
भोपाल। मध्यप्रदेश में ट्रेन में ब्लास्ट, पाकिस्तानी जासूसी एजेंसी का नेटवर्क, आईएस और सिमी के आतंकियों की गतिविधियों के बीच मध्यप्रदेश में सुरक्षा एक चुनौती बनती जा रही है। यह लोग मध्यप्रदेश में धार्मिक उत्सवों के दौरान बड़ी वारदात को अंजाम दे सकते हैं। इसके अलावा नवरात्र जैसे उत्सव में भगदड़ की घटनाओं से भी इनकार नहीं किया जा सकता है, ऐसे में सरकार और श्रद्धालुओं को सतर्क रहने की बेहद जरूरत है।
नवरात्र के मेले में रहे सतर्क
नवरात्र के चलते शक्तिपीठ, देवी पंडालों में हजारों श्रद्धालु उमड़ते हैं, ऐसे में सरकार को भीड़ प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम करना करना भी चुनौती बन गया है। पिछले अनुभव बताते हैं जरा-सी लापरवाही के कारण भगदड़ की लगातार घटनाएं हो रही हैं। MP में सिमी, isis आतंकी और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी की हरकतें उजागर होने के बाद यहां की सरकार को बेहद चौकन्ना रहना होगा।
MP में पिछले दो सालों में हुए हादसों पर एक नजर ।
सतनाः 25 अगस्त 2014
कामतानाथ मंदिर में भगदड़, 10 लोगों की मौत
चित्रकूट में है कामतानाथ मंदिर। यहां श्रावण में उमड़ी भीड़ में कोहराम मच गया था। इस हादसे में 10 लोग मारे गए और 60 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस हादसे में मारे गए लोगों में ज्यादातर महिलाएं थीं। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा तो दिया, लेकिन भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम नहीं किए जाते।
दतिया: 13 अक्टूबर 2013
MP के रतनगढ़ माता मंदिर में 115 लोगों की मौत
मध्यप्रदेश में दतिया जिले में है रतनगढ़ माता मंदिर। रविवार का दिन था, इसलिए भी भीड़ ज्यादा थी। यहां भी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए खास इंतजाम नहीं थे, इसलिए यह दिन त्रासदी भरा साबित हुआ। यहां एक पुल से गुजरने के दौरान अफवाह उड़ी फिर भगदड़ मची। लोग बहती सिंध नदी में ही कूदने लगे, इसके सात ही 115 लोगों की लाशें पुल पर बिछ गई। मरने वालों में ज्यादातर बच्चे और महिलाएं ही थे। बताते हैं कि उस पर बड़ी संख्या में ट्रैक्टरों के पहुंचने से जाम लग गया और भीड़ बेकाबू हो गई थी। साथ ही भीड़ को हटाने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग कर दिया था। इस भयावह हादसे के दौरान भी भीड़ प्रबंधन के इंतजाम नहीं थे।
सीहोर: 20 अक्टूबर 2012
सलकनपुर में मची भगदड़, 3 मरे, 35 घायल
सीहोर जिले की रेहटी तहसील में है सलकनपुर। यहां विजयासन देवीधाम पर नवरात्र में श्रद्धा का मेला लगता है। भोपाल से 70 किमी दूर स्थित यह स्थान देश की 32 शक्ति पीठों में से एक माना जाता है। नवरात्र के दौरान तो यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है। उस दिन भी नवरात्र का पहला दिन था। सीढियों पर भीड़ बढ़ गई थी। अचानक भगदड मची और एक बालिका सहित तीन महिलाओं की दबकर मौत हो गई और सीढ़ियों से गिरने और दबने से 35 श्रद्धालु घायल हो गए। रोप-वे बंद हने के कारण पूरी भीड़ सीढ़ियों पर जमा हो गई थी। नतीजतन भगदड़ की घटना हो गई। यहां भी प्रशासन भीड़ को नियंत्रित नहीं कर पाया।
रतलाम, 14 जनवरी 2012
चेहल्लूम के मौके पर भगदड़, 12 की मौत
यह स्थान भी रतलाम के जावरा में है। यहां चेहल्लूम के मौके पर अंगारों पर चलने के लिए बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग पहुंचते हैं। उस दिन भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे और लाइन में अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ मची और कुछ देर में भक्ति का माहौल मातम में बदल गया। यहां हुई भगदड़ में 12 लोगों की लाशें बिछ चुकी थीं।
ओंकारेश्वर: 19 जुलाई 1993
21 साल से जांच का अता-पता नहीं
यह स्थान मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में है। 12 ज्योतिर्लिंगों में से चतुर्थ स्थान पर है ओंकारेश्वर महादेव। इस दिन सोमवती अमावस्या थी और हजारों श्रद्धालु नर्मदा स्नान कर रहे थे, वहीं हजारों लोग भोलेनाथ के दर्शन करने के लिए भी कतार में लगे थे। इस बीच झूला पुल पर करंट फैलने की अफवाह उड़ गई। लोग घबरा कर इधर-उधर भागने लगे। देखते ही देखते यहां 20 लोगों की लाशें बिछ गई। हालांकि प्रशासन ने 6 महिलाओं के मारे जाने और 28 श्रद्धालुओं के घायल होने की बात बताई थी। तत्कालीन राज्यपाल डॉ. मोहम्मद शफी कुरैशी (उस समय प्रदेश में राष्ट्रपति शासन था) की ओर से योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के प्रमुख सचिव केएस शर्मा को 15 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा था। आज 23 वर्ष बाद भी किसी को नहीं पता कि उस जांच का क्या हुआ।
भारत में ही होती है भगदड़ की घटनाएं, जरूरी है भीड़ प्रबंधन
भीड़ प्रबंधन का अध्ययन कर रहे एक अंतरराट्रीय विशेषज्ञ का मानना है कि भारत में भीड़ और भीड़भाड़ वाली जगहों के प्रति लोगों का उच्च सहनशील होना ही इन घटनाओं को बढ़ावा देता है।
एक अध्ययन के मुताबिक जब तक किसी समारोह में लोग एक जगह ठसाठस भर न जाए, तब तक लोग असहज महसूस नहीं करते हैं। फिर लोग हड़बड़ा कर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं। इसी हड़बड़ी में अफवाह फैलती है, जिसके बाद भगदड़ जैसी घटनाएं हो जाती हैं। रत में लगभग हर साल भगदड़ की घटनाएं होती हैं। विशेषज्ञों का भी मानना है कि इसके पीछे भीड़ प्रबंधन की कमी है।
सिंहस्थ ने पेश किया था अच्छा उदाहरण
मध्यप्रदेश के उज्जैन में पिछले साल संपन्न हुए सिंहस्थ में यह अच्छा बात रही की यहां भगदड़ की एक भी घटना नहीं हुई। यहां प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन की अच्छी व्यवस्था की थी। यहां भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग मार्गों से गुजारा जाता था। इसलिए भीड़ एक जगह एकत्र नहीं हो पाती थी। खासबात यह रही कि सिंहस्थ में ज्यादातर मार्गों को वन-वे ही रखा गया था। 24 घंटे प्रशासन की कई टीमों ने मेहनत करके भीड़ प्रबंधन का अच्छा उदाहरण दिया था।
Published on:
20 Sept 2017 05:01 pm
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