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हनीट्रैप काण्ड : सरकार ने मांगी जानकारी, किस एनजीओ को कितना दिया काम

- हनी ट्रेप की पुछताछ में जिन मंत्रियों, अफसरों के नाम आए उनके समय संस्थाओं को मिले कामों का लेखाजोखा खंगालने की तैयारी- वित्त विभाग ने सभी विभागों से 11 नवम्बर तक मांगी जानकारी

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भोपाल। हनीटै्रप मामले में एक ओर एसआईटी जांच कर रही है, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार अब हनी ट्रेप गिरोह में शामिल महिलाओं की एनजीओ का लेखा-जोखा खंगालने में जुट गई है। दरअसल, सरकार के पास लगातार गुमनाम शिकायतें आ रही हैं, जिनमें कहा गया है कि पिछले 15 सालों में हनी ट्रेप गिरोह के लोगों की एनजीओ को कई मंत्रियों और अफसरों ने करोड़ों रुपए का फर्जी भुगतान किया गया है।

शिकायत में यह भी कहा गया ह ैकि श्वेता विजय जैन और इनसे जुड़ी एनजीओ ने भाजपा कार्यकाल में सबसे ज्यादा आर्थिक मदद ली है। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए वित्त विभाग ने 23 अक्टूबर को सर्कूलर जारी कर सभी विभागों से 11 नवम्बर तक जानकारी तलब की है।

किस मंत्री-अफसर ने इनकी एनजीओ को दिए काम

वित्त विभाग ने सभी विभागों से फार्मेट में जानकारी मांगी है। इसमें यह देखा जाएगा कि 15 साल में के कार्यकाल में किस एनजीओ को कितना काम दिया गया है। इनमें हनी ट्रैप से संबंधित एनजीओ पर कौन-कौन से मंत्री और अफसरों ने ज्यादा मेहरबानी दिखाई। उस दौरान विभागों में पदस्थ रहे मंत्रियों की भूमिका थी।

मंत्रियों के मिली भगत होने की भी संभावनाएं हैं। इस जांच में भाजपा के 15 साल के कार्यकाल में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा से जुड़े एनजीओ पर की गई मेहरबानी का भी खुलासा होना तय माना जा रहा है। ऐसे में इन संगठनों को मिली आर्थिक मदद का रिकार्ड भी सामने आएगा। गड़बड़ी सामने आने पर जिम्मेदारों पर एक्शन होगा।

मैग्नीफिसेंट एमपी के कारण शांत थी सरकार -
मैग्नीफिसेंट एमपी के पहले हनीटै्रप काण्ड उजागर होने के कारण मध्यप्रदेश की किरकिरी हो रही थी। यह ऐसा समय था जब सरकार निवेश के लिए उद्योगपतियों, निवेशकों को आमंत्रित कर रही थी। उद्योगपतियों, निवेशकों को यह बताने का प्रयास हो रहा था कि निवेश के लिए मध्यप्रदेश सबसे बेहतर राज्य है। लेकिन हनीट्रैप में सरकार के अफसरों और सत्ता से जुड़े अन्य लोगों के नाम सामने आते थे जिम्मेदार भी निरुत्तर हो जाते थे। इसलिए मैग्नीफिसेंट एमपी तक इस मामले को ठण्डे बस्ते में डाल दिया गया। अब मैग्नीफिसेंट एमपी होने के बाद सरकार ने एनजीओ के माध्यम से जिम्मेदारों पर नकेल कसने की तैयारी शुरू की है। वित्त विभाग का सर्कुलर इसी की कड़ी माना जा रहा है।

प्रदेश में 3 लाख से अधिक एनजीओ -
मध्यप्रदेश में 3 लाख से ज्यादा अशासकीय संगठन हैं। ये संगठन अलग-अलग कामों के लिए सरकार के विभिन्न विभागों मेंं पंजीकृत हैं। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक और सामाजिक जागरूकता, महिला एवं बच्चों के लिए कामों में संलग्न संस्थाओं की संख्या अधिक है। अब सरकार एक-एक संगठन का रिकार्ड खंगालने जा रही है। इनमें कई तो ऐसे हैं जो सिर्फ कागजों पर चल रहे हैं और सरकार से लाखों रुपए की रकम ले रहे हैं। अब वित्त विभाग ने सभी का रिकार्ड मंगाया है।

वित्त विभाग ने प्रोफार्मा में मांगी जानकारी -
राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और विभागों के सचिवों को निर्देश के साथ एक प्रोफार्मा भी भेजा है। विभागों से कहा गया है कि वे इसी प्रोफार्मा में जानकारी विभाग को उपलब्ध कराएं। उनसे पूछा गया है कि जिस गैर शासकीय संस्था को अनुदान दिया गया उसका नाम, पता, उसके पंजीयन की जानकारी दी जाए। यह भी पूछा है कि जिस साल उसे अनुदान दिया गया, अनुदान दिए गए वर्ष और किस बजट शीर्षक से अनुदान दिया गया। उपयोगिता प्रमाण मिला या नहीं, इसकी जानकारी और शेष उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं होने का कारण और इस पर टिप्पणी की जानकारी मंागी भी प्रोफार्मा में ही देने को कहा है।

एनजीओ को अनुदान देने में की गई गड़बडिय़ों को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। इसलिए सभी संबंधित विभागों से एनजीओ को दी गई आर्थिक मदद की जानकारी मांगी गई है।

- नीरज कुमार सिंह, संचालक बजट