
भोपाल। नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी की सुहागरात को उनकी पत्नी के साथ क्या हुआ था, यह किस्सा आज पूरी दुनिया को बता चल गया है। किस्सा भी ऐसा जिसे सुनकर हर कोई हंस-हंस कर लोटपोट हो रहा है। अमिताभ बच्चन ने जब सत्यार्थी से उनकी सुहागरात वाला किस्सा पूछ लिया तो उन्होंने संकोच करते हुए बताया कि उनकी पत्नी ने घुंघट की आड़ में से जो गाना गाया था वह था भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना। यह सुन अमिताभ बच्चन के साथ ही पूरा हाल हंसी के ठहाकों से गूंज उठा।
मौका था सोनी टीवी के 'कौन बनेगा करोड़पति' कार्यक्रम का। इस कार्यक्रम में नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी अपनी पत्नी सुमेधा के साथ आए थे। अमिताभ के सामने सत्यार्थी दंपती हॉट सीट पर बैठे थे।
अमिताभ तो मेरी पूरी पोल खोल देंगे
सत्यार्थी केबीसी के ग्रांड फिनाले एपिसोड में गेस्ट बनकर आए थे। उनसे व्यक्तिगत जिंदगी के कई प्रश्न पूछे, तो उन्होंने भी काफी किस्से उजागर कर दिए। जब उनसे सुहागरात वाला किस्से के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अमिताभ तो मेरी पूरी पोल ही खोल देंगे। लगता है आज नहीं छोड़ेंगे।
सत्यार्थी ने जवाब में यह मजेदार किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि जब मेरी पहली-पहली बार शादी हुई थी। तो इतना सुनते ही वहां हंसी के ठहाके लगने लगे। किस्से को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि सुहागरात के बारे में मुझे बिल्कुल भी नहीं पता था कि ये क्या मामला है। जब मैंने कमरे में प्रवेश किया तो पलंग पर मेरी पत्नी सुमेधा घूंघट में बैठी हुई थी। मैंने उनसे कहा कि आप बेहद खूबसूरत हैं, तो घूंघट में क्यों हैं। मैंने तो पहले ही आपको देखा था, फिर भी मेरी पत्नी ने घूंघट उठाने से इनकार कर दिया। बाद में मैंने पत्नी से कहा कि चलो अब आप गाना सुनाएं। सुमेधा गाना बहुत अच्छा गाती है। लेकिन सुमेधा ने कहा कि पहले आप सुनाओ, तो मैंने कहा कि मैं तो गाना नहीं गाता, कभी-कभार कालेज में सीटी जरूर बजा लेता था। इसके बाद सुमेधा ने गाना सुनाया ‘भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना’। तो इसके जवाब में मैंने भी गाया कि ‘ओ मां, तुम कितनी अच्छी हो, कितनी सुंदर हो’। सत्यार्थी ने बताया कि इस तरह हमारी शुरुआत हुई। केबीसी में मौजूद यह रोचक किस्सा सुन ठहाके लगाकर हंसने लगे।
अमिताभ ने बताया कैसे बने वे श्रीवास्तव से बच्चन
सत्यार्थी की ही तरह बिग बी ने भी अपनी जिंदगी का वो किस्सा सुनाया जिसे आज भी लोग जानना चाहते हैं। बच्चन ने बताया कि उनका सरनेम बच्चन क्यों और कैसे पड़ा। उन्होंने बताया कि मेरे बाबूजी का सरनेम श्रीवास्तव था, वे जाति में विश्वास नहीं रखते थे। मुझे बचपन में बच्चा-बच्चा कहते थे। इसलिए मेरे पिता ने मेरा सरनेम बच्चन रख दिया। मैं अपने परिवार का पहला शख्स था जिसे बच्चन सरनेम मिला।
'दुनिया है मेरे पीछे और मैं तेरे पीछे'
इससे पहले 8 अक्टबर को इंदौर के डेली कालेज में हुए एक कार्यक्रम में एक रोचक किस्सा हुआ। किसी ने कहा कि कैलाश सत्यार्थी के साथ ही सुमेधा साए की तरह रही हैं। इस पर सत्यार्थी ने कहा कि मेरी पतनी पर यह गाना सूट नहीं करता है। उन पर सूट करता है दुनिया है मेरे पीछे और मैं तेरे पीछे। ‘पत्रिका’ से खास बातचीत में सुमेधा ने इसका मुस्कुराकर जवाब दिया था हम साथ-साथ हैं।
Published on:
07 Nov 2017 01:38 pm
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