2 अप्रैल 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

एमपी में गेहूं के रेट में 700 रुपए प्रति क्विंटल तक की कमी, किसानों की बढ़ी मुश्किलें

दोहरी मुसीबत में किसान: पहले खेती के लिए, अब शादी समेत अन्य आयोजनों के लिए लेना पड़ रहा कर्ज

3 min read
Google source verification
Loss of up to ₹700 per quintal in wheat crops in MP

Loss of up to ₹700 per quintal in wheat crops in MP (Photo Source - Patrika)

Wheat- मध्यप्रदेश में गेहूं उत्पादक किसानों की मुश्किलें बढ़ती जा रहीं हैं। उन्हें पहले खेती के लिए कर्ज लेना पड़ा जब​कि अब घर में बच्चों की शादी आदि के लिए बाजार से पैसे उठाने पड़े रहे हैं। प्रदेश में गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीदी प्रारंभ नहीं होने से ये स्थिति बनी है। राज्य सरकार ने गेहूं खरीदी की तारीख तीसरी बार बढ़ाकर भोपाल, नर्मदापुरम, इंदौर, उज्जैन संभाग में 10 अप्रेल कर दी है जबकि बाकी के संभागों में खरीदी 15 अप्रेल से शुरु होगी। इससे किसानों को दोहरी मार पड़ रही है। उन्हें मजबूरी में अपनी फसल बेहद कम रेट पर बेचनी पड़ रही है। किसान, एमएसपी से 7 सौ रुपए प्रति क्विंटल तक कम रेट पर गेहूं बेच रहे हैं जिससे उन्हें खासा नुकसान हो रहा है।

राज्य सरकार ने गेहूं खरीदी से जुड़े मामलों के लिए कैबिनेट मंत्रियों की समिति बनाई है। इसमें खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के मंत्री गोविंद सिंह राजपूत भी हैं। उन्होंने बताया कि सोमवार को समिति सदस्यों ने वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए बैठक की। सभी पहलुओं की समीक्षा करते हुए गेहूं खरीदी की तारीख बढ़ाने का निर्णय लिया।

बताया जा रहा है कि अमरीका-ईरान युद्ध से मध्यप्रदेश में बारदाना समेत खरीदी में लगने वाली अन्य सामग्री का संकट गहराता जा रहा है। इस वजह से गेहूं खरीदी की तारीख फिर बढ़ाई गई है।

भोपाल के थोक कारोबारी संजीव जैन बताते हैं कि अभी ओले-बारिश के कारण मंडियों में गेहूं की आवक कम है। किसान एमएसपी पर गेहूं बेचने का इंतजार कर रहे हैं। सिर्फ वे उत्पादक मंडियों में गेहूं ला रहे हैं, जिन्हें रुपयों की सख्त जरूरत है। अभी जो गेहूं आ रहा है उसमें नमी है। मौसम खुलने और तेज धूप पडऩे पर क्वालिटी या स्टॉक में रखने वाले गेहूं की आवक होगी। मालवा पट्टी में 80 फीसदी कटाई हो चुकी है।

किसानों का दर्द, महज 18 सौ रुपए में बेच रहे गेहूं

सरकारी खरीदी शुरू होती तो किसानों को फायदा होता। सरकार ने बोनस मिलाकर गेहूं का प्रति क्विंटल मूल्य 2625 रुपए तय किया है। इधर किसानों को मंडियों और व्यापारियों को साधारण किस्म का गेहूं 1800 से 2200 रुपए प्रति क्विंटल में बेचना पड़ है। इस प्रकार किसानों को प्रति क्विंटल 700-800 रुपए तक का नुकसान हो रहा है।

किसान सुरेंद्र राजपूत का कहना है कि कम बारिश व सिंचाई के सीमित संसाधनों वाले छिंदवाड़ा, बैतूल समेत 20 प्रतिशत जिलों में हर साल बुवाई जल्दी होती है। कटाई फरवरी-मार्च में पूरी हो जाती है। छिंदवाड़ा में कृषि उपज मंडी में रेट 2300 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास हैं। उच्च गुणवत्ता वाले गेहूं की कीमत ज्यादा मिल रही है।

पहले खेती के लिए, अब शादी समेत अन्य किसानों आयोजनों के लिए लेना पड़ रहा कर्ज

छतरपुर के बलराम यादव ने बताया, 75 से 80 फीसदी किसान बैंकों, सहकारी समितियों से कर्ज लेकर खेती करते हैं। निजी बाजार से भी रुपए उठाते हैं। अदायगी मार्च अंत तक करनी होती है। विवाह व अन्य धार्मिक आयोजन के मुहूर्त जनवरी से शुरू हो जाते हैं। कई किसानों के घरों में विवाह हो चुके हैं। ज्यादातर के घरों में अप्रेल में शादियां हैं। इन सबके लिए कर्ज लेना पड़ रहा है।

खुले बाजार में गेहूं की ​विभिन्न वेरायटियों के दाम

मालवा शक्ति: 2150-2400
गेहूं 1544: 2300-2550
लोकवन: 2600-2750
डब्ल्यूएच: 2250-2350
शरबती—3500 से 4000 रुपए

बांग्लादेश ने की बारदाने में कटौती!

खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि बांग्लादेश ने भारत निर्यात होने वाले बारदाने में कटौती की है। प्लास्टिक बैग विकल्प था, लेकिन खाड़ी देशों में युद्ध के हालात के चलते वहां से भी सामग्री नहीं आ रही। इन करणों से गेहूं खरीदी में उपयोग की जाने वाली सामग्री नहीं मिल पा रही।