
Janmashtami 2022
भोपाल। हिंदू पंचांग के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था। इस दिन लोग कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाते हैं। आज सभी जगह कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी। इस दिन अलग-अलग तरह से कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा की जाती है। श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु के अवतार और 16 कलाओं का स्वामी माना जाता है। द्वापरयुग में लड्डू गोपाल से लेकर भगवान श्रीकृष्ण बनने तक उन्होंने कई लीलाएं लोगों के समक्ष प्रस्तुत की। श्रीकृष्ण को दुनियाभर में कई नामों से पुकारा जाता है। मथुरा-वृंदावन में उन्हें एक शरारती और मोहक बच्चे की तरह प्रेम किया जाता है और कन्हैया कहा जाता है। वहीं, द्वारिका में द्वारिकाधीश श्रीकृष्ण के नाम से पूजा जाता है। कन्हैया की हर लीला के पीछे कोई न कोई संदेश छिपा है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर जानते हैं, श्रीकृष्ण से जुड़ी रोचक जानकारी-
-भगवान कृष्ण के 108 नाम हैं, जिनमें गोविंद, गोपाल, घनश्याम, गिरधारी, मोहन, बांके बिहारी, बनवारी, चक्रधर, देवकीनंदन, हरि और कन्हैया प्रमुख हैं।
-देवकी की सातवीं संतान बलराम और आठवीं संतान श्रीकृष्ण थे। भगवान ने बाकी छह को भी देवकी से मिलवाया था।
-धर्मग्रंथों के अनुसार, श्रीकृष्ण की 16108 पत्नियां थीं, जिनमें से आठ उनकी पटरानियां थीं। उनके नाम रुक्मिणी, जाम्बवंती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रबिंदा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा थे। बाकी वे रानियां थीं, जिनका भौमासुर ने अपहरण कर लिया था। भौमासुर से उनकी जान श्रीकृष्ण ने बचाई तो वे कहने लगीं, अब हमें कोई स्वीकार नहीं करेगा तो हम कहां जाएं। तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अपनी पत्नी का दर्जा देकर उनका जिम्मा उठाया।
-अपने गुरु संदीपन को गुरु दक्षिणा देने के लिए भगवान कृष्ण ने उनके मृत बेटे को जीवित कर दिया था।
-श्रीकृष्ण से भगवद्गीता सबसे पहले सिर्फ अर्जुन ने ही नहीं, बल्कि हनुमानजी और संजय ने भी सुनी थी। हनुमानजी कुरुक्षेत्र के युद्ध के दौरान अर्जुन के रथ में सबसे ऊपर सवार थे।
-श्रीकृष्ण के अवतार का अंत एक बहेलिया के तीर से हुआ माना जाता है। जब वे एक पेड़ के नीचे बैठे थे तो बहेलिए ने उनके पैर को चिड़िया समझकर तीर चलाया। तब तीर कृष्ण के पैर में लगा और उसके बाद उन्होंने शरीर छोड़ दिया।
किसने किया था श्रीकृष्ण का नामकरण?
हर वर्ष भादो मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को जन्माष्टमी मनाई जाती है। इस दिन पूरे धूमधाम से कान्हा की पालकी सजाई जाती है और उनका शृंगार किया जाता है। कृष्ण ने माता देवकी के गर्भ से जन्म लिया था, लेकिन उनका लालन-पालन मां यशोदा ने किया था। आइए जानते हैं, भगवान कृष्ण का नामकरण किसने किया था-
ऋषि गर्ग यदुवंश के कुलगुरु थे। पुराणों के अनुसार, उन्होंने ही कृष्ण भगवान का नामकरण किया था। एक बार ऋषि गर्ग, गोकुल में पधारे, जहां नंदबाबा और यशोदा मां ने उनका खूब आदर-सत्कार किया। ऋषि गर्ग ने बताया कि वे पास के गांव में एक बालक का नामकरण करने आएं हैं और रास्ते में मिलने के लिए इधर आ गए। यह सुनकर मां यशोदा ने उनसे अपने बालक का भी नामकरण करने का अनुरोध किया। कहा जाता है कि नामकरण से पहले बाल-गोपाल की मनमोहक छवि को देखकर ऋषि गर्ग अपनी सुधबुध खो बैठे थे।
पहली नजर में ही ऋषि गर्ग को पता लग गया था कि यह कोई साधारण बालक नहीं है। उन्होंने मां यशोदा से कहा कि आपका बालक अपने कर्मों के अनुसार कई नामों से जाना जाएगा। वे समझ गए थे कि बाल-गोपाल के रूप में साक्षात् ईश्वर ने जन्म लिया है, लेकिन उन्होंने यह भेद सबके सामने नहीं खोला। ऋषि गर्ग ने कहा कि यह बालक अब तक कई अवतार ले चुका है और इस बार इसका जन्म काले रूप में हुआ है, इसलिए इसका नाम कृष्ण होगा। मां यशोदा को यह नाम पसंद नहीं आया और उन्होंने ऋषि से कोई और नाम रखने को कहा। तब ऋषि ने कहा कि आप इन्हें कन्हैया, कान्हा, किशन या किसना कहकर भी बुला सकते हैं। तभी से श्रीकृष्ण को इन नामों से भी जाना जाने लगा।
Published on:
19 Aug 2022 03:12 pm
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