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BJP Candidates List 2024: BJP की पहली लिस्ट जारी, क्यों कट गया प्रज्ञा सिंह ठाकुर का टिकट ?

BJP Candidates List 2024: तालों का शहर भोपाल... नवाबों का शहर भोपाल... एशिया की सबसे बड़ी और छोटी मस्जिद का शहर भोपाल... मध्यभारत की राजनीति में हमेशा से चर्चित रहा है। भोपाल ने देश को शंकर दयाल शर्मा जैसा राष्ट्रपति दिया।

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Pragya Singh Thakur

यहां से उमाभारती भी सांसद रहीं जो बाद में मप्र की मुख्यमंत्री बनीं। इसी तरह कैलाश जोशी भी यहां का प्रतिनिधित्व करने के बाद सीएम बने। इस बार के चुनाव में भाजपा ने यहां की सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर (Pragya Singh Thakur) का टिकट काटकर शहर के पूर्व महापौर आलोक शर्मा को मैदान में उतारा है। भोपाल लोकसभा सीट को भाजपा का गढ़ माना जाता है। यहां आखिरी बार 1984 के चुनाव में भाजपा हारी थी। उसके बाद से यहां कमल ही खिलता रहा है।

शर्मा के पक्ष में था फीडबैक

सत्ता, संघ और संगठन से बेहतर तालमेल के चलते राजधानी के पूर्व मेयर आलोक शर्मा को शीर्ष नेतृत्व ने चुनावी मैदान में उतारा है। स्थानीय फीडबैक भी शर्मा के पक्ष में था। हाल ही में विधानसभा चुनाव में उत्तर विधानसभा से हार का सामना करने के बावजूद आलोक शर्मा लगातार राजनीति में सक्रिय थे। राजधानी की समस्याओं को लेकर वे जूझते रहे। शनिवार को भी संगठन से मतदाताओं को जोडऩे के लिए रैली में शामिल होकर गली-गली घूम रहे थे। तभी शाम के वक्त उन्हें भाजपा का लोकसभा चुनाव प्रत्याशी बनाए जाने की सूचना मिली।

परिवार में जश्न का माहौल

भोपाल लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाए जाने के बाद भाजपा प्रत्याशी आलोक शर्मा के प्रोफेसर कॉलोनी एवं गुर्जरपुरा स्थित निवास पर जश्न का माहौल है। शनिवार शाम से उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। पिता गौरी शंकर शर्मा, भाई संजय शर्मा सहित परिजनों से मिलकर लोग अपनी भावनाएं व्यक्त करते नजर आए।

क्यों कटा साध्वी प्रज्ञा का टिकट

भोपाल सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के विवादित बयान, केंद्रीय नेतृत्व की नाराजगी और स्थानीय मुद्दों से लगातार दूरी बनाए रखना साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का टिकट कटने की सबसे बड़ी वजह बना। स्थानीय स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं की सुनवाई नहीं होने और स्थानीय कार्यक्रमों को तवज्जो नहीं देने से कार्यकर्ता भी निराश थे।

जब प्रज्ञा ठाकुर से नाराज हुए थे पीएम मोदी

प्रज्ञा को बीजेपी ने 2019 में रक्षा संबंधी 21 सदस्यीय संसदीय कंसल्टेटिव कमिटी में शामिल किया था लेकिन उनके एक बयान के बाद उन्हें इस कमिटी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था. उन्होंने संसद भवन में नाथू राम गोडसे को राष्ट्रभक्त करार दिया था. जिसकी न केवल विपक्ष ने आलोचना की थी बल्कि सात दिन के अंदर ही प्रज्ञा को रक्षा संबंधी कमिटी से हटा दिया गया था. इसके अलावा उन्हें बीजेपी की संसदीय दल की बैठक में भी हिस्सा नहीं लेने दिया गया था.

प्रज्ञा अपने इस बयान को लेकर पार्टी के भीतर भी आलोचना का शिकार हुई थीं. यहां तक कि पीएम मोदी ने भी कड़े शब्दों में इसकी निंदा की थी. पीएम मोदी ने सख्त लहजे में कहा था कि प्रज्ञा ने भले ही माफी मान ली हो लेकिन मैं दिल से उन्हें कभी माफ नहीं कर पाउंगा।