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अवैध कॉलोनी बनाई तो मिलेगा ’15 दिन’ का नोटिस, भोपाल में जमीन पर होगा कब्जा

Illegal colonies: ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि बेचने की प्रवृत्ति पर भी रोक लगाने की तैयारी है। टीएंडसीपी से ले-आउट स्वीकृति और भूमि डायवर्जन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्लॉटों की बिक्री की जा सकेगी।

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unauthorized colonies Digital records:

unauthorized colonies Digital records: प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source - Patrika)

unauthorized colonies Digital records: मध्यप्रदेश में अवैध कॉलोनियों के बढ़ते विकास पर रोक लगाने और भूखंड खरीदारों को पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग बड़ा कदम उठाने जा रहा है। विभाग द्वारा तैयार किए जा रहे संशोधित विधेयक के मसौदे में कॉलोनियों का संपूर्ण डिजिटल रिकॉर्ड रखने, विभिन्न विभागों के ऑनलाइन पोर्टलों को आपस में जोड़ने और अवैध कॉलोनाइजरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के प्रावधान किए गए हैं।

प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने के बाद कोई भी व्यक्ति मकान या प्लॉट खरीदने से पहले ऑनलाइन यह जांच सकेगा कि संबंधित कॉलोनी वैध है या नहीं। विभाग ड्राफ्ट को विभागीय मंत्री के समक्ष प्रस्तुत कर चुका है। उनके सुझावों के आधार पर संशोधन किए जा रहे हैं। इसके बाद प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और मानसून सत्र में विधानसभा में पेश करने की तैयारी है।

नए प्रावधानों के तहत कॉलोनियों से संबंधित पोर्टल को 'संपदा-2' और भूमि अभिलेख प्रणाली से जोड़ा जाएगा। इससे कॉलोनी की स्वीकृतियां, ले-आउट, नक्शे, विकास कार्यों की स्थिति और भूमि का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा। रजिस्ट्री के दौरान दस्तावेजों का डिजिटल सत्यापन संभव होगा, इससे फर्जी दस्तावेजों और जमीन संबंधी विवादों पर अंकुश लग सकेगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि बेचने की प्रवृत्ति पर भी रोक लगाने की तैयारी है। प्रस्ताव के अनुसार टीएंडसीपी से ले-आउट स्वीकृति और भूमि डायवर्जन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्लॉटों की बिक्री की जा सकेगी। बिना अनुमति कॉलोनी विकसित करने पर संबंधित निकाय 15 दिन का नोटिस जारी करेगा। निर्धारित अवधि में सुधार नहीं होने पर निकाय कॉलोनी को हटाने के साथ जमीन को अपने कब्जे में ले सकेगा।

नए नियमों में यह भी प्रावधान

-अभी अवैध कॉलोनियां बनाने वालों को न्यूनतम तीन और अधिकतम 10 साल की सजा का प्रावधान है। नए नियमों में इसे बढ़ाकर न्यूनतम साल साल और अधिकतम 10 साल की सजा किया जा रहा है।

-अवैध कॉलोनी को नगरीय निकाय 15 दिन के अंदर जमीन को मूल स्वरूप में लाने का नोटिस देगा। यदि कॉलोनाइजर ऐसा नहीं करता है तो निकाय अवैध कॉलोनी को ढहाने के साथ जमीन अपने कब्जे में ले लेगा। इसके बाद निकाय वहां विकास कार्य कराएगा।

-अवैध कॉलोनियों का विकास रोकने जिला कलेक्टर एक टास्क फोर्स बनाएंगे। यह हर सप्ताह क्षेत्र का निरीक्षण कर रिपोर्ट देगा।

-अवैध कॉलोनियों के खिलाफ हर कार्रवाई के लिए समय तय किया जा रह है। यदि संबंधित अधिकारी कार्रवाई नहीं करते तो शासन उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकेगा।

जनप्रतिनिधियों से लेकर अफसरों तक की जिम्मेदारी तय

संशोधित नियम शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में एक समान तरीके से लागू कराने के लिए जिले में कलेक्टर को नोडल अधिकारी बनाया जाएगा। संशोधित बिल में पार्षद और सरपंच की जिम्मेवारी तय की है कि यदि उन्हें अवैध कॉलोनी की शिकायत मिलती है तो तत्काल संबंधित निकाय अधिकारी को सूचना देना होगी। अधिकारी को सूचना मिलने के 15 दिन के अंदर एफआइआर दर्ज दर्ज करानी होगी। पुलिस को भी एफआइआर दर्ज करना होगी। जिला प्रशासन को कॉलोनी हटाने में मदद करेगा। कॉलोनाइजर 15 दिन में अतिक्रमण नहीं हटाता है तो जमीन कब्जे में लेकर प्रशासन जुर्माना करेगा। अवैध कॉलोनी बनने पर पटवारी और वार्ड प्रभारी को जिम्मेदार माना जाएगा।

इससे होंगे ये लाभ

-खरीदार ऑनलाइन कॉलोनी की वैधता और स्वीकृतियां जांच सकेंगे। साथ ही फर्जी प्लॉटिंग और जमीन संबंधी धोखाधड़ी में कमी आएगी।

-संपदा-2 और लैंड रिकॉर्ड से जुड़ाव के कारण रजिस्ट्री प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि की अवैध प्लॉटिंग पर रोक लगेगी।

-सड़क, पानी, बिजली और सीवेज जैसी सुविधाओं की जवाबदेही तय होगी। इससे अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई और निगरानी संभव होगी।

-जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और प्रशासन की जवाबदेही बढ़ेगी। भूमि विवादों और लंबी कानूनी प्रक्रियाओं में कमी आने की संभावना रहेगी