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पूर्व मुख्यसचिव एम गोपाल रेड्डी मनी लॉन्ड्रिंग केस में बरी, हाईकोर्ट से बड़ी राहत

तेलंगाना हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश के पूर्व आईएएस अधिकारी एम. गोपाल रेड्डी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मामले को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने इस आधार पर सुनाया फैसला।

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पूर्व मुख्यसचिव एम गोपाल रेड्डी मनी लॉन्ड्रिंग केस में बरी, हाईकोर्ट से बड़ी राहत

तेलंगाना उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति के. सुरेंद्र ने मध्य प्रदेश में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एम गोपाल रेड्डी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मामले को रद्द कर दिया है। टेंडर से छेड़छाड़ के मामले में कोर्ट ने कहा कि, गंभीर अपराध से जुड़े मुख्य मामले में बरी होने के बाद किसी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला जारी नहीं रह सकता है। गोपाल रेड्डी द्वारा दायर आपराधिक याचिका को स्वीकार करते हुए न्यायाधीश ने कहा कि, जब पहली बार में कोई अपराध नहीं हुआ तो अपराध पर कोई कार्यवाही नहीं हो सकती। न्यायाधीश ने मामले को रद्द करते हुए कहा, 'अपराध की ऐसी गैर-मौजूद आय पर आधारित कोई भी मामला जारी नहीं रखा जा सकता।'


तेलंगाना कोर्ट ने सवाल किया कि, ईडी अधिकारियों ने गोपाल रेड्डी को हैदराबाद की एक कंपनी मेसर्स मेंटाना के चेयरमेन श्रीनिवास राजू के साथ मिलीभगत कर मनी लॉन्ड्रिंग करने का आरोप लगाया था। ईडी ने कथित मिली भगत के लिए गोपाल रेड्डी और राजू की जांच की थी। दरअसल, ईडी को पहले संदेह हुआ कि, कुछ लोगों ने राज्य के टेंडर पोर्टल को हैक कर लिया है और टेंडर प्रक्रिया में छेड़छाड़ की है। बाद में राज्य ने निविदा रद्द कर दी। हालांकि, भोपाल की ट्रायल कोर्ट ने बाद में मुख्य आपराधिक मामले में अन्य आरोपियों को बरी कर दिया।

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कोर्ट का फैसला

इसके बाद पिछले महीने तेलंगाना उच्च न्यायालय ने राजू के खिलाफ ईडी मामले को इसी आधार पर रद्द कर दिया था कि, ईडी का मनी लॉन्ड्रिंग मामला जारी नहीं रह सकता। क्योंकि मुख्य मामला खत्म हो गया था। चूंकि, राज्य ने निविदा रद्द कर दी थी, इसलिए सार्वजनिक धन की कोई हानि हुई ही नहीं। इसका मतलब था कि, कोई अपराध भी नहीं हुआ। इसलिए अपराध की कोई आय नहीं हो सकती। हाईकोर्ट ने राजू के खिलाफ ईडी मामले को रद्द करते हुए कहा- 'इस पृष्ठभूमि को देखते हुए, गोपाल रेड्डी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले की कार्यवाही भी रद्द होनी चाहिए। जब राजू के खिलाफ मामला रद्द हुआ है तो फिर गोपाल रेड्डी की मिलीभगत को देखने से कोई मतलब नहीं है।'

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ये है मामला

मध्य प्रदेश आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने अप्रैल 2019 में ई-टेंडर घोटाले के मामले में एक प्राथमिकी दर्ज की थी। इसमें कुछ अधिकारियों के साथ ही हैदराबाद की एक कंपनी मेसर्स मेंटाना और भोपाल के एक ठेकेदार आदित्य त्रिपाठी के घर एजेंसी ने छापेमारी की थी। इन पर अधिकारियों को रिश्वत लेने का आरोप लगा था। एजेंसी ने दोनों से मिले दस्तावेज और बयानों के आधार पर पूर्व मुख्य सचिव एम गोपाल रेड्डी को आरोपी बनाया था।