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AMAZING: इस ताजमहल में नवाब और बेगम के गले लगते ही होती थी बारिश

यहां जेठ-बैसाख के दिनों में भी सावन सा अहसास होता है। बेगम चाहती थीं कि सिद्दीक हसन और वो जब चाहें, बरसात ताजमहल में बरस जाए। 

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Juhi Mishra

Jan 16, 2017

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भोपाल। कम लोग जानते हैं कि मध्य प्रदेश की राजधानी और झीलों की नगरी भोपाल में भी एक ताजमहल बसता है और यह ताजमहल भोपाल की बेगम शाहजहां और नवाब सिद्दीक हसन की मोहब्बत से गुलजार जिंदगी की शुरुआत का गवाह है। शाहजहां बेगम का ख्वाब था कि वो ताजमहल से खुदा का घर देख सकें। इसीलिए बेगम ने एशिया की दूसरी सबसे बडी ताजुल मस्जिद की मीनारें खड़ी करवाईं। साथ ही ताजमहल के झरोखे भी इस तरह के बनवाए कि वहां से ताजुल मस्जिद साफ-साफ दिखाई दे। अब भी ताजमहल से मस्जिद का दीदार वैसे ही होता है।
Shahjahan begam

दो प्रेमियों के मिलन में बरस उठता था सावन
यहां जेठ-बैसाख के दिनों में भी सावन सा अहसास होता है। बेगम चाहती थीं कि सिद्दीक हसन और वो जब चाहें, बरसात ताजमहल में बरस जाए। इसलिए महल के सावन भादों के हिस्से को इस तरह से बनाया गया है कि इसके बीच से गुजरते वक्त दोनों तरफ झरने गिरते है, मानों दो प्रेमियों के मिलने पर बादलों ने भी बरसात कर उनका स्वागत किया हो।
Shahjahan begam

गुम हो रही इश्क की कहानियां
आज ये ताजमहल, एक बेगम की मोहब्बत की आखिरी निशानी लिए खामोश खड़ा है। एक बेगम की जिद में खड़ी हुई है ये इमारत। सदियों से गुमनाम और दफन हो रहीं हैं इसकी दीवारों में सिद्दीक हसन और शाहजहां बेगम के इश्क की कहानियां।

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