
राजीव जैन
भोपाल. किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए तैयार की जा रही योजनाओं में खानापूर्ति से उन्हें उतना लाभ नहीं मिल पाता, जितना उम्मीद की जाती है। यही हाल है एक जिला एक उत्पाद योजना का। उद्यानिकी विभाग ने 16 फीसदी टमाटर उगाने वाले देश के नंबर वन राज्य मध्यप्रदेश में योजना में 11 जिलों में चुन लिया। इनमें भी टमाटर उगाने वाले प्रदेश के टॉपटेन जिले धार, जबलपुर, कटनी, देवास और शाजापुर शामिल नहीं है। इन्हें छोड़कर दूसरी फसल ज्यादा उगाने वाले जिलों को शामिल कर लिया है। टमाटर अकेला ऐसा उदाहरण नहीं है आलू और प्याज भी 4-4 जिलों में चुना गया है।
इन जिलों में बताया टमाटर
रायसेन, अशोकनगर, शिवपुरी, दतिया, सागर, दमोह, कटनी, सतना, अनूपपुर, सिंगरौली और झाबुआ
हर साल बढ़ रहा रकबा और उत्पादन
टमाटर का उत्पादन और रकबा हर साल पहले से ही बढ़ रहा है। इस योजना के चिह्नित जिलों के बिना भी उत्पादन इतना ज्यादा है कि सीजन के समय किसानों को बेहतर भाव मे खरीददार नहीं मिलता। हालांकि अफसरों का तर्क है कि कुछ जिलों में टमाटर की वैरायटी खराब है। अब नई किस्म का आयातित टमाटर लगवाया जाएगा, जो केचअप जैसे अन्य उत्पाद बनाने के काम आ सके।
प्रदेश में टमाटर का रकबा और उत्पादन
वर्ष 2017-18 रकबा- 84526.18 उत्पादन- 2419276
वर्ष 2018-19 रकबा- 85412.36 उत्पादन- 2516078
वर्ष 2019-20 रकबा- 90971.04 उत्पादन- 2655294
(नोट- रकबा हैक्टेयर और उत्पादन मीट्रिक टन में।)
ऐसे समझिए जमीनी स्तर का हाल, धनिए की जगह चुना
अशोकनगर जिले में धनिए की फसल ज्यादा होती है, पर विभाग ने टमाटर चुन लिया। अभी साढ़े पांच सौ हेक्टेयर में टमाटर की फसल होती है। कलेक्टर ने इसे बदवाने के लिए पत्र भी लिखा है। टमाटर में कम रुचि से प्रधानमंत्री सूक्ष्म उन्नयन उद्योग योजना में 25 टमाटर केचअप यूनिट के लिए 14 किसानों ने ऑनलाइन आवेदन किया, लेकिन दो किसान ही डीपीआर दे सके, जिनके आवेदन लोन के लिए बैंक को भेज दिए।
पहले आम फिर टमाटर लेकिन तैयारी कुछ नहीं
सिंगरौली जिले में उद्यानिकी विभाग ने पहले आम चुना, बाद में ऐन मौके पर इसे बदलकर टमाटर कर दिया। इससे योजना पर काम धीमा है। योजना के लिए अभी तक सिर्फ किसानों को ही चिह्नित करके प्रशिक्षण की तैयारी हो पाई है। जबकि तय हिसाब से जनवरी में अब तक किसानों को लोन भी मिल जाना चाहिए था।
वर्जन
जिस जिले में जो उत्पाद अभी ज्यादा पैदा हो रहा है, अभी उसका चयन किया है। इसमें उन्हीं क्षेत्रों में प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने का प्रयास करेंगे। भविष्य में लगता है कि जलवायु और मिट्टी अन्य फल सब्जियों के लिए उपयुक्त है और उत्पादन भरपूर हो सकता है तो उस पर भी काम किया जाएगा।
डॉ. केएस किराड, अपर संचालक उद्यानिकी विभाग
प्रदेश में मिट्टी और जलवायु की उपयोगिता के हिसाब से जिलों में उत्पादों का चयन किया है। अभी तक भंडारण क्षमता में परेशानी थी पर सरकार तीन लाख मैट्रिक टन क्षमता कोल्ड चेन का विकास कर रही है। पहले चार हजार मैट्रिक टन कोल्ड स्टोरेज की क्षमता के लिए ही सब्सिडी थी अब दायरा घटाकर 500 मैट्रिक टन कर दिया है। प्रदेश में 164 नए फूड प्रोसेसिंग यूनिट को मंजूरी दी है।
भारत सिंह कुशवाह, उद्यानिकी मंत्री
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Published on:
13 Jan 2022 07:45 pm
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