
राजधानी भोपाल का महालक्ष्मी मंदिर ईशावास्यम श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। नेहरू नगर के करुणाधाम आश्रम में बने इस मंदिर का निर्माण षटकोण आकार में किया गया जो मानव शरीर में मेरूदंड से लेकर ब्रह्मरंध तक कुल सात चक्रों के आधार पर किया गया है, जिनसे ईश्वरीय ऊर्जा का संचालन होता है।
इस मंदिर को इन्हीं चक्रों के आधार पर सात खंडों में विभक्त किया गया है। इस मंदिर में कई सेवा कार्य भी संचालित किए जाते हैं, जिससे कई गरीब और असहाय लोग लाभांवित हो रहे हैं। शहर का यह प्रमुख महालक्ष्मी मंदिर है। इस मंदिर की स्थापना 2015 में हुई थी। इस मंदिर के पीठाधीश्वर पंडित सुदेश शांडिल्य हैं।
सात चक्रों का आधार
प्रथम खंड करुणेश्वरी मंडपम है, यह मूलाधार चक्र है। यह शरीर का माता के समान पोषण करता है, इसका रंग लाल है।
द्वितीय खंड में ईशावास्यम माता महालक्ष्मी का मंदिर स्वाधिष्ठान चक्र है, यह प्रसन्नता, विश्वास, आत्मबल और मानसिक शक्ति बढ़ाता है।
मंदिर के तीसरे खंड मणिपुर चक्र है। नाम के अनुरूप यह मणि रत्नों का भंडार है। मंदिर में इस स्थान पर श्रीयंत्र स्थापित है।
चतुर्थ खंड अनाहत चक्रकी ऊर्जा समुद्र के समान फैली होती है। इसमें हमारी आत्मा का वास होता है। इस चक्रका रंग हरा है।
पांचवा खंड विशुद्ध चक्रहै। यह मानव शरीर में कंठ में स्थित होता है।यह नकारात्मक सोच को सकारात्मक में बदलता है।
मंदिर का छठवां खंड आज्ञा चक्रहै। आज्ञा चक्रगुरु का स्थान है। इस चक्रका रंग जामुनी होता है।
ईशावास्यम के सातवें खंड में सहस्त्रार चक्रहै। यह चक्रमंदिर के शिखर पर स्थित है। इस चक्र का रंग बैंगनी है।
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Updated on:
24 Oct 2022 11:33 am
Published on:
24 Oct 2022 11:29 am
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