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MP Weather: मध्यप्रदेश में फिर बदलेगा मौसम, 45 जिलों में यलो अलर्ट, भारी बारिश की भी चेतावनी

Heavy Rain Alert MP- भोपाल सहित मध्यप्रदेश के कई जिलों में सिर्फ बादल छाए हुए हैं, बारिश नहीं हो रही है...। कई जिले अब भी बारिश का इंतजार कर रहे हैं...। एक बार फिर मौसम विभाग ने भारी बारिश की चेतावनी का यलो अलर्ट जारी किया है...।
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भोपाल

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Manish Geete

Jul 20, 2026

IMD Weather Update

IMD Weather Update- भोपाल में जल्द मौसम बदलने वाला है। एक बार फिर बारिश का दौर शुरू हो सकता है। (फोटो-पत्रिका)

MP Monsoon Update- 30 दिनों के इंतजार के बाद बारिश कब होगी, यह सवाल सभी पूछ रहे हैं। भोपाल स्थित मौसम विभाग की सोमवार को जारी ताजा रिपोर्ट की बात करें तो जल्द ही भिंड, मुरैना, अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर और टीकमगढ़ में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। जबकि प्रदेश के 45 जिलों में कहीं-कहीं झंझावत और वज्रपात और झोंकेदार हवाएं चलने की चेतावनी मौसम विभाग ने दी है। मौसम विभाग ने इसके लिए यलो अलर्ट जारी किया है।

मध्यप्रदेश का मौसम एक बार फिर बदलने की उम्मीद है। पिछले दिनों मौसम वैज्ञानिकों ने संभावना जताई थी कि बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने से मध्यप्रदेश में एक बार फिर मौसम बदलेगा और मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो सकता है। लेकिन, अब भी लोग मानसून के दोबारा से सक्रिय होने का इंतजार कर रहे हैं। इस बीच मौसम विभाग ने सोमवार को ताजा बुलेटिन जारी कर पूरे प्रदेश के लिए यलो अलर्ट जारी किया है।

शहडोल बना वर्षा का केंद्र

पिछले 24 घंटों में शहडोल में अति भारी वर्षा दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त अनूपपुर, कटनी, सतना और मैहर में भारी बारिश रिकॉर्ड हुई। चनौड़ी (शहडोल) में 122 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि बिलहरी (कटनी) में 85 मिमी, रामपुर बघेलान (सतना) 83 मिमी स्लिमनाबाद में 70 मिमी, रामनगर (मैहर) में 67 मिमी बारिश दर्ज हुई।

अब भी बारिश का इंतजार

पूर्वी मध्य प्रदेश इस समय मानसून की सबसे सक्रिय पट्टी में स्थित है। इसके विपरीत भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, मंदसौर, नीमच, खरगोन, बुरहानपुर, विदिशा, राजगढ़, शाजापुर, मुरैना, भिंड और दतिया सहित पश्चिमी एवं उत्तर-पश्चिमी जिलों में वर्षा अत्यंत कम या नगण्य रही।

बदलेगा भोपाल का मौसम

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्व मौसम वैज्ञानिक शैलेन्द्र कुमार नायक ने बताया कि मौसम का आकलन सामान्यतः अधिकतम तापमान, न्यूनतम तापमान और दैनिक वर्षा तक सीमित माना जाता है। वास्तविक मौसमीय व्यवहार को समझने के लिए 24 घंटे के दौरान होने वाले परिवर्तन अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। भोपाल के 21 जून से 20 जुलाई 2026 तक के मौसम का अध्ययन दैनिक आंकड़ों के आधार पर किया गया। यह विश्लेषण दर्शाता है कि मानसून केवल वर्षा का नाम नहीं है। बादलों की प्रकृति, नमी, पवन, वायुदाब, दृश्यता, गरज-चमक तथा दिन-रात के दौरान मौसम में होने वाले परिवर्तन मिलकर मानसून की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत करते हैं।

लगातार बादलों का प्रभाव

नायक ने बताया कि पूरे 30 दिनों से आकाश का अधिकांश समय बादलों से ढका रहा। यह स्थिति दर्शाती है कि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आने वाली नम मानसूनी हवाएं लगातार मध्य भारत तक पहुंच रही थीं और भोपाल उनके प्रभाव क्षेत्र में बना रहा।

पूर्वी मध्यप्रदेश के लिए संकेत

20 जुलाई की सुबह के सिनॉप्टिक विश्लेषण के अनुसार मानसून द्रोणी श्रीगंगानगर से होते हुए उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के रास्ते उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी तक सक्रिय बनी हुई है। इसके साथ पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी और उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश के ऊपर ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण तथा उससे मध्य भारत होते हुए उत्तर-पूर्व अरब सागर तक फैली ऊपरी ट्रफ बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी मध्य भारत तक पहुँचा रही है। दक्षिण-पश्चिम मध्य प्रदेश के ऊपर विद्यमान ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण अब कमजोर पड़ चुका है। यही कारण है कि पश्चिमी मध्य प्रदेश में वर्षा का विस्तार अपेक्षाकृत सीमित रहा।