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बाहरी राज्यों के युवाओं को सरकार की बड़ी सौगात, इस क्षेत्र में बढ़ी पात्रता की आयु

कमलनाथ कैबिनेट में प्रदेश के बाहरी राज्यों के युवाओं को बड़ी सौगात दी है। कैबिनेट की बैठक में बाहरी युवाओं के लिए शासकीय सेवाओं में परीक्षा देने की आयु अधिकतम 28 साल से बढ़ाकर 35 साल कर दी गई है।

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बाहरी राज्यों के युवाओं को सरकार की बड़ी सौगात, इस क्षेत्र में बढ़ी पात्रता की आयु

भोपालः कमलनाथ कैबिनेट में प्रदेश के बाहरी राज्यों के युवाओं को बड़ी सौगात दी है। कैबिनेट की बैठक में बाहरी युवाओं के लिए शासकीय सेवाओं में परीक्षा देने की आयु अधिकतम 28 साल से बढ़ाकर 35 साल कर दी गई है। सरकार द्वारा नए सिरे से सुनिश्चित की गई इस आयु सीमा का बड़ा लाभ बाहरी राज्यों के युवाओं को मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) की सीधी भर्ती में मिलेगा। मौजूदा समय तक इस सेवा के लिए परीक्षा देने की उम्र 21 से 28 साल थी, जिसे बढ़ाते हुए सरकार ने 21 से 35 साल कर दी है। वहीं, प्रदेश के एससी-एसटी, ओबीसी के युवाओं और सामान्य वर्ग की महिलाओं को भी इस सेवा में 5 साल की छूट जारी रहेगी।

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मंत्रीमंडल दिखा असेहमत

बाहरियों के लिए तय आयु की पूर्ववर्ती सीमा को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिसपर कोर्ट ने सभी के लिए शासकीय सेवा में भर्ती की आयु सीमा समान करने का आॅर्डर दिया था। इसी आदेश के तहत सूबे की कमलनाथ सरकार ने नई आयु सीमा तय की है। हालांकि, सरकार के इस फैसले पर पूर्ण मंत्रियों की सेहमति नहीं मिली है,। तुलसी सिलावट, जयवर्धन सिंह समेत करीब आधा दर्जन से ज्यादा मंत्री कैबिनेट में ही इस निर्णय का विरोध करते नज़र आए। फैसले के विरोध में आए मंत्रियों का सवाल था कि, तेलुगु, तमिल और कन्नड़ भाषी प्रदेशों में जब स्थानीय युवाओं को रोजगार में विशेष सहूलियत दी जाती है, तो हम इसे क्यों नज़रअंदाज कर रहे हैं? हमें भी पहले स्थानीय युवाओं के बारे में सोचना चाहिए।

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सामान्य वर्ग को आरक्षण की ओर बड़ा कदम

इसके अलावा, मध्य प्रदेश में सामान्य वर्ग के लोगों को आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण देने की दिशा में भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मामले की रिपोर्ट सब कमेटी ने शासन को सौंप दी है। अब कैबिनेट को इसपर मंजूरी मिलने का इंतज़ार है। बता दें कि, ये बैठक सामान्य प्रशासन मंत्री गोविंद सिंह की अध्यक्षता में हुई थी।

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फिर शुरु होगी कर्जमाफी की प्रक्रिया

दो हफ्ते में शुरू होगी कर्जमाफी की प्रक्रिया-इधर, लोकसभा चुनाव की आचार संहिता प्रभावी होने के कारण प्रदेश के जिन पात्र किसानों के दो लाख तक के कर्ज माफ नहीं हो पाए थे, उनकी कर्जमाफी की प्रक्रिया दो हफ्ते में शुरू कर दी जाएगी। आगे यह प्रक्रिया तब तक चलेगी, जब तक सभी 55 लाख किसानों के कर्जमाफ नहीं हो जाते। उल्लेखनीय है कांग्रेस सरकार ने किसानों के दो लाख रुपए के कर्ज माफ किए जाने का वाद किया था, जिसके तहत लोकसभा चुनाव की आचार संहिता प्रभावी होने के पहले 22 लाख किसानों का ही कर्जमाफ हो पाया था।

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