
तीन दिनों में 25 लाख लोगों के आने का अनुमान है।
Karila Mela -15 lakh people in Karila Fair Ashoknagar - अशोकनगर के विख्यात करीला मेले में रंगपंचमी पर जनसैलाब उमड़ा पड़ा। यहां आए लाखों लोगों से रास्ते पट गए। करीला धाम में लव-कुश के जन्म का उत्सव मनाया जा रहा है। इसके लिए रंगपंचमी के एक दिन पहले ही पांच लाख श्रद्धालु करीला पहुंच गए थे। यहां तीन दिनों में 25 लाख लोगों के आने का अनुमान है।
रंगपंचमी पर सुबह 7 बजे से महर्षि वाल्मीकि गुफा पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं के दर्शनों के लिए खोल दी गई थी। बताया जा रहा है कि अभी तक 15 लाख लोग माता सीता के दर्शन कर चुके हैं। गुरुवार रात से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही का दौर चल रहा है।
माँ जानकी मंदिर करीला ट्रस्ट के मुताबिक पहले दिन तीन लाख से अधिक श्रद्धालु करीला पहुंचे और रात से श्रद्धालुओं की संख्या बढऩे का अनुमान है। शाम से ही करीला में बधाई स्वरूप राई नृत्य का दौर शुरू हो गया और क्षेत्र नगड़ियों व घुंघरुओं की आवाज से गूंजने लगा। श्रद्धालुओं को दो बड़ी एलईडी स्क्रीन के माध्यम से भी मंदिर व मेला क्षेत्र के दर्शन कराए जा रहे हैं।
करीला पहुंचने के लिए श्रद्धालु ऐसे बेकरार हैं कि लोडिंग वाहन व ऑटो के पीछे लटककर भी यात्रा कर रहे हैं। ट्रैक्टर-ट्रालियों में भर भरकर श्रद्धालु करीला जा रहे हैं। रंगपंचमी पर यहां हजारों राई नृत्य के आयोजन हो रहे हैं।
यहां डे-शेल्टर होम में 50 पलंग का अस्थाई अस्पताल बनाया गया है, जिसमें सेमी आइसीयू व दो ओपीडी है। वहीं छह जगहों पर स्वास्थ्य काउंटर बनाए हैं। इलाज के लिए 20 डॉक्टर सहित 138 स्वास्थ्य स्टाफ की ड्यूटी लगाई गई है। साथ ही सात एम्बुलेंस, ऑक्सीजन सिलेंडर, जीवन रक्षक दवाओं की व्यवस्था भी की गई है। पेयजल के लिए कई स्थानों पर टोंटियां लगाई गई हैं और 300 टेंकरों की व्यवस्था की गई है।
200 सीसीटीवी कैमरों व दो ड्रोन के माध्यम से मेले पर नजर रखी जा रही है। तीन वॉच टावर बनाए हैं और 1193 पुलिस जवान मेले में तैनात किए गए हैं।
पुलिस और प्रशासन के अधिकारी पल पल की जानकारी ले रहे हैं। बताया जा रहा है कि करीब 15 लाख यहां दर्शन कर चुके हैं। अभी लाखों लोग दर्शन के लिए आ रहे हैं।
गौरतलब है कि करीला धाम में मंदिर में केवल सीताजी की ही मूर्ति है, यहां भगवान राम की मूर्ति नहीं है। यह देश का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां सीताजी, राम के बिना स्थापित हैं। धाम में लव कुश और वाल्मिकी की मूर्तियां भी हैं। मेले में रंगपंचमी पर राई नृत्य भी होते हैं।
Published on:
30 Mar 2024 09:25 pm
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