12 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

घोड़ों में ग्लैंडर्स डिसीज मिलने के बाद है रोक, फिर भी धड़ल्ले से हो रही बुकिंग.. देखें पूरा मामला!

रोक के बाद भी जारी है घुड़सवारी

3 min read
Google source verification
horse

भोपाल। ग्लैंडर्स डिसीज के खौफ के चलते शहर में घोड़ों, गधों व खच्चरों के प्रदर्शन, प्रयोग और परिवहन पर रोक है। इसके बावजूद धड़ल्ले से इनकी बुकिंग हो रही है। शादी ब्याह के सीजन के बीच इसके खतरों से सभी अनजान बन गए हैं। नगर निगम क्षेत्र में करीब 50 स्थानों पर घोड़े पाले जा रहे हैं। इनमें से ज्यादातर आबादी वाले इलाकों में हैं।

घोड़े में ये बीमारी सामने आने के बाद जब मामले की पड़ताल की तो कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए। बैंड पार्टी से लेकर घोड़ा पालने वाले धड़ाधड़ बुकिंग कर रहे है। न तो इस रोग के बारे में बताया जा रहा है और न ही खतरों के संबंध में आगाह किया जा रहा है। पड़ताल के लिए पत्रिका टीम काजी कैंप स्थित रहमान घोड़ा-बग्गी वाले के यहां पहुंची। यहां इस बीमारी का पहला मामला सामने आया था। बाफना कॉलोनी, काजी कैंप स्थित रहमान के अस्तबल में सफेद रंग के एक दर्जन से अधिक घोड़े बंधे हुए थे।

दो घोड़े बाहर भी बंधे थे। यहां मौजूद केयरटेकर से पूछा कि 12 मई को हमारे यहां कार्यक्रम है, घोड़ा मिल जाएगा तो उसने कहा हां, घोड़ा तो मिल जाएगा। रहमान भाई से बात कर लो। पत्रिका टीम केयरटेकर के बताए अनुसार आगे गए उन्होंने बताया कि ग्लैंडर्स के बारे में सनसनी फैलने से उनकी कुछ बुकिंग कैंसिल हो गईं थी। अब स्थिति सामान्य है। बुकिंग की जा रही है।

सीहोर से आ रहे घोड़े

शहर के बाहर घोड़ों के आवागमन पर रोक है। लेकिन शहर में सीहोर से भी इन्हें लाया जा रहा है। इतवारा क्षेत्र के बैंड कारोबारी ने बताया कि सीहोर से बड़ी संख्या में घोड़े बुक किए गए हैं।

निर्देश बेअसर, खुलेआम हो रही है बुकिंग

ग्लैंडर्स डिसीज के चलते एक ओर तो एहतियातन कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर घोड़ों को अब तक घनी आबादी में तक रखे जाने और खुलेआम सार्वजनिक स्थानों पर ले जाने पर रोक नहीं लग पा रही है। धड़ल्ले से बुकिंग हो रही हैं। जबकि इसे खतरनाक बताया जा चुका हैं। इतवारा के श्रीराम बैंड मालिक सुरेश साहू का कहना है कि चार मई से 13 मई तक केवल आठ से 10 मई तक तीन दिन ही घोड़ा-बग्गी की बुकिंग नहीं हुई, बाकी सभी दिनों बुकिंग हुई है। शादी-समारोहों में घोड़ा-बग्गी बुक और इस्तेमाल किए जा रहे हैं। आवागमन पर भी रोक प्रभावी नहीं घोड़ों के शहर के बाहर ले जाने-लाने पर भी नगर आयुक्त की रोक प्रभावी नहीं है। सीहोर से भी कई घोड़े बुक किए जा रहे हैं। सीहोर के एक बड़े घोड़ा-बग्गी व्यापारी से संवाददाता ने फोन पर बात की और 12 मई के लिए एक घोड़ा मांगा तो उसका कहना था कि घोड़ा मिल जाएगा। घोड़े का किराया पूछने पर उसने कार्यक्रम स्थल पूछा। संवाददाता ने कार्यक्रम स्थल नर्मदा मंदिर , तुलसी नगर बताया तो उसने कहा कि भोपाल में न्यू मार्केट के आसपास कार्यक्रम में एक घोड़ा देने के पांच हजार रुपए लगेंगे।

ग्लैंडर्स के हैं ये लक्षण

राज्य पशु चिकित्सालय की अतिरिक्त उप संचालक डॉ. ज्योति जैन बताती हैं कि ग्लैंडर्स डिसीज एक जूनोटिक बीमारी है, जो पशुओं से पशुओं और मनुष्यों में फैलती है। यह घोड़ों के श्वसनतंत्र की बीमारी है। इसमें तेज बुखार, नाक से डिस्चार्ज, म्यूकस मेम्ब्रेन में छाले होना, फेफड़ों में इन्फेक्शन होना आदि लक्षण होते हैं। इसमें घोड़े की मृत्यु हो जाती है। घोड़ों की संास, लार आदि के संपर्क में आने से मनुष्य को भी यह बीमारी हो जाती है। मनुष्य में भी तेज बुखार, नाक से डिस्चार्ज, स्किन प्रॉब्लम आदि लक्षण दिखाई देते हैं।

काजी कैम्प में एक घोड़ा ग्लैंडर्स पॉजिटिव पाया गया था। अलग-अलग टीमें शहर में घोड़ों के ब्लड सैंपल ले रही हैं। कलेक्शन पूरे होने के बाद जांच के लिए हरियाणा स्थित लैब भेजे जाएंगे। घोड़ों को लाने-ले जाने पर जो प्रतिबंध हैं, वे आगामी आदेश तक प्रभावी रहेंगे।
-डॉ. जयंत कापसे, प्रभारी वेटनरी अफसर-ग्लैंडर्स

घोड़ों को नगर निगम सीमा से बाहर करने की कोई बात नहीं है। एक घोड़ा ग्लैंडर्स डिसीज से पॉजिटिव पाया गया था, जांच करने पहुंचे तो पालक ने बताया कि घोड़े को वापस यूपी भेज दिया है। इस बाबत प्रशासन को सूचित कर दिया गया था।
- डॉ. एसके श्रीवास्तव, वेटनरी अफसर, ननि