5 फ़रवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

इस नेता को लेकर मुश्किल में कांग्रेस, प्रदेश अध्यक्ष बनाया तो नाराज हो सकते हैं कई दिग्गज!

ज्योतिरादित्य सिंधिया लंबे समय से मध्यप्रदेश में सक्रिय हैं। प्रदेश अध्यक्ष के चयन के बाद कैबिनेट विस्तार के समीकरण बदल सकते हैं।

3 min read
Google source verification

भोपाल

image

Pawan Tiwari

Oct 30, 2019

इस नेता को लेकर मुश्किल में कांग्रेस, प्रदेश अध्यक्ष बनाया तो नाराज हो सकते हैं कई दिग्गज!

इस नेता को लेकर मुश्किल में कांग्रेस, प्रदेश अध्यक्ष बनाया तो नाराज हो सकते हैं कई दिग्गज!

भोपाल. मध्यप्रदेश की झाबुआ उपचुनाव में कांग्रेस की जीत से जहां कमल नाथ सरकार मजबूत हुई है। वहीं, कांतिलाल भूरिया को लेकर सीएम कमल नाथ की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। सूत्रों का कहना है कि कमल नाथ नवंबर में अपने कैबिनेट का विस्तार कर सकते हैं। वहीं, मध्यप्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है। सीएम कमल नाथ के समने अब सबसे बड़ी चुनौती है कि कांतिलाल भूरिया को सत्ता में शामिल करें या फिर संगठन की जिम्मेदारी दें। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की मांग उठ रही है।

सोनिया से चर्चा के बाद तय होगी भूमिका
कांतिलाल भूरिया की भूमिका कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष और सीएम कमल नाथ से चर्चा के बाद तय होगी। अभी भूरिया का नाम मंत्री पद. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और प्रदेश कांग्रेस सलाहकार के तौर पर चल रही है। माना जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष के चयन के बाद मंत्रिमंडल के विस्तार के समीकरण बदल जाएंगे। यदि कांतिलाल भूरिया को प्रदेश अध्यक्ष नहीं बनाया जाता है तो उन्हें मंत्री बनाया जा सकता है।

क्या है कमल नाथ की मुश्किल
सूत्रों का कहना है कि सीएम कमल नाथ मध्यप्रदेश में दो पॉवर सेंटर नहीं चाहते हैं और इसके साथ ही वो यह चाहते हैं कि मध्यप्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष कोई आदिवासी नेता था। प्रदेश के आदिवासी नेताओं की बात करें तो कांतिलाल भूरिया कद सबसे बड़ा है। उनके बाद गृहमंत्री बाला बच्चन और वन मंत्री उमंग सिंघार का नाम शामिल है। सिंघार द्वारा पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह पर खुला हमला बोलने के बाद से ऐसा माना जा रहा है कि वो प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ से बाहर हैं।

आदिवासी प्रदेश अध्यक्ष क्यों चाहते हैं सीएम कमलनाथ
मध्यप्रदेश के सीएम कमलनाथ प्रदेश अध्यक्ष के लिए आदिवासी चेहरा चाहते हैं। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सबसे ज्यादा आदिवासी इलाके में जीत दर्ज की थी। जबकि लोकसभा में पार्टी आदिवासी इलाकों में एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। ऐसे में कमलनाथ आदिवासियों की नाराजगी दूर करने के लिए आदिवासी चेहरे पर दांव लगाना चाहते हैं। झाबुआ में कांतिलाल भूरिया की जीत के साथ ही कांग्रेस में आदिवासी विधायकों की संख्या अब 31 हो गई है। इसलिए कमल नाथ चाहते हैं कि प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी किसी आदिवासी नेता को दी जाए।

देना पड़ सकता है बड़ा विभाग
विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान कांतिलाल भूरिया के कुछ पोस्टर वायरल हुए थे। इन पोस्टरों में लिखा था कि जीत के बाद कांतिलाल भूरिया या तो डिप्टी सीएम बनेंगे या फिर कैबिनेट मंत्री। कांतिलाल भूरिया प्रदेश के बड़े नेताओं में शामिल हैं। वो केन्द्र में भी मंत्री रह चुके हैं। वहीं, दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में वो प्रदेश में भी मंत्री रह चुके हैं। जानकारों का कहना है कि अगर कांतिलाल भूरिया को प्रदेश में मंत्री बनाया जाता है कि कमल नाथ को उन्हें कोई बड़ा विभाग देना होगा।

कैबिनेट में फेरबदल संभव
झाबुआ उपचुनाव में जीत के बाद कमलनाथ कैबिनेट में फेरबदल संभव है। सीएम कमलनाथ अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर सकते हैं, लेकिन कैबिनेट विस्तार का अंतिम फैसला कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और कमलनाथ की 4 नवंबर को होने वाली बैठक में तय होगा। सूत्रों का कहना है कि मध्यप्रदेश में 5 राज्यमंत्री बनाए जा सकते हैं। कमल नाथ की कैबिनेट में अभी 28 मंत्री हैं और वो सभी कैबिनेट मंत्री हैं। वहीं, कांतिलाल भूरिया की भूमिका को लेकर संशय बना हुआ है।

सिंधिया की नाराजगी
कांतिलाल भूरिया के नाम पर पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह भी अपनी सहमति जता सकते हैं, लेकिन कमल नाथ के सामने मुश्किल है ज्योतिरादित्य सिंधिया की। ज्योतिरादित्य सिंधिया का खेमा लंबे समय से ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की मांग कर रहा है। दिग्विजय सिंह खेमे के माने जाने वाले डॉ गोविंद सिंह ने भी ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम का समर्थन किया था। ज्योतिरादित्य सिंधिया इन दिनों मध्यप्रदेश में सक्रिय हैं और अपनी ही सरकार के खिलाफ हमला बोल चुके हैं। कर्जमाफी, अवैध रेत उत्खनन को लेकर कमल नाथ सरकार पर सवाल खड़े कर चुके हैं।

सिंधिया ने नहीं किया था प्रचार
झाबुआ उपचुनाव को लेकर खुद मुख्यमंत्री कमल नाथ ने मोर्चा संभाला था। उन्होंने यहां रोड शो और जनसभाएं भी की थीं। लेकिन इश दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया नदारद थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने झाबुआ उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार कांतिलाल भूरिया के पक्ष में प्रचार नहीं किया था।