15 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मां धूमावती जन्मोत्सव: ऐसे करेेंगे मां को प्रसन्न तो होगी हर मनोकामना पूरी

मां धूमावती जन्मोत्सव: ऐसे करेेंगे मां को प्रसन्न तो होगी हर मनोकामना पूरी

3 min read
Google source verification
bhopal, bhopal news, bhopal patrika, patrika news, maa dhoomavati, dhoomavati jyanti, pitambara peeth, datiya, mata parvati, shiv, bhagwan, god, tantra sadhna, tantra vidhya, dhoomavati jyanti 20th june 2018, dhumavati jyanti,

मां धूमावती जन्मोत्सव: ऐसे करेेंगे मां को प्रसन्न तो होगी हर मनोकामना पूरी

भोपाल। सनातन धर्म में जितना देवों का महत्व है, उतना ही महत्व देवियों का भी माना जाता है। एक ओर जहां देवों में भगवान शिव, विष्णु, गणेश, सूर्य,ब्रह्मा का महत्व माना गया है। वहीं देवियों में मां दुर्गा, पार्वती, लक्ष्मी, सरस्वती, काली आदि को भी इनके समतुल्य ही माना गया है। यहां तक की देवियों के बिना देवों की शक्ति के रूप में देवियों का ही महत्व माना जाता है।

इन देवियों में हर देवी का अपना अलग महत्व है, इन्हीं में से एक देवी मां धुमावति भी हैं। जिन्हें तंत्र की प्रमुख देवी के रूप में जाना जाता है। कल यानी 20 जून को मॉ धूमावती जयंती यानि जन्मोत्सव है। जो कि पूरे भारत में बड़ी ही धूमधाम से मनाई जाती है। इस दिन धूमावती देवी के पूजा, पाठ व सामूहिक जप का अनुष्ठान किया जाता है। मध्य्रप्रदेश की राजधानी भोपाल में भी धूमावती माता की जयंती धूम धाम से मनाई जाती है। इसके चलते कई लोग इस दिन दतिया स्थित पीताम्बरा पीठ मंदिर में दर्शन के लिए यहां से भी जाते है। इसके अलावा जो लोग बाहर नहीं जा पाते वे इस दिन भोपाल स्थित देवी मंदिरों में आकर माता की पूजा अर्चना करते हैं।

मान्यता के अनुसार इस दिन काले वस्त्र में तिल बांधकर मां धूमावती को चढ़ाने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इसके साथ ही यह भी मान्यताह है कि शादीशुदा स्त्री सीधे तौर पर मां धूमावती के दर्शन नहीं कर सकती। क्योंकि प्राचीन कथा के अनुसार मां धूमावती विधवा देवी है। जिसके चलते सुहागिनें माता का दर्शन केवल दूर से ही कर सकती है। माता के दर्शन से पुत्र व पति की रक्षा होती है। क्योंकि माता किसी भी रूप में हो वह हमेशा अपने बच्चों की रक्षा करती है।

माता धूमावती को लेकर कई कहानियां प्रचलित है। पुरणों के अनुसार माता पार्वती अपनी क्षुधा शांत करने भगवान शंकर के पास जाती है। उस समय भगवान ध्यान में लीन होते है। मॉ पार्वती के बार बार कहने पर भी जब भगवान शंकर नहीं सुनते तो देवी पार्वती एक गहरी सांस लेती है और सांस के द्वारा शंकर जी को निगल जाती है। भगवान शिव के गले में विष होने के कारण माता के शरीर से धुंआ निकलने लगता है। जिससे वे बहुत ही भयानक दिखने लगती है। तब भगवान शिव ने उनके इस रूप को धूमावती नाम दिया। साथ ही यह भी कहा कि अपने पति को निगलने के कारण तुम विधवा हो गई हो। इसलिए तुम्हें एक विधवा के रूप में ही पूजा जाएगा।

एक दूसरी कथा भी जो माता धूमावती के लिए प्रचलित है। वह यह कि एक बार माता पार्वती को बहुत तेज भूख लगी थी। उन्होंने भगवान शिव को भोजन की व्यवस्था करने को कहा। पर, समय बीतने पर भी भगवान शिव भोजन की व्यवस्था नहीं कर सकें, तब माता पार्वती भूख से व्याकुल हो अपने ही पति को निगल गई। भगवान को निगलने से उनके पूरे शरीर से धुआं निकलने लगा। तब माया से भगवान शिव उनसे कहते है कि देवी तुम्हारा शरीर धुएं से व्याप्त है। जिसके चलते उनका नाम धूमावती होगा। साथ ही तुम्हें एक विधवा के रूप में पूजा जाएंगा क्योंकि मुझे खाने से तुम विधवा हो गई इसलिए तुम अब इसी रूप में पूजी जाओगी।

क्यों मनाई जाती है धूमावती जयंती
धूमावती का स्वरूप बहुत ही भयंकर है। उन्हें उस रूप का दर्शन करना हर किसी के बस की बात नहीं। धूमावती देवी विधवा के रूप में एक कौए पर सवार है। वह खुले बालों के साथ श्वेत वस्त धारण किए हुए है। देवी के इस रूप का अवतरण पापियों को दंडित करने के लिए हुआ। माता धूमावती में नष्ट व संहार करने की सभी क्षमताएं निहीत हैं. देवी नक्षत्र ज्येष्ठा नक्षत्र है इस कारण इन्हें ज्येष्ठा भी कहा जाता है.

कई बड़े बड़े ऋषि जैसे ऋषि दुर्वासा, भृगु, परशुराम आदि इन्ही को पूजते थे। इन ऋषियों की मूल शक्ति धूमावति ही हैं। कलह प्रिय होने के कारण इन्हें कलपप्रिय देवी भी कहा जाता है। इनका स्वरूप अत्यंत भयंकर है, इनका यह स्वरूप शत्रुओं के संहार के लिए ही है। धूमावती माता विधवा है, इनका वर्ण विवर्ण है। साथ ही इन्होंने मलिन वस्त्र धारण किए हुए है। इनके केश बिखरे हुए तथा इनके रथ पर काक का निशान है। देवी भय कारक व कलह प्रिय है। जो भक्तो को सभी कष्टों से मुक्त कर देती है।

तंत्र साधना के लिए प्रसिद्ध
पीतांबरा पीठ दतिया जिला मध्य प्रदेश में स्थित है। यह देश के लोकप्रिय शक्तिपीठों में से एक है। कहा जाता है कि कभी इस स्थान पर श्मशान हुआ करता था, लेकिन आज एक विश्वप्रसिद्ध मंदिर है। स्थानील लोगों की मान्यता है कि मुकदमे आदि के सिलसिले में मां पीताम्बरा का अनुष्ठान सफलता दिलाने वाला होता है। पीताम्बरा पीठ के प्रांगण में ही मां धूमावती देवी का मंदिर है, जो विश्व में भगवती धूमावती का एक मात्र मंदिर है। ऐसा कहते हैं कि जब भारत का चीन के साथ युद्ध शुरु हुआ और रुस, मिस्त्र जैसे देशों ने साथ देने से मना किया, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु ने एक विद्वान के कहने पर यहां पूजा पाठ करवाई थी और देश उन कठिन हालातों से बाहर निकल पाया था।

धूूमावती माता स्तुति

विवर्णा चंचला कृष्णा दीर्घा च मलिनाम्बरा,
विमुक्त कुंतला रूक्षा विधवा विरलद्विजा,
काकध्वजरथारूढा विलम्बित पयोधरा,
सूर्पहस्तातिरुक्षाक्षी धृतहस्ता वरान्विता,
प्रवृद्वघोणा तु भृशं कुटिला कुटिलेक्षणा,
क्षुत्पिपासार्दिता नित्यं भयदा काल्हास्पदा।