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कांग्रेस में विद्रोह के बीच फिर शुरू हुई चेहरे को लेकर चर्चा!

कांग्रेस में विद्रोह के बीच फिर शुरू हुई चेहरे को लेकर चर्चा!...

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कांग्रेस में विद्रोह के बीच फिर शुरू हुई चेहरे को लेकर चर्चा!

भोपाल। MP में होने वाले विधानसभा के चुनावों से पहले मंदसौर जिले में पुलिस गोलीबारी में छह किसानों की मौत की पहली सालगिरह पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी मध्यप्रदेश आ रहे हैं। लेकिन राहुल के आने से पहले ही जहां कांग्रेस में दरारें पड़ने के साथ ही बगावत की स्थिति उत्पन्न हो गई और कई कांग्रेस से जुड़े लोगों ने इस्तीफा भी दे दिया।


वहीं अब एक बार फिर से सीएम के चेहरे को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। दरअसल कई जानकारों को उम्मीद है कि यहां आने के बाद राहुल मध्यप्रदेश में कांग्रेस के चेहरे की ओर साफतौर पर इशारा कर सकते हैं।

लगातार चेहरे की चर्चा में रहे हैं सिंधिया...
पूर्व में ज्योतिरादित्य सिंधिया ही मुख्य रूप से कांग्रेस के चेहरे के रूप में प्रचारित रहे, इस समय कमलनाथ द्वारा तक उनका समर्थन किया गया था। लेकिन इसके बाद नर्मदा यात्रा से वापस लौटे दिग्विजय सिंह के बयानों के बीच पार्टी में बड़ा फेरबदल किया गया।

जिसके तहत सिंधिया को जहां चुनाव की कमान सौंपी गई वहीं कमलनाथ को अध्यक्ष का पद प्रदान किया गया। जिसके बाद चेहरे की चर्चा पर विराम सा लग गया। लेकिन इसके चंद दिनों बाद ही कांग्रेस में सामने आए विद्रोह ने पुन: चेहरे की चर्चा को सामने ला दिया। चेहरे को लेकर यह चर्चाएं मुख्य रूप से कांग्रेस कार्यकर्ताओं सहित जनता के बीच में खूब सुनने को मिल रही हैं।

चेहरा लाने की परेशानी...
जानकारों की माने तो कांग्रेस चेहरा घोषित कर सकती है। परंतु एक तरफ आंतरिक मतभेद और इसके अलावा भाजपा की बड़े नेताओं को घर में ही घेरने की रणनीति से बचने के लिए भी कांग्रेस चेहरा सामने लाने से बच रहीं है।

ये है स्थिति...
जानकारों की माने तो पूर्व में कांग्रेस में मुख्यरूप से कमलनाथ और सिंधिया में ही टक्कर मानी जा रही थी। लेकिन दिग्विजय के नर्मदा यात्रा के बाद सामने आने के बाद स्थितियों में फिर बदलाव आ गया है।

ऐसे में राजनीति के जानकारों का मानना है कि यदि मध्यप्रदेश में कांग्रेस जीत पाती है तो अबकि बार फिर दिग्विजय सिंह की ही सीएम चयन में चलेगी। वहीं जानकार ये भी मानते हैं पिछले दिनों दिग्विजय के पुत्र और सिंधिया के बीच हुई बैठक कहीं न कहीं सिंधिया के कांग्रेस का चेहरा बनने के लिए मददगार साबित हो सकता है।

राहुल के भरोसे...
कुछ जानकारों का यह भी मत है कि राहुल गांधी जल्द ही मध्यप्रदेश दौरे के समय कांग्रेस के चेहरे की घोषणा कर सकते हैंं। ऐसे में कमलनाथ या सिंधिया में से ही किसी को ही चेहरे के रूप में बताया जा सकता है।

वहीं कुछ जानकारों का यह भी कहना है कि कांग्रेस के दोनों लोकसभा सांसदों की अपने क्षेत्र में खास पकड़ होने के चलते इन्हें चुनाव अभियान में तो लगाया जा रहा है, लेकिन ऐसा लगता है कि चेहरे के मुद्दे पर कांग्रेस में कुछ और ही विचार भी चल सकते हैं।

दिग्विजय की परीक्षा...
दिग्विजय सिंह के नेतृत्व वाली एमपी राज्य कांग्रेस कांग्रेस समन्वय समिति के सदस्य के रूप में पूर्व पार्टी विद्रोही राजेंद्र सिंह गौतम को नामांकित करने वाले केंद्रीय पार्टी नेतृत्व से नाराज, स्थानीय नेताओं के एक समूह ने पार्टी में संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है।

इन नेताओं में मंदसौर जिला पार्टी के उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह गुर्जर और जिला महिला कांग्रेस प्रमुख बाबिता सिंह तोमर शामिल हैं। उन्हें पूर्व लोकसभा सदस्य मीनाक्षी नटराजन के करीब माना जाता था। सुवासरा सीट के पार्टी विधायक हरदीप सिंह डांग भी हैं, जो मंदसौर और नीमच जिलों के एकमात्र कांग्रेस विधायक होते हैं, इन्होंने एमपी कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधि के रूप में इस्तीफा दे दिया है और मांग की है कि नटराजन को मंदसौर से संबंधित पार्टी की निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाए।

सामने आ रही सूचनाओं के अनुसार दिग्विजय सिंह की अगुवाई वाली एमपी कांग्रेस की समन्वय समिति के 13 सदस्यों के बीच गौतम को नामित करने के पार्टी हाई कमांड के फैसले का विरोध करने के लिए गुर्जर ने अपनी पद से नीचे उतरने के साथ मंगलवार को रिपोर्ट की इस्तीफा दे दी।

गुर्जर का कहना था कि राजेंद्र सिंह गौतम को कांग्रेस की ऐसी एक महत्वपूर्ण समिति पर कैसे शामिल किया जा सकता है, इस तथ्य को देखकर कि उन्हें 2009 में पार्टी से पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए निष्कासित कर दिया गया था।

2009 में गौतम ने लोकसभा चुनावों में मंससौर के पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार नटराजन के खिलाफ एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था, जिसके बाद उन्हें छह साल तक निष्कासित कर दिया गया था।