सिर्फ भोलेनाथ, विष्णु, ब्रह्मा और गणेश ही उसके आतंक से बचे रह सकते थे। गजमुख चाहता था कि सभी देवी-देवता उसकी पूजा करने लगे। इससे परेशान होकर सभी देवगण शिवजी, विष्णु और ब्रह्मा की शरण में पहुंचे...। शिवजी ने गणेशजी को असुर गजमुख को रोकने के लिए भेजा। गजमुख नहीं माना और गणेशजी को गजमुख के साथ युद्ध करना पड़ा। इस युद्ध में गजमुख बुरी तरह से घाल हो गया, लेकिन तब भी वह नहीं माना।