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आजा बिटिया रानी तुझको मैं सुला दूं, मीठी-मीठी लोरा गा दूं…

बाल साहित्य शोध केंद्र में 'लोरी' गीतों का आयोजन  

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आजा बिटिया रानी तुझको मैं सुला दूं, मीठी-मीठी लोरा गा दूं...

भोपाल। चांद का झूला हो तारों की डोरी हो, बादलों का बिछौना हो, सोजा मेरे दीनू और अक्की। बच्चे को प्यार भरी थपकी देकर मां लोरी गाकर उसे सुलाती है...। शालिनी खरे ने बाल साहित्य शोध केंद्र में आयोजित लोरी गीत में ये रचना सुनाकर श्रोताओं की वाहवाही लूटी।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. उषा शर्मा ने कहा कि लोरियां लिखी जानी चाहिए। ये बच्चों को संस्कारित करने में सहायक होती है। हालांकि समय के साथ अब इस ओर कम ही ध्यान दिया जा रहा है। युवा रचनाकारों को भी इस तरफ ज्यादा ध्यान देना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. आशा गौड़ ने की। वहीं कार्यक्रम का संचालन अनिता श्रीवास्तव ने किया।

कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए श्यामा गुप्ता ने नन्हा है मेरा ये राजदुलारा, सोने का मांगे ये वांका हिंडोला... से सबका मन मोह लिया। वर्षा चौबे ने मधुर अंदाज में सपने में खोजा रे मेरे लाडले सोजा रे... लोरी प्रस्तुत की।

इसके बाद नविता बोहरी ने आजा बिटिया रानी तुझको मैं सुला दूं, मीठी-मीठी लोरा गा दूं... द्वारा बच्चे को सुलाने की मनुहार की। वहीं, मधुबाला पांडेय ने परियों को पुकारते हुए मेरे लाडलो स जाओ, नन्हीं परियां तुम्हें पुकारे सपनों में खो जाओ... पेश की।

अगली कड़ी में मंजुलता श्रोती ने तो लोरी में दादाजी का जिक्र करते हुए नजरिया लाग रही मुन्नी को, नजरिया दादाजी की लागी रे... सुनाकर सबको सुनहरे दिनों की याद दिला ली। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए और मनोरमा चोपड़ा आजा री निदिया नैनो में सपने सजा जा रही निदिया प्रस्तुत कर खूब वाह-वाही लूटी। इसके बाद मंच अनिल अग्रवाल ने संभाला।

अनिल ने बच्चे को सपनों की सैर कराती लोरी पढ़ीं। इस रचना के बोल मीठे सपनों में तू खों जाए, हौले से फिर मुस्कुराए...। इस रचना से उन्होंने श्रोताओं को आनंदित कर दिया।इस अवसर पर डॉ. क्षमा पाम्डेय, डॉ. जय जय राम आनंद, अर्चना मुखर्जी और टीएस ठाकुर ने भी लोरियां सस्वर प्रस्तुत कीं।