
नहीं टूट पाया किशोर का जादू, आज भी लोगों को सुकून देते हैं किशोर के गाने
भोपाल। खंडवा वाले किशोर कुमार इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके प्रति लोगों की दीवानगी भी अब भी कम नहीं हुई है। जबकि आजकल के युवा भी किशोर के ही दीवाने हैं। किशोर का अंतिम संस्कार खंडवा में ही हो, यह उनकी अंतिम इच्छा थी, वो इच्छा तो पूरी हो गई लेकिन वो एक ख्वाहिश पूरी नहीं कर पाए।
एक जिंदादिल किशोर कुमार की यह इच्छा थी कि खंडवा में अपनो के बीच और मालवा की संस्कृति के बीच बंस जाऊं। लेकिन यह नहीं हो पाया। किशोर के चाहने वाले आज भी कहते हैं कि यदि वे होते तो बात ही कुछ ओर होती।
4 अगस्त को इस महान गायक किशोर कुमार का जन्म दिन है। आज भी खंडवा स्थित उनके बंगले को देखने लोग पहुंच जाते हैं। इस बंगले का नाम है गांगुली सदन। जर्जर हो चुके इस बंगले में प्रवेश करते ही ऐसा आभास होता है कि किशोर यहीं-कहीं है और गुनगुना रहे हैं।
mp.patrika.com आपको बताने जा रहा है उनके जीवन से जुड़े दिलचस्प किस्से, जो कम ही लोग जानते हैं।
किशोर की यादें
1. आभास कुमार गांगुली था किशोर का असली नाम।
2. खंडवा के जिस बंगले में उनका जन्म हुआ था, वह बंगला आज भी है, लेकिन जर्जर हालत में है।
3. बंगले में वह पलंग भी है जिस पर उनका जन्म हुआ था। इसके अलावा वे तमाम चीजें हैं जिनके साथ किशोर कुमार बचपन में खेला करते थे।
4. किशोर कुमार ने 13 अक्टूबर को 1987 में अंतिम सांस ली थी।
5. किशोर कुमार बगैर फीस लिए एक भी गाना नहीं गाते थे।
6. जब मन करता था तो दही-बड़े खाने खंडवा चले आते थे।
7. अटपटी बातों के वे चटपटे अंदाज में जवाब देते थे। नाम पूछने पर वे बताते थे रशोकि रमाकु।
एक फिल्म के लिए नहीं लिए थे पैसे
किशोर कुमार के बारे में इस बात को लेकर कई किस्से मशहूर हैं कि वह फीस लिए बगैर अपना हुनर कभी खर्च नहीं करते थे। लेकिन, यह वाकया बहुत कम लोग जानते होंगे कि फिल्मकार सत्यजीत रे के मशहूर बांग्ला शाहकार चारूलता के लिए 1964 में उन्होंने गाने के एवज में बतौर पारिश्रमिक एक पाई तक नहीं ली थी।
पोहे-जलेबी बेहद पसंद था
मायानगरी मुंबई में जरूर किशोर बस गए थे, लेकिन उनका दिल खंडवा आने के लिए ही धड़कता रहता था। यहां के दही बड़े और पोहे और दूध-जलेबी खाने के लिए हमेशा उत्सुक रहते थे।
देखरेख के अभाव में हो गया खंडहर
खंडवा का दुनिया में नाम रोशन करने वाले किशोर दा का बंगला इतना जर्जर हो चुका है कि कभी-भी भरभराकर गिर सकता है। देखरेख न होने के कारण किशोर दा का यह जन्म स्थान खुद मरणासन्न स्थिति में पहुंच गया है। कुछ दीवार ढह गई हैं, वहीं खिड़की दरवाजे टूटे-फूटे हैं और सिर्फ लटके हुए हैं। छतों में लगी सागौन की लकड़ियां टूटकर लटकी हुई हैं। हालांकि इस बंगले का सौदा भी हो गया है।
किशोर के कारण बन गई है यह धरोहर
किशोर दा के बचपन से जुड़ी चीजें आज भी बंगले में रखी हुई हैं। जिस कमरे में किशोर दा का जन्म हुआ था, वह पलंग आज भी रखा हुआ है। जो धूल खा रहा है। प्रथम तल पर जाने के लिए लकड़ी की सीढ़ियां बनी थी, जो क्षतिग्रस्त हो गई है। बंगले के आसपास के दुकानदार खराब सामान यहीं पटक जाते हैं।
वो कहते हैं- गिरने दो दीवारें
नगर निगम के रिकॉर्ड में किशोर कुमार का बंगला उनके पिता कुंजीलाल गांगुली के नाम पर है। बंगले पर करीब 42 सालों से चौकीदारी करने वाले बुजुर्ग सीताराम बताते हैं कि कई बार मुंबई मे रहने वाले किशोर के परिजनों को बंगले का रखरखाव करने के लिए सूचना दी जाती गई, लेकिन किसी ने भी रुचि नहीं ली। कुछ माह पहले जब बंगले की दीवार गिरने की सूचना भेजी गई तो वहां से कहा गया कि गिर जाने तो। बांबे बाजार स्थित इस बंगला 7655 वर्ग फीट में बना हुआ है।
बंगले को म्यूजिम बनाए MP सरकार
दूसरी ओर किशोर के फैंस चाहते थे कि इस बंगले को स्मारक या संग्रहालय बना देना चाहिए। जो किशोर से जुड़ी जानकारी यहां दें सके। इसके अलावा यहां संगीत की बारीकियां सिखाने के लिए भी व्यवस्था की जा सकती है। MP सरकार को इस भवन को अपने हाथ में ले लेना चाहिए था। लेकिन ऐसा हो नहीं सका।
Published on:
04 Aug 2018 12:23 pm
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