
ayushman yojana
Bhopal- ‘आयुष्मान’ योजना के लालच में कई निजी अस्पताल इलाज के नाम पर मरीजों के साथ सरासर धोखा कर रहे हैं। एक ऐसे ही मामले की हकीकत तब सामने आई जब सीएम से शिकायत के बाद मप्र मेडिकल काउंसिल ने विदिशा के मरीज की सुनवाई कर कार्रवाई की। विदिशा के विवेक यादव को निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने ‘आयुष्मान’ योजना में इलाज के लालच में विकलांग बना दिया। आधार अस्पताल ऑर्थोपेडिक और ट्रॉमा ने मान्यता न होने के बाद भी आयुष्मान में मरीज को भर्ती किया। दूसरी बीमारी के नाम पर इलाज कर दिया। फ्री इलाज के बजाय सीटी स्कैन के 4500 रुपए भी लिए। इलाज सिर्फ चेहरे का किया, कूल्हे के फ्रैक्चर का समय पर इलाज न करने से मरीज का कूल्हा ही खराब हो गया।
सीएम से शिकायत के बाद मप्र मेडिकल काउंसिल ने जांच की तो अस्पताल के दो डिस्चार्ज कार्ड पकड़े गए। काउंसिल ने डॉक्टर को चेतावनी दी कि आगे आयुष्मान की तय प्रक्रिया से ही इलाज करें। विवेक ने करोंद बायपास स्थित आधार
हॉस्पिटल के डॉ. रंजन पाराशर की शिकायत सीएम डॉ. मोहन यादव से की थी।
विवेक यादव ने कहा, आधार हॉस्पिटल के इलाज से आराम नहीं मिला तो भोपाल एम्स में दिखाया। डॉक्टरों ने कहा, मुंह की सर्जरी ठीक से नहीं हुई। कूल्हे में भी फ्रैक्चर है। यदि आपका इलाज उसी समय हो जाता तो कूल्हा ठीक हो जाता।
कृत्रिम कूल्हा लगवाने की जरूरत नहीं होती। अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों की लापरवाही से मैं 40 प्रतिशत विकलांग की श्रेणी में पहुंच गया हूं।
काउंसिल को डॉ. पाराशर ने कहा, मैं एमबीबीएस-एमडी फॉरेंसिक मेडिसिन हूं। मरीज के मुंह, पैर में चोट थी। एक्सरे, सीटी स्कैन किया। ऑर्थोपेडिक व सर्जन की सलाह पर परिजनों की सहमति से सर्जरी की। हड्डी विशेषज्ञ ने सीटी स्कैन ऑफ पेल्विस की सलाह दी, उन्होंने मना कर दिया।
काउंसिल की इथिक्स कम डिसिप्लिनरी कमेटी ने शिकायतकर्ता की सुनवाई व इलाज संबंधी रिकॉर्ड जांचें। पाया-हॉस्पिटल ने दो डिस्चार्ज कार्ड जारी किए। कमेटी ने डॉ. रंजन पाराशर के बयान लिए। दो डिस्चार्ज कार्ड पर डॉ. पाराशर बोले-एक्सीडेंट के 24 घंटे बाद मरीज आया। वह सेप्सिस में था। इसलिए सीवियर सेप्सिस का डायग्नोसिस डिस्चार्ज कार्ड पर लिया।
अस्पताल का ऑर्थोपेडिक एवं ट्रॉमा का कोड ‘आयुष्मान’ में नहीं था। मरीज पहचान के जरिए आया, उसकी माली हालत ठीक नहीं थी, आयुष्मान के तहत सीवियर सेप्सिस का इलाज किया। कमेटी ने कहा, 24 घंटे में कोई मरीज सीवियर सेप्सिस में नहीं आता। कमेटी ने लिखा-अस्पताल ने ‘आयुष्मान’ से इलाज करने के लिए सीवियर सेप्सिस का डायग्नोसिस डिस्चार्ज समरी में लिखा। डॉक्टर को चेतावनी देने की अनुशंसा की।
Published on:
24 Mar 2026 07:37 am
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