
ijtima in bhopal 2024: दुनिया के सबसे बड़े आयोजनों में शामिल भोपाल का इज्तिमा 29 नवंबर से शुरू हो रहा है। करीब एक दर्जन लोगों ने जिस इज्तिमा को शुरू किया था, उस इज्तिमे में अब लाखों लोग शिरकत करते हैं। इस बार भी 14 लाख लोगों के पहुंचने का अनुमान है।
भोपाल के ईंटखेड़ी क्षेत्र में 29 नवंबर से इज्तिमे का आयोजन होने वाला है। इस आयोजन के लिए प्रशासन ने भी तैयारी तेज कर दी है। आयोजन स्थल का दायरा इस बार और बढ़ा दिया गया है। वालिंटियर, खानपान, जमातियों के ठहरने के इंतजाम और साफ-सफाई की व्यवस्था भी इस बार बढ़ा दी गई है। यह आयोजन 2 दिसंबर तक चलेगा। इस आयोजन में देश-विदेश से लाखों की संख्या में लोग पहुंचते हैं। इस बार 14 लाख लोगों के आने के अनुमान को देखते हुए तैयारी की जा रही है।
बाहरी जमातों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है। आयोजन इतना बढ़ा होता है कि 15 दिन पहले से ही जमाते आना शुरू हो जाती है। शनिवार को भी बड़ी संख्या में लोग ट्रेन और फ्लाइट से भोपाल पहुंचे।
कोरोना के बाद से अब तक हुए इज्तिमा के आयोजन में जमातों को सीमित संख्या में ही बुलाया जा रहा था, लेकिन इस बार कोरोना का असर पूरी तरह से खत्म हो चुका है। यही कारण है कि इस बार देशी ही नहीं विदेशों से भी जमातें पहुंच रही हैं। करोना के बाद 10 प्रतिशत संख्या सीमित कर दी गई थी। सिर्फ मध्यप्रदेश के लोगों को ही बुलाया जा रहा था, लेकिन इस बार बंदिश पूरी तरह से खत्म कर दी गई है। ऐसे में दूसरे देशों से भी जमातें आने वाली हैं। आयोजन में शामिल होने वाले 70 फीसदी लोग तकरीरें सुनने आते हैं, जो जमाती नहीं होते हैं। इसके अलावा भोपाल और आसपास से भी बड़ी संख्या में लोग वालिंटियर बनकर लोगों की मदद करते हैं।
बोपाल में हो रहा यह इज्तिमा 77वां आलमी तब्लीगी इज्तिमा है। यह ईंटखेड़ी स्थित घासीपुरा में हो रहा है। यह स्थान भोपाल से 14 किलोमीटर दूर है। 29 नवंबर से शुरू होने वाले इज्तिमे का समापन2 दिसंबर को सामूहिक दुआ के साथ होगा। इज्तिमे के दौरान सामूहिक निकाह भी होंगे।
भोपाल में लगने वाला दुनिया का सबसे बड़ा इज्तिमा माना जाता है। इसकी शुरुआत 1947 को हुई थी। मस्जिद शकूल खां में यह पहली बार शुरू हुआ था। उस समय केवल 12 से 14 लोग ही थे। बाद में 1971 में इसका विस्तार होता गया और यह ताजुल मसाजिद में होने लगा। धीरे-धीरे देश-दुनिया से आने वालों की संख्या बढ़ने लगी और यह स्थान भी छोटा पड़ गया और इसे ताजुल मसाजिद से शिफ्ट करके 2015 में बैरसिया रोड स्थित ईंटखेड़ी के पास घासीपुरा में शिफ्ट कर दिया गया। दुनिया में सिर्फ तीन ही देश ऐसे हैं जहां इज्तिमा का आयोजन होता है। पहला भारत है, दूसरा पाकिस्तान है और तीसरा देश बांग्लादेश है।
Updated on:
16 Nov 2024 05:13 pm
Published on:
16 Nov 2024 05:12 pm
बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
