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विदेश से ली MBBS डिग्री, अब कंपाउंडर का कर रहे काम

भविष्य पर संकट: देश में प्रैक्टिस करने स्क्रीनिंग टेस्ट पास करना जरूरी...

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MBBS Digree

विदेश से ली MBBS डिग्री, अब कंपाउंडर का कर रहे काम

भोपाल @प्रवीण श्रीवास्तव

मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए नीट यूजी काउंसिलिंग अंतिम चरण में हैं। जिन छात्रों को दाखिला नहीं मिला, उन्हें विदेशों से एमबीबीएस कराने का झांसा देने वाली एजेंसियां सक्रिय हैं। ये उजबेकिस्तान, यूक्रेन, किरगिस्तान, कजाकिस्तान और मलेशिया से बीस लाख रुपए में एमबीबीएस करानेे का लालच दे रहे हैं।

इन देशों की डिग्री भारत में मान्य नहीं है। छात्रों को भारत में प्रैक्टिस करने के लिए केन्द्र सरकार का स्क्रीनिंग टेस्ट या फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट (एफएमजी) टेस्ट पास करना होता है। अधिकतर छात्र इस टेस्ट में फेल हो जाते हैं। इन्हें मजबूरन अस्पतालों में कंपाउंडर या इसी तरह के अन्य पदों पर काम करना पड़ रहा है।

ऐसे चल रहा रैकेट
शहर में ऐसी आधा दर्जन एजुकेशन एकेडमी हैं, जो इन शहरों में एमबीबीएस कराने की बात करती है। इनमें से तीन एमपी नगर, दो अरेरा कॉलोनी और एक लाल घाटी में हैं।

यही नहीं अब इन संस्थाओं ने बांग्लादेश और म्यांमार जैसे देशों से एमबीबीएस का प्रचार करना भी शुरू कर दिया है।

पासपोर्ट से लेकर सभी दस्तावेजों का ठेका
इन संस्थाओं के एजेंट इन दिनों मेडिकल कॉलेज के बाहर छात्रों पर नजर रख रहे हैं। वे विदेश से डिग्री के लिए छात्रों का पासपोर्ट, वीजा से लेकर पांच साल तक रहने खाने की व्यवस्था करने का भी ठेका लेते हैं।

क्या होता है स्क्रीनिंग टेस्ट
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआइ) इन छात्रों का तब मान्यता देता है, जब ये स्क्रीनिंग टेस्ट पास कर लेते हैं। नेशनल बोर्ड ऑफ ऐक्रेडिएशन द्वारा आयोजित यह टेस्ट साल में दो बार लिया जाता है ।

केस-01
कोलार महाबलीपुरम में रहने वाले प्रतीक सक्सेना ने 2014 में उजबेकिस्तान से एमबीबीएस किया था। तीन साल तक स्क्रीनिंग टेस्ट दिया, लेकिन पास नहीं हो सके। अब एक निजी अस्पताल में मैनेजमेंट संभाल रहे हैं।

केस-02
अरेरा कॉलोनी के रियाज खान ने यूक्रेन से एमबीबीएस किया। पांच साल से स्क्रीनिंग टेस्ट दे रहे हैं। पास नहीं हुए तो अब बीएचएमएस कर रहे हैं। साथ-साथ एक अस्पताल में बतौर कंपाउंडर सेवाएं भी दे रहे हैं।

संस्थाएं यूं लेती हैं ठेका
20 लाख रु.: कोर्स फीस
02 लाख रु.: पासपोर्ट वीजा और अन्य दस्तावेज
15 लाख रु.: रहना खाना
05 लाख रु.: अन्य खर्च
41 को लाइसेंस
शहर से पांच सालों में 2000 से ज्यादा छात्रों ने इन देशों से एमबीबीएस की डिग्री ली, लेकिन इनमें से 41 छात्रों को ही प्रैक्टिस की अनुमति मिली। बाकी कम्पाउंडर व प्रबंधन के काम कर रहे हैं।

विदेश से एमबीबीएस करने वालों को स्क्रीनिंग टेस्ट देना होता है। इसको पास किए बिना प्रैक्टिस नहीं की जा सकती। हर साल कई छात्र टेस्ट देते हैं।
- डॉ. सुबोध मिश्रा, अध्यक्ष एमपीएमसी