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कक्काजी बोले- किसान आंदोलन को दबाने का प्रयास न करे सरकार

दमनकारी नीति जारी रही तो समय से पहले विद्रोह कर देंगे किसान...
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भोपाल

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Anil Chaudhary

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Updated: 29 May 2018, 1:34 PM IST

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Agriculture Department's Negligence with Farmers

भोपाल. किसान अपना हक मांगने के लिए एक से 10 जून तक गांव बंद आंदोलन करेंगे। सरकार आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रही है। किसानों को थमकाया जा रहा है। उ

नसे 10 हजार से 25 हजार रुपए तक के बॉन्ड भरवाए जा रहे हैं कि वे आंदोलन में शामिल नहीं होंगे। सरकार की यह दमनकारी नीति जारी रही तो किसान समय के पहले विद्रोह कर सकते हैं। इसके गंभीर परिणाम होंगे। यह कहना है राष्ट्रीय मजदूर किसान महासंघ के अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा 'कक्काजी' का।

कक्काजी ने कहा कि 22 राज्यों के 130 किसान संगठन मिलकर यह आंदोलन कर रहे हैं। इसमें मध्यप्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, केरल आदि प्रमुख हैं। राष्ट्रीय किसान महासंघ के बैनर तले होने वाले इस आंदोलन में किसानों से कहा गया है जो जहां है, वहीं शामिल हो जाए।


- 10 दिन में कब-क्या

छह जून को शहादत दिवस, आठ को असहयोग दिवस और 10 जून को भारत बंद।

- आयोग की रिपोर्ट उजागर क्यों नहीं
उन्होंने कहा कि पिछले साल आंदोलन के दौरान मंदसौर में किसानों की मौत हुई। दो किसानों की हत्या कर दी गई, लेकिन हत्यारों के खिलाफ न तो कोई एक्शन हुआ और न ही एफआइआर दर्ज नहीं हुई। गोलीकांड की जांच के लिए गठित जैन आयोग की रिपोर्ट एक साल बाद भी उजागर नहीं हुई।


- फसल की लागत का डेढ़ गुना मिले मूल्य
सरकार की गलत नीतियों की वजह से किसानों को उनकी लागत का मूल्य ही नहीं मिल पा रहा है, जिससे किसान कर्जदार होता जा रहा है। छोटे किसानों की आय सुनिश्चित की जाए। पिछले वर्ष आंदोलन के दौरान सात हजार किसानों पर मुकदमे दर्ज किए गए, इन्हें वापस लिया जाए।


- बातचीत नहीं, आदेश चाहिए
कक्काजी का कहना है कि आंदोलन को लेकर सरकार से कोई चर्चा नहीं होगी। पहले भी कई बार चर्चा हो चुकी है। अब तो मांगों को पूरा करते हुए सरकार के लिखित आदेश चाहिए।

- साजिश पूरी नहीं होने देंगे: सीएम
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के प्रस्तावित आंदोलन को मध्यप्रदेश के बदनाम करने की साजिश बताया है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा है कि शांति के टापू मध्यप्रदेश का बदनाम करने की कोई साजिश हम पूरी नहीं होने देंगे।

सीएम ने ट्विटर में नाम लेते हुए कहा कि पिछले साल भी किसान आंदोलन के दौरान हिंसा हुई थी वो किसानों ने नहीं की थी, बल्कि उनको उकसाने में नाकाम रहे किन गुंडों ने की थी, यह सभी जानते हैं।