
भोपाल। जेपी ग्रुप को कर्ज से उबरने के लिए कोयले के इंड यूज के छह प्लांट बेचना भारी पड़ गया है। अनुमति नहीं लेने पर कोयला मंत्रालय ने मंडला की एक और कोयला खदान का अनुबंध निरस्त करने का नोटिस भेजा है। जेपी ग्रुप पर एक सप्ताह के भीतर यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है।
कोयला मंत्रालय ने कोयला खनन, विकास और उत्पादन करार (सीएमडीपीए) के उल्लंघन का दोषी माना है।
नोटिस में कहा है कि मंडला नार्थ और साउथ की खदान गैर ऊर्जा क्षेत्र के नौ प्रोजेक्ट के इंड यूज के लिए नीलामी में आवंटित की गई थी।
इनमें से सीमेंट और कैप्टिव पॉवर के छह प्लांट अल्ट्राटेक को बेचने पर कोयला रिजर्व आवश्यकता से 150 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गया है। सीएमडीपीए की शर्तों का पालन नहीं करने से ऐसा लगता है कि कंपनी कोयला खनन को लेकर गंभीर नहीं है।
कंपनी ने 15 दिन में जवाब नहीं दिया तो सरकार सुरक्षा निधि जब्त कर लेगी। इस मामले में जानकारी लेने के लिए कंपनी के अफसरों से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने अधिकृत तौर पर कुछ नहीं कहा।
किसे क्या नुकसान
सरकार
सरकार को 1852 रुपए प्रति टन की रॉयल्टी में से प्रदेश को एक बड़ा हिस्सा मिलना था। अब नए सिरे से खदानों की नीलामी करनी पड़ेगी, इससे प्रक्रियागत देरी से उत्पादन में देर होगी। केंद्र के साथ ही राज्य को भी कोयला उत्पादन से होने वाली आय के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा।
कंपनी
सरकार सुरक्षा निधि के करीब 12 करोड़ रुपए राजसात कर लेगी। खदान क्षेत्र में हुए व्यय की भी हानि होगी। कंपनी के बचे हुए प्रोजेक्ट की जरूरतों के लिए कोयले के आवंटन की नए सिरे से प्रक्रिया अपनानी पड़ेगी। सीमेंट सहित अन्य उत्पादों के उत्पादन में कुछ समय के लिए गिरावट आ सकती है।
तीन साल पहले मिली थी खदानें
मंडला नार्थ और साउथ कोल ब्लाक पहले मप्र खनिज विकास निगम के पास था। मार्च 2015 की नीलामी में दोनों ब्लाक जेपी ने 1852 रुपए प्रति टन की रॉयल्टी पर हासिल किए थे।
नुकसान होगा कंपनी को ही भुगतना पड़ेगा। अनुबंध की अवहेलना उसने की है। अभी उत्पादन आरंभ नहीं हुआ था, हमारा कोयला रिजर्व तो प्रदेश में ही है।
-मनोहर दुबे, सचिव खनिज साधन मध्यप्रदेश
Published on:
17 Mar 2018 08:12 am
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