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आज के बाद 4 महीने नहीं होंगे शुभ कार्य, इस दिन से चढ़ी जाएगी घोड़ी

आज के बाद 4 महीने नहीं होंगे शुभ कार्य, इस दिन से चढ़ी जाएगी घोड़ी

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marrige muhurt

आज के बाद 4 महीने नहीं होंगे शुभ कार्य, इस दिन से चढ़ी जाएगी घोड़ी

भोपालः हिन्दू रीति के अनुसार विवाह के बाद पति पत्नि का रिश्त सात जन्मों के लिए अमर हो जाता है। लेकिन धर्म विज्ञान के अनुसार इसमें जीवनभर किसी तरह का वा विघ्न या बाधा ना आए इसके लिए शुभ महूर्त को बड़ी मान्यता दी गई है। ऐसी स्थिति में हिन्दू धर्म के मानने वालो को विवाह कार्य में मुहुर्त के शभ और अशुभ होने का खास ध्यान रखना होता है। ऐसे में आपको बता दें कि, अब शादी-विवाह के मुहूर्त समाप्त हो रहे हैं। 21 जुलाई को भड़लिया नवमी है, इसी दिन विवाह कार्य के लिए आखिरी श्रेष्ठ और अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इसके बाद 23 जुलाई को देवशयनी एकादशी से सभी मांगलिक कार्य बंद हो जाएंगे। इसके बाद फिर साल के अंत में 19 नवंबर से विवाह कार्यों के योग बनेंगे।

4 माह नहीं होते शुभ कार्य

पौराणिक शास्त्रों के अनुसार भडल्या नवमी विवाह के लिए अक्षय तृतीया के समान ही अबूझ मुहूर्त मानते हैं। इस दिन शादी कर सकते हैं। जिन लोगों के विवाह मुहूर्त नहीं निकल पाता, वह इस दिन विवाह कर सकते हैं, इस दिन के उपलक्ष्य में भी यह मान्यता है कि, दंपत्ति के वैवाहिक जीवन में कोई व्यवधान उतपन्न नहीं होता। भारत के अन्य हिस्सों में इसे दूसरों रूपों में मनाया जाता है। 27 से चातुर्मास शुरू होने जा रहा है। ऐसे में दो मलमास भी आएंगे। भड़लिया नवमी पर सर्वार्थ सिद्धि योग भी है। इसके बाद देवशयन और चातुर्मास शुरू हो जाने से विवाह नहीं हो सकेंगे। आपको बता दें कि चातुर्मास के 4 माह विवाह और अन्य शुभ कार्य नहीं किए जाते। देव उठनी ग्यारस पर देवताओं के जागने पर चातुर्मास समाप्त होगा। देवों के जागने पर अबूझ मुहूर्त में लग्न कार्य, खरीदारी और अन्य शुभ काम शुरु होंगे।

इन्होंने की सीधी बात

पंडित श्याम किशोर शर्मा के अनुसार, नए परिवार के बंधन की रचना के लिए होने वाले विवाह संस्कार शुभ मुहूर्त में करने के लिए सनातन धर्म के लोगों को अच्छे मुहूर्त की तलाश रहती है। इसके लिए जुलाई में 21 को सर्वार्थ सिद्धि योग में सबसे ज्यादा विवाह होने हैं। इसके बाद, फिर देवोत्थान एकादशी 19 नवंबर को अबूझ मुहूर्त से शादियों की शुरुआत होगी। उन्होंने बताया कि, देव उठनी ग्यारस के बाद नवंबर में विवाह का कोई शुभ मुहूर्त नहीं है। सकरात से शुरु होने वाले शुभ मुहूर्त जनवरी, फरवरी और मार्च में होंगे।