलेंडी पर्व 8 मार्च को मनाया जाएगा। आमतौर पर होलिका दहन पर भद्रा रहती है, लेकिन इस बार भद्रा का साया इस पर्व पर नहीं रहेगा और शाम से रात्रि तक शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया जा सकेगा।
रंगों के पर्व होली के लिए अब एक पखवाड़े से भी कम समय रह गया है। आने वाले दिनों में शहर के बाजारों में होली की दस्तक दिखाई देने लगेगी। शहर में अनेक स्थानों पर होलिका दहन किया जाएगा। दरअसल इस बार तिथि भेद के कारण पूर्णिमा तिथि दो दिन रहेगी। पूर्णिमा 6 मार्च को आ जाएगी जो अगले दिन 7 को सूर्योदय से लेकर शाम तक विद्यमान रहेगी।
पं. जगदीश शर्मा ने बताया कि फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 6 मार्च को शाम 4 बजकर 18 मिनट पर आएगी और अगले दिन शाम 6 बजे के बाद तक रहेगी। उदयातिथि के हिसाब से होलिका दहन का पर्व 7 मार्च को मनाया जाएगा और 8 मार्च को धुलेंडी पर्व होगा। इस बार होलिका दहन भद्रा रहित होगा।
500 से अधिक स्थानों पर दहन
पं. विष्णु राजौरिया ने बताया कि होलाष्टक की शुरुआत 27 फरवरी से होगी। होलाष्टक के साथ ही होली पर्व की तैयारियां तेज हो जाती है। माना जाता है कि होलाष्टक के दौरान शुभ कार्य वर्जित रहते हैं, लेकिन मध्यभारत में इसका दोष नहीं लगता है। सतलज, रावी, व्यास, सिंधु और झेलम इन पांच नदियों के किनारे बसे प्रदेशों में होलाष्टक के दौरान मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। कई इन राज्यों के लोग भी मध्यभारत में रहते हैं जो होलाष्टक के दौरान शुभ कार्य नहीं करते, लेकिन मध्यभारत क्षेत्र में इसका दोष नहीं लगता है। 15 मार्च तक सभी शुभ कार्य होंगे। 15 मार्च के बाद खरमास के कारण 1 माह तक शुभ कार्य वर्जित रहेंगे।
होलाष्टक का नहीं लगता मध्यभारत में दोष
शहर में 500 से अधिक स्थानों पर होलिका दहन किया जाएगा। शहर के चौक चौराहो, मैदानों, रहवासी कॉलोनियों सहित 600 से अधिक स्थानों पर होलिका दहन किया जाएगा। इस बार पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए कई समितियों की ओर से गोकाष्ठ से होलिका दहन किया जाएगा। शहर में गोकाष्ठ समितियों की ओर से भी होलिका दहन को देखते हुए अतिरिक्त गोकाष्ठ तैयार किया जा रहा है।
Published on:
22 Feb 2023 03:03 pm
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