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विधायक ने आपत्ति लगाकर पूछे दस सवाल, कहा – कोलार को राजनीति का शिकार न बनाएं

कोलार नगर पालिका पुनर्गठन, जनमत संग्रह की मांग

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नगर निगम में नए बजट के लिए बैठकें शुरू

नगर निगम में नए बजट के लिए बैठकें शुरू

भोपाल. कोलार नगर पालिका पुनर्गठन मामले पर विधायक रामेश्वर शर्मा भी अब विरोध में उतर आए हैं। जिला प्रशासन को अपने सवालों के साथ आपत्ति दर्ज कराई। प्रशासन से इनके जवाब देने का निवेदन करते हुए कहा कि कोलार को राजनीति का शिकार न बनाएं। कोलारवासियों से जनमत संग्रह करवा कर निर्णय हो। उन्होंने कोलार नगर पालिका बनने के पहले शासन से इसके लिए ५००० करोड़ रुपए का विकास पैकेज देने की मांग की, ताकि पुनर्गठन के बाद विकास में राशि बाधक न बने।

विधायक ने लगाई आपत्ति, प्रशासन से पूछे दस सवाल
१. नगर पालिका पुनर्गठन क्या राजनीतिक दबाव में कर रहे है? इसका प्रारंभिक स्त्रोत बताएं।

२. छह वार्ड तोडक़र नगर पालिका बनने से क्या मूलभूत समस्याओं का समाधान हो पाएगा?
३. कोलार को जिन प्रोजेक्ट्स के लिए नगर निगम के नाम केंद्र से राशि मिली है, उनका क्या होगा? स्मार्टसिटी की लाइट्स का काम कैसे होगा?

४. कोलार नगर पालिका की आय का स्त्रोत संपत्तिकर के अलावा कुछ नहीं है। कांग्रेस की जल्दबाजी से क्या कोलार का विकास अवरूद्ध तो नहीं होगा?
५. कोलार विकास के लिए ५००० करोड़ रुपए की जरूरत है। क्या मप्र सरकार इसके लिए अतिरिक्त बजट बनाएगा या स्पेशल पैकेज देगी?

६. क्या कोलार में सफाई कामगारों को १० सीवेज मशीनें, कचरा उठाने ४० गाडि़यों की व्यवस्था का बजट में प्रावधान होगा क्या?
७. कोलार को अल्ट्रा मॉडर्न सिटी की घोषणा मप्र की पूर्व सरकार ने की थी, उसका क्या होगा?

८. नगर पालिका बनने के बाद सरकारी कर्मचारियों के भत्ते, मकान किराए में कमी होगी। महानगर पालिका बनने का कोलार का सपना टूट जाएगा, उसका क्या करेंगे?
९. नगर पालिका बनने के बाद इसमें शामिल वार्डों के पार्षदों का संवैधानिक भविष्य क्या होगा? बचे कार्यकाल में उनकी भूमिका कैसी रहेगी?

१०. कोलार को राजनीति का शिकार न बनाएं। इसकी संपत्ति सार्वजनिक करें, जिससे कल से हमारे सामने कोई संकट खड़ा न हो। ५००० करोड़ का स्पेशल पैकेज दें।

कोट्स
कांग्रेस के नेताओं के मांग पर नगर निगम का विभाजन का नगर पालिका का गठन किया जा रहा है। कांग्रेस अपने राजनीतिक कार्यकर्ताओं को उपकृत करने के लिए एेसा कर रही है। प्रशासन किसी दबाव या मजबूरी में है तो इसके लिए पहले जनमत संग्रह कराना चाहिए।

- रामेश्वर शर्मा, विधायक हुजूर