
पर्वत श्रंखलाओं से घिरा मध्यप्रदेश प्रकृति को अपने में समेटे है। यहां 6 टाइगर रिजर्व हैं। 526 बाघों के साथ प्रदेश देश में अव्वल है। अब यहां 700 से ज्यादा बाघ होने का अनुमान है। हर साल यहां दो करोड़ से ज्यादा पर्यटक वन्यजीवन और ऐतिहासिक स्थलों को निहारने आते हैं। बीते दिनों संपन्न राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में मध्यप्रदेश को मोस्ट फिल्म फ्रेंडली अवॉर्ड का तमगा मिला है। प्रदेश में फिल्म सिटी बनाने की भी कवायद चल रही है।
मध्यप्रदेश शहरीकरण की तेज रफ्तार वाले पांच राज्यों में शुमार है। वर्ष 2001 में यहां 339 नोटिफाई शहर (नगरीय निकाय) थे, जो 2011 के बाद 364 हो गए। हर शहर या बड़े गांव की सीमा पर आउटग्रोथ्स (ऐसे आबादी क्षेत्र जो गांव की सीमा के विस्तार के रूप में पहचाने जाने लगते हैं) लगातार बढ़ रहे हैं। वहीं, इस अवधि में यहां पांच हजार से ज्यादा आबादी वाले ऐसे क्षेत्र, जहां 75% पुरुष गैर-कृषि व्यवसाय कर रही हों, की संख्या 55 से 112 हो गई।
चतुराई में सरकार की नीतियों और जनता का जवाब नहीं। दोनों स्तर पर स्थिति संतोषजनक है। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य होगा, जहां मेडिकल की पढ़ाई हिन्दी में होगी। आगे इंजीनियरिंग की पढ़ाई हिन्दी में कराने की तैयारी है। बड़े पैमाने पर इसकी तैयारी चल रही है। वहीं, कोविड काल में मध्यप्रदेश ने कई कीर्तिमान रचे। जनभागीदारी मॉडल से कोरोना को मात दी। कोरोना के टीके लगाने में कई बार देश में कीर्तिमान स्थापित किया।
ग्वालियर-चंबल
बघेलखंड
बुंदेलखंड
मालवा-निमाड़
मध्य क्षेत्र
महाकोशल
3,08,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के साथ मध्यप्रदेश, राजस्थान के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है। यह भारत के उत्तर-मध्य हिस्से में बसा प्रायद्वीपीय पठार का एक हिस्सा है, जिसकी उत्तरी सीमा पर गंगा-यमुना के मैदानी इलाके हैं।
हमेशा से हमारा प्रदेश मध्य में रहा। अखंड भारत का केंद्र बैतूल जिले का बरसाली कहा जाता है तो अविभाजित भारत का केंद्र बिंदु कटनी जिले का करौंदी। वर्तमान भारत का केंद्र बिंदु विदिशा और वर्तमान मध्यप्रदेश का केंद्र बिंदु सागर जिले को माना जाता है।
आज ही के दिन मध्यप्रदेश अस्तित्व में आया। 1 नवम्बर 1956 को राज्य का आधिकारिक ऐलान किया गया था। दरअसल, 1947 में आजादी के बाद 26 जनवरी, 1950 के दिन भारतीय गणराज्य के गठन के साथ सैकड़ों रियासतों का संघ में विलय किया गया। 1950 में पूर्व ब्रिटिश केंद्रीय प्रांत और बरार, मकाराई के राजसी राज्य और छत्तीसगढ़ मिलाकर मध्यप्रदेश का निर्माण हुआ। नागपुर को इसकी राजधानी बनाया। फिर सेंट्रल इंडिया एजेंसी ने मध्य भारत, विंध्य प्रदेश और भोपाल जैसे नए राज्यों का गठन किया। राज्यों के पुनर्गठन के बाद 1956 में मध्य भारत, विंध्य प्रदेश और भोपाल राज्यों को मध्यप्रदेश में विलीन कर दिया गया। तत्कालीन सीपी और बरार के कुछ जिलों को महाराष्ट्र में स्थानांतरित कर दिया गया। भोपाल मध्यप्रदेश की नई राजधानी बना। शुरू में राज्य के 43 जिले थे। इसके बाद वर्ष 1972 में दो बड़े जिलों का बंटवारा किया। सीहोर से भोपाल और दुर्ग से राजनांदगांव अलग किया गया। तब जिलों की कुल संख्या 45 हो गई। वर्ष 1998 में बड़े जिलों से 16 अधिक जिले बने और कुल जिले 61 हो गए। नवंबर 2000 में राज्य का दक्षिण-पूर्वी हिस्सा विभाजित कर छत्तीसगढ़ का नया राज्य बना। इस प्रकार, वर्तमान मध्यप्रदेश राज्य अस्तित्व में आया। आज हमारा राज्य हर क्षेत्र में कीर्तिमान रच रहा है।
जल: नदियों का मायका हमारे यहां
प्रदेश में 200 से ज्यादा बड़ी-छोटी नदियां हैं, इसलिए इसे नदियों का मायका भी कहा जाता है। राज्य की जीवन रेखा नर्मदा भारतीय उपमहाद्वीप की पांचवीं सबसे लंबी नदी है। रेवा उद्गम से पश्चिम की ओर 1,312 किलोमीटर बहकर खंभात की खाड़ी में मिलती है। यहां इंदिरासागर और बरगी जैसे 17 से ज्यादा बड़े बांध हैं। जल जीवन मिशन में 52 लाख से अधिक घरों तक नल से जल पहुंचाया जा चुका है।
धर्म: शंकराचार्य की प्रतिमा लेगी आकार
उज्जैन में महाकाल और ओंकारेश्वर में भगवान ओंकार भक्तों की अटूट श्रद्धा के प्रतीक हैं। उज्जैन में श्रीमहाकाल लोक देश का सबसे बड़ा मंदिर कॉरिडोर है। 900 मीटर से ज्यादा लंबे इस कॉरिडोर में 190 मूर्तियां भगवान शिव की गाथा कहती हैं। आने वाले दिनों में ओंकारेश्वर आध्यात्म के बड़े केंद्र के रूप में उभरेगा। यहां आदि शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी। ध्यान केंद्र बनेगा।
स्वास्थ्य: 21 कॉलेज से अब बदलेगी तस्वीर
कोविड काल के बाद स्वास्थ्य सुविधाओं में बड़े बदलाव हुए हैं। आने वाले दिनों में प्रदेश में 21 मेडिकल कॉलेज खुलना प्रस्तावित है, जो देश में खुलने वाले 112 मेडिकल कॉलेजों में राज्यों की संख्या के लिहाज से सबसे ज्यादा होंगे। अभी हमारे यहां अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल जैसा राष्ट्रीय स्तर का बड़ा संस्थान है। ऑक्सीजन के मामले में भी प्रदेश आत्मनिर्भर हो गया है।
स्वच्छता: देश के साफ राज्य का तमगा
स्वच्छता में हमारा दबदबा है। इंदौर लगातार छठवीं बार देश का सबसे स्वच्छ शहर बना है। मध्यप्रदेश सबसे स्वच्छ राज्य के रूप में उभरा है। भोपाल ने 5 स्टार के साथ सेल्फ सस्टेनेबल राजधानी का तमगा हासिल किया है। राज्य को अलग-अलग श्रेणी में 16 पुरस्कार मिले हैं। खुशखबर यह भी है कि हमारे यहां राष्ट्रीय महत्त्व के 291 स्मारक स्थल हैं। इनमें खजुराहो सबसे प्रसिद्ध है।
कृषि: सोयाबीन-गेहूं के उत्पादन में अग्रणी
मध्यप्रदेश को सात बार कृषि कर्मण पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। तिलहन, दलहन, सोयाबीन के क्षेत्र और उत्पादन में प्रदेश, देश में पहले पायदान पर है। गेहूं, मसूर, मक्का और तिल के क्षेत्र व उत्पादन में दूसरे नंबर है। हमें सोया स्टेट का दर्जा भी हासिल है। बालाघाट की ‘चिन्नौर धान’ को जीआइ टैग मिल चुका है। राज्य में जैविक खेती का कुल क्षेत्र करीब 16.37 लाख हेक्टेयर है, जो देश में सर्वाधिक है।
गिरिजाशंकर, वरिष्ठ पत्रकार व लेखक
आधी रात होते-होते नेता, अधिकारी, पत्रकार कोठी आने लगे। सुबह का इंतजार कोई नहीं करना चाहता था, लिहाजा 31 अक्टूबर की रात को नए प्रदेश के गठन की औपचारिकताएं पूरी किए जाने की तैयारी थी। चार प्रांतों मध्यभारत, विंध्यप्रदेश, भोपाल और मध्यप्रदेश को मिलाकर नए मध्यप्रदेश राज्य को मूर्तरूप दिया था। 1952 के विधानसभा चुनाव (आजादी के बाद हुए पहले आम चुनाव) में इन सभी राज्यों में कांग्रेस की निर्वाचित सरकारें थीं। इसलिए नए राज्य में बिना चुनाव के कांग्रेस की अंतरिम सरकार बननी थी।
चारों प्रांतों में सबसे बड़ा और पुराना मध्यप्रदेश था, लिहाजा मुख्यमंत्री पं. रविशंकर शुक्ल नए मध्यप्रदेश के सीएम यानी विधायक दल के नेता चुने गए थे, जिन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई जानी थी। यह शपथ राज्यपाल दिलाते हैं, इसलिए मुख्यमंत्री के पहले, नए राज्यपाल की शपथ होनी थी।
डॉ. बी. पट्टाभि सीतारमैया को राज्यपाल पद की शपथ दिलाई गई। उच्च न्यायालय के नए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मोहम्मद हिदायतुल्ला, जो मप्र उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे और बाद में देश के उप-राष्ट्रपति बने। सुबह आंख खुलते ही न केवल भोपालवासी वरन् चारों प्रांतों के लोग एक नए राज्य मध्यप्रदेश के निवासी होने वाले थे। नया राज्य बनने का यह उत्सव आम जनता का उत्सव नहीं था। बंद हॉल में शपथ के साथ उदय होने वाले नए राज्य के इस उत्सव से केवल वे ही लोग जुड़े हुए थे, जिनके हाथों इस नए राज्य की सत्ता के सूत्र आने वाले थे। अलबत्ता पत्रकार इस घटना के गवाह जरूर बनेे।
Updated on:
01 Nov 2024 02:22 pm
Published on:
01 Nov 2022 11:13 am
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