
Lok Sabha Elections 2024 : मध्यप्रदेश में कुछ लोकसभा सीटें ऐसी हैं जहां निर्वाचन आयोग, राजनीतिक दलों के प्रयास फेल हो चुके हैं। यहां मतदान प्रतिशत कम रहता है। इससे पूरे प्रदेश का औसत मतदान प्रतिशत भी गिर जाता है। यह संसदीय सीटें चंबल, बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र की भिंड, मुरैना, ग्वालियर, गुना, सागर और रीवा हैं। इन लोकसभा सीटों में से 2019 में गुना को छोड़ दें तो कभी भी 65 प्रतिशत से ज्यादा वोटिंग नहीं हुई। दूसरी ओर प्रदेश की कई आदिवासी बहुल सीटें ऐसी हैं जहां 85 फीसदी के करीब मतदान पहुंच जाता है।
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में अभी तक का सबसे ज्यादा 71.19 प्रतिशत मतदान हुआ। इसके बावजूद भिंड, रीवा, ग्वालियर और मुरैना में 60 प्रतिशत के आसपास ही मतदान हुआ। भिंड में 55 प्रतिशत से आगे नहीं बढ़ पाया। ऐसा तब है जब चुनाव आयोग लगातार स्वीप गतिविधियों के माध्यम से मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित कर रहा है। इस पर करोड़ों रुपए भी खर्च हो रहे हैं। राजनीतिक दल भी अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से वोटर्स को मतदान के लिए प्रेरित करते हैं। इसके बावजूद इन क्षेत्रों के लोग मतदान करने नहीं जाते।
राजनीतिक विश्लेषक विजयदत्त श्रीधर के अनुसार यह ऐसे क्षेत्र हैं जहां लोगों में दबंगई है। वोटिंग के लिए प्रेरित करने को विशेष प्रयास की जरूरत हैं, लेकिन राजनीतिक दलों के प्रचार में अब वह दम नहीं रहा। लोगों को जब पार्टियां संपर्क कर विशेष महसूस कराएंगी तो वोटिंग प्रतिशत बढ़ सकता है। दूसरा कारण गर्मी है। यह ऐसे क्षेत्र हैं जहां गर्मी तेज रहती है, इसलिए भी लोग नहीं निकलते। इसके अलावा शादी सीजन भी वजह है। आयोग को विवाह मुहूर्त के दिनों में वोटिंग नहीं कराना चाहिए।
मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए गतिविधियां कराई जा रही हैं। गर्मी से निपटने सभी बूथों पर छांव, पेयजल और प्राथमिक उपचार की भी व्यवस्था कराई गई है। निश्चित तौर पर मतदान प्रतिशत बढ़ेगा। अनुपम राजन, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मध्यप्रदेश
Published on:
25 Apr 2024 09:39 am
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