
india china war
India China Border Tension: भारत में पुरातनकाल से ही धार्मिक रीति-रिवाज और तंत्र साधनाओं का विशेष महत्व रहा है। हजारों सालों से धन, सुख और वैभव की प्राप्ति के लिए या लड़ाई-झगड़े, कोर्ट कचहरी के मसले भी सुलझाने के लिए तांत्रिक अनुष्ठान किए जाते रहे हैं। यही कारण है कि त्रैतायुग में रावण के पुत्र, द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण या कलियुग में भारत सरकार ने भी मुसीबतों को टालने के लिए तंत्र-मंत्र और धार्मिक अनुष्ठान का सहारा लिया था।
ऐसा ही एक दिलचस्प किस्सा 1962 में भारत-चीन युद्ध ( india china war in 1962 ) के वक्त का भी है, जब देश के प्रधानमंत्री रहते हुए पं. जवाहरलाल नेहरू ( 1st Prime Minister of India ) ने भी युद्ध को टालने के लिए हवन-यज्ञ करवाया था। यह हवन यज्ञ मध्यप्रदेश के दतिया में हुआ था।
1962 में जब चाइना ( china ) ने हिन्दुस्तान पर आक्रमण कर दिया था, उस समय प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ( prime minister jawaharlal nehru ) ने पूजा पाठ की इच्छा जाहिर की। तो दतिया जिले के पीताम्बरा पीठ ( pitambara peeth ) के महाराज ने ही उन्हें यज्ञ करवाने की बात कही। इसके बाद शक्तिपीठ में 51 कुंडीय यज्ञ किया गया। लगातार यज्ञ चलता रहा। अंतिम दिन जैसे ही पूर्णाहूति हुई, उसी समय नेहरूजी का संदेश आया कि चीन ने युद्ध रोक दिया है। मध्य प्रदेश के दतिया जिले के मां पीतांबरा पीठ में आज भी वो यज्ञ शाला मौजूद हैं, जहां पूर्णाहूति दी गई थी। इसी के बाद से बड़ी-बड़ी हस्तियों ने यहां तंत्र पूजा करवाना शुरू कर दिया। पंडित नेहरू के बाद इंदिरा गांधी से लेकर कई प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति जैसी हस्तियों की आस्था इस मंदिर से जुड़ गई।
दतिया के पीताम्बरा पीठ परिसर में ही धूमावती मंदिर है। मान्यता है कि मां धूमावती की साधना करने वाले को दुश्मन नष्ट हो जाते हैं। लड़ाई-झगड़े, कोर्ट कचहरी में विजय के लिए मां धूमावती की साधना की जाती है। माना जाता है कि बगलामुखी के साथ ही धूमावती की साधना से शत्रु मिट जाते हैं, इसलिए दतिया के पीताम्बरा पीठ में मां बगलामुखी के साथ ही मां धूमावती की भी स्थापना की गई है जो दुनिया में अपने आप में अकेला स्थान है।
मध्यप्रदेश के शाजापुर के नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी शक्तिपीठ में भी लोगों की गहरी आस्था है। यहां हर साल नवरात्र में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रहती है। तंत्र साधना करने वाले यहां धुनी जमाए रहते हैं। माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर इस मंदिर की स्थापना युधिष्ठिर ने की थी। उसके बाद सभी पांडवों ने यहां तंत्र अनुष्ठान किया था। इसके बाद ही उन्हें महाभारत के युद्ध में विजय मिली।
मां दुर्गा का एक रूप महाकाली भी है, जिसे संहार करने वाली देवी कहा जाता है। मान्यता है कि देवी काली को संकटनाश, सुरक्षा, विघ्ननिवारण, शत्रु संहारक के साथ ही सुरक्षा करने वाली देवी भी कहा जाता है। महाकाली की आराधना करने वाले साधकों को शत्रुओं पर विजय मिलती है।
Updated on:
22 Apr 2024 10:30 am
Published on:
17 Jun 2020 02:28 pm
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