
दिवाली पर ग्रीन पटाखों की धूम
भोपाल. दीपावली पर पटाखे खूब जलाए जाते हैं, लेकिन, इस साल प्रदूषण से बचने के लिए सिर्फ ग्रीन पटाखे ही जलाने पर ही ज्यादा जोर दिया जा रहा है। पारंपरिक पटाखों की तुलना में ग्रीन पटाखे कम हानिकारक होते हैं और वायु प्रदूषण को कम करते हैं। बाजार में कई तरह के ग्रीन पटाखे उपलब्ध हैं, लेकिन रंगीन म्यूजिकल मल्टीशॉट अनार लोगों की पहली पसंद बना है। यह आसमान में जाकर तेज धमाके करता है और अंत में इंद्रधनुष जैसी आकृति बनाता है।
ग्रीन पटाखों में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले प्रदूषणकारी केमिकल जैसे एल्यूमीनियम, बेरियम, पोटेशियम नाइट्रेट और कार्बन को या तो हटा दिया गया है या उत्सर्जन को 15 से 38 प्रतिशत तक कम कर दिया जाता है। पटाखों का ध्वनि स्तर 125 डेसिबल तय हैं इससे अधिक आवाज वाले पटाखे प्रतिबंधित हैं। ग्रीन पटाखे इसी मापदंड पर बने हैं।
ग्रीन पटाखे बच्चों को लुभा रहे
ग्रीन पटाखों में भी अब चीनी पटाखों की तर्ज पर इनोवेशन हो रहा है। ये बच्चों को आकर्षित कर रहे हैं। बाजार में रंगीन म्यूजिकल मल्टीशॉट अनार खूब बिक रहे हैं। इसमें आग लगाते ही यह आसमान में जाकर लगातार धमाके करता है और अंत में इंद्रधनुष के आकार में फैल जाता है। इसके अलावा बच्चे धागा बम, फुलझड़ी, रॉकेट, फ्लश बम एवं कैप्सूल बम भी पसंद कर रहे हैं। यह रेशमी राखी की तरह विशेष प्रकार का पटाखा है जो खींचते ही तेज आवाज करता है।
इस तरह पहचानें ग्रीन पटाखों को
वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद स्वास, सफल और स्टार नाम केतीन श्रेणियों के पटाखों को विकसित किया है। स्वास मतलब सुरक्षित जल रिलीजऱ में एक छोटी पानी की जेब,बूंदें होनी चाहिए, जो फटने पर भाप के रूप में निकल जाती हैं। यह हवा में भाप छोड़ कर पटाखों से निकलने वाली धूल को दबा देता है। इसमें पोटैशियम नाइट्रेट और सल्फर शामिल नहीं होते और निकलने वाले कण धूल लगभग 30 प्रतिशत तक कम हो जाते हैं। जबकि, सफल सुरक्षित थर्माइट पटाखा है, जिसमें पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर शामिल नहीं है, जलने पर कण कम निकलते हैं और आवाज की तीव्रता भी कम होती है। इसी तरह स्टार सुरक्षित न्यूनतम एल्यूमीनियम है, जिसमें एल्यूमीनियम का न्यूनतम उपयोग होता है, और इसके बजाय मैग्नीशियम का उपयोग किया जाता है। पारंपरिक पटाखों की तुलना इनके फटने पर आवाज कम होती है।
यह रसायन होते हैं प्रयुक्त
ग्रीन पटाखों में पोटैशियम नाइट्रेट को ऑक्सीडेंट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। पारंपरिक पटाखे काला पाउडर, नाइट्रेट, क्लोरेट्स और परक्लोरेट जैसे ऑक्सीकरण एजेंट, सल्फर और चारकोल जैसे कम करने वाले एजेंट, बेरियम जैसे रंग एजेंट और डेक्सट्रिन (स्टार्च) जैसे बाइंडर का उपयोग करते हैं।
ग्रीन पटाखों की पहचान के लिए देखें नीरी की सील
दुकानदार पुराना माल निकालने के लिए साधारण पटाखों को भी ग्रीन पटाखे बताकर बेच रहे हैं। इसलिए पटाखे खरीदते समय सीएसआईआर-नीरी का लोगो देखें। ग्रीन पटाखों के पैकेट पर नीरी की सील लगी रहती है। ग्रीन पटाखे लाइसेंस प्राप्त विक्रेता से ही खरीदें। इन्हें जलाते वक्त लंबी मोमबत्ती या फिर फुलझड़ी का ही इस्तेमाल करें। बच्चे या बड़े पटाखों को जलाते वक्त जूते पहनें। आसपास पानी की एक बाल्टी भी साथ रखें। लंबे, ढीले-ढाले ङ्क्षसथेटिक के कपड़े न पहनें।
Published on:
21 Oct 2022 10:26 am
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