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खटलापुरा हादसा: मजिस्टे्रट जांच की रफ्तार स्लो, हादसे 87 दिन बाद 60 फीसदी के हुए बयान

- 13 सितंबर को हुआ था हादसा, इसी दिन हुए थे जांच के आदेश, 10 दिसंबर तक की स्थिति में 40 फीसदी के नहीं हुए बयान, हाल ही में बचे 4 लोगों के बयान हुए

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भोपाल। नाव दुखांतिका, खटलापुरा हादसे में नाव डूबने से हुई 11 लोगों की मौत के शुरू की गई मजिस्टे्रट जांच में 87 दिन बाद अभी भी 60 फीसदी के ही बयान हो सके हैं, अभी 40 फीसदी के बयान होने बाकी हैं। जिसमें अफसर और अन्य लोग सामिल हैं। इसमें छह अफसर तो ऐसे हैं जो नोटिस देने के बाद अभी बयान देने उपस्थित नहीं हुए हैं। इस घटना में 54 लोगों के बयान होने हैं जिसमें अफसर और जो लोग हादसे से बचे हैं वे भी शामिल हैं। जांच में जो लोग स्वेच्छा से सहयोग कर सकते हैं उनको भी बयान देने के लिए कहा है, लेकिन ऐसा कोई व्यक्ति अभी तक अपनी स्वेच्छा से बयान देने नहीं आया है।

हाल ही में हादसे में बचकर निकले कमल राणा व अन्य तीन के बयान हाल ही में हुए हैं। बयानों में लोगों ने उस बीस मिनट की कहानी को बताया है जो उस दिन घटी थी। बयान में बताया है कि विसर्जन के लिए प्रतिमा को क्रेन पर लगा दिया था, लेकिन रुपयों की बात नहीं बनी तो उसे उतारकर नाव से ले गए। बीच में जाकर जैसे ही प्रतिमा की रस्सी खोली तो प्रतिमा एक तरफ तिरछी होकर पलट गई।

इससे पानी में तेज हलचल हुई और नाव जोर-जोर से डगमगाने लगी। कुछ लोग एक दूसरे को पकडऩे लग और देखते ही देखते नाव पलट गईं। इसके बाद चारों और हाहाकार मच गया। समय पर और गोताखोर होते तो अन्य लोगों की जान बचाई जा सकती थी। इनके बयान से पहले सीएसपी जहांगीराबाद अलीम खान, थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह चौहान, एसआई आरके सिंह और महिला थाना प्रभारी अजीता नायर के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। जिसमें उन्होंने अपनी बात कही है।

एक बात जो बार-बार रिपीट हो रही है

सूत्रों की मानें तो अभी तक ड्यूटी से जुड़े जितने भी अधिकारियों के बयान हुए हैं उसमें एक बात रिपीट हो रही है। जिसमें कहा गया है कि जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस ने खटलापुरा पर संबंधित अफसर और कर्मचारियों की ड्यूटी तो लगा दी, गाइडलाइन नहीं बताई। ये नहीं बताया कि मौके पर जाकर क्या करना है। आपस में समन्वय की कमी भी रही है। ड्यूटी पर तैनात अफसर, कर्मचरियों में आपस में तालमेल ही नहीं था।