
ट्रेन के इंतजार में यात्रियों का खत्म न हो जाए सफर
भोपाल. भोपाल रेलवे स्टेशन का विकास तेजी से हो रहा है, लेकिन मुसाफिरों के प्रतीक्षालय पर नजर डाले तो 25 प्रतिशत यात्री ही फ्लेटफार्म और जर्नल वेङ्क्षटग हॉल में नजर आते हैं। 75 प्रतिशत तो बाहर खुले में असुरक्षित रात काटते हैं। रात 12 से 1 बजे दोनों प्लेटफार्म के परिसर में देखा तो पीएम के आगमन को लेकर पुलिस आधी रात को भी तैनात थी, लेकिन सडक़, पाथवे व टिकट काउंटर की रैलिंग के अंदर तक सोते मुसाफिरों की सुरक्षा की किसी को परवाह नहीं थी।
एक नम्बर प्लेटफार्म के बाहर सवारी लेकर आते वाहनों के लिए बनी सडक़ पर एक हजार से अधिक मुसाफिर खुले में सो रहे थे। तेजी से आ जा रहे वाहन जरा सा बहक जाएं तो लाइन से लेटे लोग दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं। लोगों का कहना है कि हादसे तो रोजाना होते हैं, चोरी, लूट की घटनाएं भी होती हैं, पर जब तक बड़ा हादसा नहीं होता मामला सामने नहीं आता। हम लोग इसलिए विरोध नहीं करते क्योंकि हमें यहां धंधा करना है।
क्या है सच
भोपाल रेलवे स्टेशन पर रोजाना करीब 75 ट्रेनें आती हैं। यहां से रोजाना आवागमन करने वाले यत्रियों की संख्या करीब 20000 तक होती है।
एसी और स्लीपर प्रतीक्षालय की क्षमता करीब 200 यात्रियों के हिसाब से स्टेशन के दोनों ओर के आसपास कोई रैन बसेरा नहीं है।
छह नम्बर प्लेटफार्म से रैन बसेरा आधा किलोमीटर दूर नादरा बस स्टैंड और एक किलोमीटर दूर सुल्तानिया अस्पताल के सामने ही है।
जनरल वेटिंग में नहीं बची सोने की जगह
एक नम्बर प्लेटफार्म के टिकट काउंटर और वेटिंग परिसर आधी रात को भी यात्रियों से भरा हुआ था। कुछ लोग इसमें भी सो रहे थे। अधिकांश लोगों के पास सोने की जगह ही नहीं थी। 300 से अधिक यात्री यहां बैठे हुए थे। मुसाफिरों का कहना है कि मौसम के चलते गाडिय़ां समय पर नहीं आने के कारण यहां इंतजार करना पड़ रहा है। गाड़ी आने का सूचना मिलते रहने से यहां से रैन बसेरा, लॉज में नहीं जाते हंै। रात में वेटिंग करना अखर जाता है। सामान और परिवार को छोडकऱ जा भी नहीं सकते। एक नम्बर से छह नम्बर को ओर जाने वाले ओवर ब्रिज के पाथवे तक पर लोग सो रहे थे।
बाहर के यात्री कैसे करें एक्सीडेंट का विरोध
प्लेटफार्म एक ओला कार लेकर खड़े ड्राइवर व नुक्कड़ पर जनरल स्टोर की दुकान चलाने वाले दुकानदार ने बताया कि अभी सुरक्षा व्यवस्था के चलते पुलिस रात में भी प्लेटफार्म से लेकर परिसर तक नजर आ रही है। अन्य दिनों में लोग सडक़ घेरकर सोनेे को मजबूर रहते हंै। दो-तीन दिन में एक दो लोग कार चढऩे से घायल होते रहते हैं।
मामला रेलवे पुलिस तक आकर रुक जाता है। पीडि़त मुसाफिर विरोध करने की स्थिति में नहीं रहता है। रेलवे पुलिस से हादसे की शिकायत करने तक कोई नहीं जाता है। हमें धंधा करना है, पुलिस से बुराई लेंगे तो यहां खड़ा होना मुश्किल हो जाएगा।
हबीबगंज रेलवे स्टेशन की तरह भोपाल रेलवे स्टेशन के बाहर के हिस्से का विकास कार्य चल रहा है। टिकट काउंटर व जर्नल वेटिंग की जगह का हॉल भी बड़ा होगा। स्टेशन पर चौबीस घंटे सुरक्षा व्यवस्था रहती है। सीसीटीवी कैमरों से भी यहां नजर रखी जाती है।
- आई ए सिद्दीकी, प्रवक्ता रेलवे भोपाल
Published on:
05 Nov 2018 03:03 am
