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कोलार में तेजी से घट रही हरियाली, कंक्रीट के बढ़ते दबाव के बीच ग्रीन मास्टर प्लान की मांग तेज

Rapidly Declining Greenery: बढ़ते तापमान, प्रदूषण और सिकुड़ते हरित क्षेत्रों से बिगड़ रहा पर्यावरण संतुलन, कोलार कहीं बन ना जाए अर्बन हीट आइलैंड।

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bhopal

kolar greenery decline

Kolar Area: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल का कोलार क्षेत्र आज शहर के सबसे तेजी से विकसित होने वाले इलाकों में गिना जाता है। बीते एक दशक में यहां बड़ी संख्या में नई कॉलोनियां, बहुमंजिला इमारतें, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स और सड़क परियोजनाएं विकसित हुई हैं। लगातार बढ़ती आबादी और शहरी विस्तार ने कोलार को आधुनिक स्वरूप तो दिया, लेकिन इसी विकास की कीमत क्षेत्र की हरियाली को चुकानी पड़ रही है। क्षेत्र में तेजी से घटते पेड़-पौधे, सिकुड़ते पार्क और खत्म होते खुले हरित क्षेत्र अब लोगों की चिंता का कारण बन गए हैं।

कभी हरियाली और प्राकृतिक वातावरण के लिए पहचाने जाने वाला कोलार अब धीरे-धीरे कंक्रीट के विशाल जंगल में तब्दील होता जा रहा है। क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन यदि विकास बिना पर्यावरण संतुलन के होगा तो आने वाले वर्षों में हालात और गंभीर हो जाएंगे। भीषण गर्मी, धूल, प्रदूषण और घटता भूजल स्तर इसके शुरुआती संकेत हैं।

तेजी से बढ़ा निर्माण, लेकिन नहीं बढ़ी हरियाली

स्थानीय लोगों के अनुसार क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में जिस तेजी से निर्माण कार्य हुए हैं, उसी गति से हरित क्षेत्र विकसित नहीं किए गए। कई जगहों पर पेड़ों की कटाई कर सड़क चौड़ीकरण और निर्माण कार्य किए गए, लेकिन उसके बदले पर्याप्त संख्या में नए पौधे नहीं लगाए गए। जहां पौधारोपण हुआ भी, वहां अधिकांश स्थानों पर रखरखाव नहीं होने से पौधे कुछ ही महीनों में सूख गए। नागरिकों का कहना है कि हर वर्ष मानसून के दौरान पौधारोपण के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही दिखाई देती है।

औपचारिकता बने अभियान

पेड़ों और हरियाली को बचाने के लिए चलाए गए तमाम अभियान केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं। पौधे लगाने के बाद न तो उनकी निगरानी होती है और न ही नियमित सिंचाई की व्यवस्था की जाती है। परिणामस्वरूप लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद हरियाली में अपेक्षित वृद्धि दिखाई नहीं देती। पर्यावरणविदों का कहना है कि यदि यही स्थिति जारी रही तो आने वाले समय में कोलार अर्बन हीट आइलैंड में बदल सकता है, जहां सामान्य क्षेत्रों की तुलना में तापमान कई डिग्री अधिक हो जाता है इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।

नई कॉलोनियों के लिए लागू हो ग्रीन ऑडिट

पर्यावरण विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि कोलार क्षेत्र में बनने वाली नई कॉलोनियों और आवासीय परियोजनाओं के लिए ग्रीन ऑडिट अनिवार्य किया जाए। इसके तहत यह सुनिश्चित किया जाए कि हर परियोजना में तय प्रतिशत में हरित क्षेत्र विकसित हो। पार्क, ओपन स्पेस और पेड़ों के लिए पर्याप्त स्थान छोड़ा जाए। यदि कोई बिल्डर ग्रीन नियमों का पालन नहीं करता तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल भवन निर्माण पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।

क्या कहती है कोलार क्षेत्र की जनता

  • कोलार में लगातार पेड़ों की कटाई हो रही है, लेकिन नए पौधे लगाने और उनकी देखरेख पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। हरियाली कम होने से गर्मी और प्रदूषण दोनों बढ़ गए हैं।इंजी. रामबाबू साहू, स्थानीय
  • सिर्फ पौधारोपण अभियान चलाने से काम नहीं चलेगा। पौधों को बचाना और उनकी नियमित देखभाल करना भी जरूरी है, तभी कोलार में हरियाली बढ़ पाएगी।अभिषेक शर्मा, युवा
  • खाली पड़ी सरकारी जमीनों को कचरा डंपिंग साइट बनने से रोककर वहां मिनी पार्क और ग्रीन जोन विकसित किए जाने चाहिए।राहुल तिवारी, करियर काउंसलर
  • नई कॉलोनियों में ग्रीन एरिया कम होता जा रहा है। बिल्डरों के लिए सख्त ग्रीन नियम लागू किए जाएं ताकि हर परियोजना में पर्याप्त हरियाली हो।भैयालाल व्यापारी, रहवासी
  • पहले कोलार में काफी हरियाली थी और वातावरण भी ठंडा रहता था, लेकिन अब लगातार बढ़ते निर्माण से प्राकृतिक संतुलन बिगड़ गया है।बृजेश रिछारिया, प्रकृतिप्रेमी
  • यदि हर परिवार एक पौधा लगाए और उसकी जिम्मेदारी ले तो आने वाले कुछ वर्षों में कोलार की तस्वीर बदल सकती है।संजय पोलघंटरवार, रहवासी