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Video: कोई हमें अनाथ आश्रम बता दो, भोपाल में अनाथ आश्रम ढूंढ रहे थे मासूम

हमारे माता-पिता की मौत हो गई है। बुआ और फूफाजी घर का पूरा काम कराते हैं। काम नहीं करने पर हमें मारते पीटते हैं। कोई हमें अनाथ आश्रम बता दो

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भोपाल@बज्रेश शर्मा की रिपोर्ट...

कोई हमें अनाथ आश्रम बता दो... माता-पिता की मौत के बाद परिजनों ने किया प्रताडि़त घर छोड़कर भोपाल में अनाथ आश्रम ढूंढते रहे मासूम स्थानीय रहवासियों ने पुलिस को सौंपा संत हिरदाराम नगर हमारे माता-पिता की मौत हो गई है।

बुआ और फूफाजी घर का पूरा काम कराते हैं। काम नहीं करने पर हमें मारते पीटते हैं। कोई हमें अनाथ आश्रम बता दो ताकि हम वहां जाकर रहें और खाना मिल जाए। यह गुहार लगाते हुए गुरूवार दोपहर 4 बजे दो बच्चे गांधीनगर के आसाराम चौराहे पर घूम रहे थे।

घूमते-घूमते दोनों बच्चे आसाराम आश्रम के मेन गेट पर पहुंच गये। जहां मौजूद स्थानीय लोगों को आपबीती बताई। दोनों सगे भाइयों का दर्द सुनकर स्थानीय लोगों की आंखें नम हो गई और डायल 100 को बुलाकर दोनों बच्चों को पुलिस के हवाले कर दिया गया।

दरअसल गुरूवार सुबह मूल रूप से बिलकिसगंज केे पास झागरिया गांव के रहने वाले दोनों सगे भाई विशाल (14) और विवेक (11) किसी से लिफ्ट लेकर भोपाल के गांधीनगर इलाके में पहुंच गए। यहां दोनों भाई अनाथ आश्रम ढूंढ रहे थे। जब स्थानीय लोगों ने इनसे अनाथ आश्रम ढूंढने की वजह पूछी तो उन्होंने पूरी बात बताई।

बड़े भाई विशाल ने बताया कि वह बिलकिसगंज में रहते हैं। वर्ष 2014 में बीमारी से उनके माता-पिता की मौत हो गई थी। माता-पिता की मौत के बाद उनके बुआ और फूफा के साथ रह रहे थे। बुआ और फूफा घर का पूरा काम कराते थे और खाना मांगने पर मारते थे।

उनके अत्याचार से तंग आकर दोनों भाइयों ने घर छोडऩे का मन बना लिया। टीवी में उन्होंने बच्चों के लिए अनाथ आश्रम देखा था जिसे देखकर दोनों भोपाल में अनाथ आश्रम ढूंढ़ते पहुंच गए।

दिनभर से कुछ खाने पीने को नहीं मिला। स्थानीय लोगों ने बच्चों की बात सुनकर उन्हें डायल 100 को सौंप दिया। पुलिसकर्मियों ने दोनों बच्चों को पानी पिलाया और आइसक्रीम खिलाई जिससे उनके चेहरे पर खुशी नजर आई। बाद में डायल 100 द्वारा उन्हें निशातपुरा थाने ले जाया गया।

बुआ-फूफा का नाम तक नहीं बता सके बच्चों को सिर्फ इतना मालूम था कि वह बिलकिसगंज के रहने वाले हैं। बुआ-फूफा से इतने डरे हुए थे कि उनका नाम भी नहीं बता पा रहे थे।

विशाल का छोटा भाई विवेक सिर्फ इतना कह पा रहा था कि मां मर गई। बुआ मारती है हमें अनाथ आश्रम जाना है। पढ़ाई नहीं करने दी विशाल ने बताया कि उनके माता-पिता की मौत के बाद से ही बुआ-फूफा मारपीट करते हैं। पढ़ाई भी नहीं करने दे रहे हैं। अनाथ आश्रम में रहेंगे तो पढ़ाई कर सकेंगे और काम भी नहीं करना पड़ेगा।

विशाल एवं विवेक दोनों सगे भाई हैं। मूल रूप से बिलकिसगंज केे पास झागरिया गांव के रहने वाले बता रहे हैं। फिलहाल बच्चों को चाइल्ड लाइन को सौंप दिया गया है।
- लोकेश कुमार सिन्हा, सीएसपी निशातपुरा