
मध्य भारत का मुख्य बांध
भोपाल. धार जिले के कोठीदा में कारम नदी पर बना बांध चर्चा में है. इस निर्माणाधीन बांध से लगातार पानी के रिसाव से टूटने का खतरा बन गया था. 42 घंटे लगातार खोदाई कर बनाई चैनल से पानी की निकासी शुरू कर बांध के टूटने की आशंका से राहत मिल गई है लेकिन इस घटना ने प्रदेश के बांधों की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा दिया है। हालांकि प्रदेश में एक ऐसा बांध भी है जो करीब दो दशकों से सुरक्षित खड़ा है और लाखों लोगों के जीवन का आधार भी बना हुआ है. मध्यप्रदेश में नर्मदा नदी पर बना यह बांध इंदिरा सागर बांध के नाम से जाना जाता है. इस बांध की नींव पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रखी थी. यह मध्य भारत का सबसे बड़ा बांध भी है.
इंदिरा सागर बांध खंडवा जिले की पुनासा तहसील में है. राज्य के विकास में इस बांध की बहुत अहम भूमिका है. इस बांध के पानी से खंडवा के साथ ही समीप के खरगोन, देवास, धार और बड़वानी जिलों में लाखों हेक्टेयर में सिंचाई की जाती है. इस बांध के कारण ही इलाके के लाखों किसानों के जीवन में खुशहाली आई है. बांध बनने के बाद से यहां के किसानों की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव हुआ है. किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने के साथ ही यहां करीब 1100 मेगावाट बिजली का उत्पादन भी होता है.
इंदिरा सागर बांध नर्मदा नदी के पानी को नियंत्रित करता है. यहां से छोड़ा गया पानी आगे बने ओंकारेश्वर बांध में जाता है और उसके बाद गुजरात के सरदार सरोवर बांध में पहुंच जाता है. इस बांध का निर्माण मध्यप्रदेश राज्य सरकार और एनएचपीसी के ज्वाइंट वेंचर से बनी कंपनी नर्मदा हाइड्रो इलेक्ट्रिक डेवलेपमेंट कारपोरेशन ने किया था. इस बांध के निर्माण में उस समय 4355 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे. इंदिरा सागर बांध देश के सबसे बड़े जलाशयों में से एक है. बांध के जलाशय में 914 वर्ग किलोमीटर पानी भराव का क्षेत्र है. इस बांध की क्षमता 127220 घन किलोमीटर है वहीं बांध का कैचमेंट एरिया 61642 वर्ग किलोमीटर का है. इस बांध की ऊंचाई 92 मीटर और लंबाई 653 मीटर है.
Published on:
14 Aug 2022 06:38 pm
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